एफ़डीआई पर वोटिंग: अंकों के अखाड़े में

 सोमवार, 26 नवंबर, 2012 को 13:36 IST तक के समाचार
मुलायम सिंह - मायावती

सरकार की सारी उम्मीदें समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के सहारे टिकीं हैं.

रीटेल के क्षेत्र में विदेशी निवेश को अनुमति पर सरकार मतदान को टालने की पूरी कोशिश कर रही है. अगर सरकार की मतदान में हार हाती है तो तकनीकी रूप से उसके गिरने की कोई संभावना नहीं है लेकिन मतदान में हारने का अर्थ होगा कि यूपीए नैतिक रूप से सत्ता में रहने का अधिकार खो देगी.

इसके अलावा कांग्रेस नेतृत्व जो कि पूरे जोश से 2014 आम चुनाव में जाने की तैयारियों में लगा है उसके लिए इस हार का दाग मिटा पाना मुश्किल होगा और वह चुनावी गठबंधनों का प्रयास करने के लिए बहुत अच्छी हालत में नहीं होगा.

समीकरण 1

अगर समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी तृणमूल कॉंग्रेस के साथ एफडीआई के खिलाफ मत देने पर उतर आएँ तो सरकार के लिए मुश्किल खड़ी हो जाएगी. मगर इसकी संभावना कम है क्योंकि बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी दोनों ही संकेत दे चुकी हैं कि वे एफडीआई पर मतदान के पक्ष में नहीं हैं.

लोक सभा में सदस्यों की कुल संख्या : 544

बहुतमत की ज़रुरत : 272

यूपीए : 254

एनडीए : 152

यूपीए को बाहर से समर्थन : बीएसपी 21 + एसपी 22+ आरजेडी 4+ जेडीएस 3 = 50

इस बात की प्रबल संभावना है कि दोनो वोटिंग की हालत में सदन से बाहर चली जाएँ. सरकार के प्रमुख घटक दल डीएमके के 18 लोकसभा सांसद हैं. उसके भी मतदान की हालत में सदन से अनुपस्थित रहने की संभावना है.

डीएमके द्वारा एफडीआई पर सरकार के खिलाफ वोट करने की हालत में सरकार ना केवल मतदान में हार जाएगी बल्कि उसकी साख को बुरी तरह से धक्का लगेगा. एक ऐसा घटक जो कि सरकार में हमेशा से भागीदार रहा है वो सरकार के खिलाफ मत दे ये कांग्रेस के लिए शर्मिंदगी का कारण बन जाएगा.

सरकार की पहली कोशिश यह है कि डीएमके उनके साथ खड़ा हो वरना बहिष्कार करे. डीएमके द्वारा वोटिंग का बहिष्कार भी सरकार के लिए कोई सुखद बात नहीं है. लेकिन यह सरकार के खिलाफ मतदान से बेहतर है.

समीकरण 2

अगर तृणमूल कॉंग्रेस एफडीआई का विरोध करती हैं और समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजपार्टी सदन का बहिष्कार करती हैं तो सदन की संख्या कम हो जाएगी और सरकार को कोई संकट नहीं होगा. बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी दोनों कह चुके हैं कि वो भाजपा के साथ इस मुद्दे पर नहीं खड़े होंगे.

समीकरण 3

अगर सरकार मत विभाजन के लिए राजी नहीं होती है तो विपक्ष किसी भी सूरत में संसद को नहीं चलने देगा. अभी तक इसी की प्रबल संभावना है.

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