भारतीय कंपनी को मालदीव सरकार का झटका

मालदीव
Image caption मालदीव में विदेशी निवेश का संकट बढ़ा.

मालदीव सरकार ने अपने सबसे बड़े विदेशी निवेश क़रार को रद्द करते हुए भारतीय कारोबारी समूह जीएमआर को सात दिन के अंदर मालदीव से अपना काम समेटने को कहा है.

जीएमआर ने मालदीव की राजधानी में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बनाने का अनुबंध हासिल किया था और जिसके तहत कंपनी मालदीव में करीब 2555 करोड़ रुपए का निवेश कर रही थी.

जीएमआर समूह ने यह अनुबंध विश्व बैंक की निगरानी में जारी टेंडर के दौरान 2010 में हासिल किया था. इस अनुबंध के समय मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद थे. इस प्रोजेक्ट में जीएमआर समूह और मलेशियाई एयरपोर्ट्स होल्डिंग बराबरी के साझीदार हैं.

लेकिन मौजूदा राष्ट्रपति मोहम्मद वहीद ने कहा है कि यह अनुबंध ठीक नहीं था क्योंकि इसमें प्रत्येक नागरिक से एयरपोर्ट विकास शुल्क के नाम पर 25 डॉलर वसूले जा रहे थे, जिसकी इजाजत संसद ने नहीं दी है.

मालदीव सरकार ने अब जीएमआर समूह को सात दिन के अंदर देश के भीतर अपनी गतिविधियों को बंद करने का आदेश देते हुए कंपनी के साथ समझौता रद्द कर दिया है. मालदीव के एटॉर्नी जनरल अजिमा शुकूर का कहना है कि समझौते के तहत जीएमआर को देश छोड़ने के लिए 30 दिनों का नोटिस देना जरूरी थी, लेकिन अब समझौता ही रद्द हो गया तो उसकी कोई बाध्यता नहीं है.

भारत- मालदीव रिश्तों पर असर

मालदीव सरकार के इस फ़ैसले से भारत और मालदीव के आपसी रिश्तों पर भी असर पड़ने की आशंका है. भारत सरकार ने इस मामले में कहा है कि वह मालदीव में रह रहे भारतीय परिवारों की सुरक्षा और हितों के जरूरी कदम उठाएगा.

भारत सरकार ने ये उम्मीद भी जताई है कि मालदीव इस अनुबंध के सिलसिले में सभी जरूरी और कानूनी प्रक्रिया को पूरा करेगा. भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, “जीएमआर के अनुबंध को रद्द करने से पहले कंपनी के साथ बातचीत नहीं की गई और इससे दुनिया भर के निवेशकों में गलत संदेश गया है.”

हालांकि मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद वहीद ने समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए गए इंटरव्यू में कहा है, “हमें भरोसा है कि इस अनुबंध के रद्द किए जाने से भारत और मालदीव के रिश्तों पर कोई असर नहीं पड़ेगा. क्योंकि नशीद सरकार ने यह अनुबंध संदिग्ध परिस्थितियों में किया. हालांकि हम भारतीय कंपनियों के साथ दो अन्य अनुबंध को आगे बढा़ने के पक्ष में हैं.” वहीद ने उम्मीद जताई है कि उनके इस कदम के बाद भी भारत और मालदीव के बीच सामरिक और कारोबारी लिहाज से संबंध मज़बूत होंगे.

वहीद ने आगे कहा, “ मालदीव में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, ताज होटल समूह और टाटा हाउसिंग जैसीं कंपनियां निवेश कर रही हैं. इन लोगों का कारोबार भी बेहतर ढंग से चल रहा है. मालदीव भारतीय निवेशकों का हमेशा स्वागत करने को तैयार है, लेकिन उन्हें हमारे कानून के मुताबिक ही कारोबार करना होगा.”जीएमआर समूह ने मालदीव सरकार के इस फैसले को एकतरफा और तर्कहीन बताया है. जीएमआर समूह ने एक प्रेस रिलीज़ जारी करके कहा है, “हम अपने कर्मचारियों और अपनी संपत्ति की सुरक्षा के लिए हरसंभव कदम उठा रहे हैं. ”

मालदीव के राष्ट्रपति कार्यालय से जुड़े सूत्रों ने समाचार एजेंसी रायटर को बताया है कि यह राष्ट्रपति मोहम्मद वहीद की नाकामी है. वहीं दूसरी ओर राष्ट्रपति के प्रवक्ता इमाद मसूद ने समाचार एजेंसी रायटर को बताया, “राष्ट्रपति के निर्देश के मुताबिक कैबिनेट ने यह अनुबंध रद्द कर दिया है क्योंकि वह अनुबंध वैध नहीं था.”

मालदीव सरकार के इस कदम से देश के अंदर विदेशी निवेश के भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे हैं. मालदीव में विदेश निवेशकों के हितों को लेकर भी आशंका बढ़ गई है. बीते साल राजनीतिक उठापठक झेलने के बाद मालदीव को अभी कई पर्यटन योजानाओं में विदेशी निवेश की जरूरत है.

भूतपूर्व राष्ट्रपति नशीद ने इस अनुबंध के रद्द किए जाने पर एक बयान जारी करते हुए कहा कि मोहम्मद वहीद देश को आर्थिक बर्बादी की ओर ले जा रहे हैं.

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