एफ़डीआई: यूपीए एकजुट, बहस के लिए तैयार

 मंगलवार, 27 नवंबर, 2012 को 17:49 IST तक के समाचार
कांग्रेस

सरकार और विपक्षीय पार्टियों के बीच कई दिनों से मतदान को लेकर गतिरोध बना हुआ है

केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता कमल नाथ ने कहा है कि एफडीआई के मुद्दे पर सरकार किसी भी नियम के तहत बहस के लिए तैयार है.

हालांकि उन्होंने कहा कि इस पर अंतिम फैसला लोक सभा के अध्यक्ष लेंगे. कमल नाथ ने जोर देकर कहा कि यूपीए पूरी तरह से एकजुट है और एफ़डीआई के मुद्दे पर उनके पास पर्याप्त समर्थन है..

यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार वोटिंग से परहेज़ कर रही है, उन्होंने कहा, ''सरकार किसी भी नियम के तहत चर्चा से परहेज़ नहीं कर रही है. सबसे बड़ी बात यह है कि यूपीए पूरी तरह से एकजुट है.''

यूपीए की बैठक के बाद कमल नाथ ने यह जानकारी दी. इस बैठक में सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत कांग्रेस और उसकी सहयोगी पार्टियों के कई बड़े नेता शामिल थे.

डीएमके का समर्थन

इससे पहले डीएमके ने सरकार को समर्थन देने का आश्वासन दिया उस स्थिति में जब कि एफडीआई पर वोटिंग होती है.

उधर बीजेपी के प्रवक्ता शाहनवाज़ हुसैन का कहना है, ''हमें हैरानी है कि सरकार के पास अब पूरी संख्या है जबकि कल तक ऐसा नहीं था.''

"हम एफडीआई के खिलाफ हैं. हम इसे उत्तर प्रदेश में लागू नहीं करेंगे. हम संसद में एफडीआई पर बहस चाहते हैं. कौन कहता है कि वोटिंग ही विरोध जताने का एकमात्र तरीका है. "

नरेश अग्रवाल

इस बीच समाजवादी पार्टी का कहना है कि वो एफडीआई के खिलाफ है लेकिन इसे ज़ाहिर करने का तरीका केवल वोटिंग नहीं है.

पार्टी के नेता नरेश अग्रवाल ने कहा, ''हम एफडीआई के खिलाफ हैं. हम इसे उत्तर प्रदेश में लागू नहीं करेंगे. हम संसद में एफडीआई पर बहस चाहते हैं. कौन कहता है कि मत ही विरोध जताने का एकमात्र तरीका है.''

सीपीएम के नेता सीताराम येचुरी ने कहा, ''हम यह मानते हैं कि एफडीआई का फैसला देश की जनता के हित में नहीं है. वो पार्टियां जिन्होंने अपना पक्ष बदला है उन्हें लोगों को जवाब देना होगा.''

इस बीच मंगलवार को संसद में वही हुआ जो शीतकालीन सत्र के 22 नवंबर से आरंभ होने से हो रहा है. दोनों सदनों में हंगामा हुआ और स्थगित किया गया.

सोमवार को एफ़डीआई को लेकर मतदान पर गतिरोध को समाप्त करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक बेनतीजा रही थी.

नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज ने बैठक के बाद कहा था कि विपक्ष एफ़डीआई पर संसद में बहस के बाद वोटिंग से कम पर नहीं मानेगा. जबकि सरकार का कहना था कि वो इस मसले पर बहस के लिए तैयार है लेकिन मतदान के लिए नहीं.

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