फेसबुक गिरफ्तारियों पर सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब

 शुक्रवार, 30 नवंबर, 2012 को 13:16 IST तक के समाचार
सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट इस मामले को गंभीरता से ले रहा है

सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी कर पूछा है कि किन परिस्थितियों में ठाणे की उन दो लड़कियों को गिरफ्तार किया गया जिन्होंने शिवसेना नेता बाल ठाकरे की मौत के बाद मुंबई बंद की फेसबुक पर आलोचना की थी.

दिल्ली की एक छात्रा श्रेया सिंघल की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश अल्तमस कबीर और और जस्टिस जे चेलामेश्वर की खंडपीठ ने ये नोटिस दिया है.

इस जनहित याचिका में आईटी कानून की धारा 66 ए को खत्म करने की मांग की गई है. इसी धारा के तहत पुलिस ने महाराष्ट्र के ठाणे जिले में पालघर की दो लड़कियों को गिरफ्तार किया था.

मुख्य न्यायाधीश अल्तमस कबीर और जस्टिस जे चेलामेश्वर की खंडपीठ ने कहा, “महाराष्ट्र सरकार को निर्देश दिया गया है कि वो बताएँ कि किन परिस्थतियों में इन लड़कियों को फेसबुक पर टिप्पणी करने के लिए गिरफ्तार किया गया.”

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती

बेंच ने राज्य सरकार से चार हफ्तों के भीतर नोटिस का जवाब देने को कहा है. अदालत ने पश्चिम बंगाल और पॉन्डिचेरी की सरकारों को भी इस मामले में पक्ष बनाया है क्योंकि वहां भी हाल में ऐसे मामले देखने को मिले हैं.

"कृपया सूचना प्रोद्यौगिकी अधिनियम 2000 की धारा 66 ए की समीक्षा की जाए."

जीई वाहनवती, अटॉर्नी जनरल

दिल्ली सरकार को भी नोटिस जारी किया गया है और जवाब देने के लिए चार हफ्तों का समय दिया गया है. मामले की अगली सुनवाई छह हफ्तों बाद होगी.

अटॉर्नी जनरल जीई वाहनवती ने कहा, “कृपया सूचना प्रोद्यौगिकी अधिनियम 2000 की धारा 66 ए की समीक्षा की जाए.” अदालत ने इस मामले में अटॉर्नी जनरल की मदद भी मांगी है.

वाहनवती ने इन दिशानिर्देशों की तरफ ध्यान दिलाया कि आईटी अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने का फैसला ग्रामीण इलाकों में डीजीपी और शहरों में आईजीपी रैंक का अधिकारी ही करेगा.

अटॉर्नी जनरल ने कहा, “पुलिस थाने का प्रमुख ऐसा नहीं कर सकता है.”

इस बीच श्रेया की तरफ से पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने इस बारे में अदालत के निर्देश मांगे हैं कि देश भर में इस सिलसिले में कोई भी मामला तब तक दर्ज नहीं होना चाहिए जब तक ऐसी शिकायतों को राज्य के डीजीपी देख न लें और अपनी मंजूरी न दें.

इसे भी पढ़ें

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.