सिकुड़ रहे हैं भारतीय सेना के फॉयरिंग रेंज

भारतीय थल सेना भी शहरीकरण और अतिक्रमण का शिकार हो रही है. तीन साल पहले तक सेना के पास अभ्यास करने के लिए 104 फॉयरिंग रेंज थे लेकिन अब केवल 66 रेंज ही बचे हैं.

इतना ही नहीं, इन बचे हुए 66 फॉयरिंग रेंजों में से 15 को बचाए रखने के लिए भी सेना को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है.

फॉयरिंग रेंज यानी वो जगह जहां सेना गोलीबारी का अभ्यास करती है और अपने हथियारों को परखने के लिए उन्हें चलाकर, इस्तेमाल करके देखती है.

सेना का कहना है कि शहरीकरण और अतिक्रमण के अलावा राज्य सरकारों के पास ज़मीन के अधिकार होना तेज़ी से घट रहे फॉयरिंग रेंजों का एक मुख्य कारण है.

15 रेंज पर सवाल

थल सेना के पास जो 66 फॉयरिंग रेंज बचे हैं उनमें से भी 15 सेना के पास नहीं हैं क्योंकि विभिन्न राज्य सरकारों ने अधिसूचना जारी करके इन्हें वापस ले लिया है.

Image caption सेना के पास अभ्यास करने और अपने हथियारों को परखने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं रह गए है.

कुछ मामलों में जितने समय के लिए इन्हें सेना को दिया गया था, वो समय सीमा समाप्त हो गई है. सरकार प्रयास कर रही है कि किसी तरीके से इन्हें वापस लिया जाए और इसके लिए ज़रूरी अधिसूचना जारी कराई जाए.

भारतीय सेना के प्रवक्ता कर्नल जगदीप दहिया ने बीबीसी को बताया, ''इन रेंजों को एक सीमित समय के लिए अधिसूचना जारी करके सेना को दिया जाता है. जब इनकी लीज़ समाप्त हो जाती है तो दोबारा अधिसूचना जारी करनी होती है.''

क्यों फायरिंग ज़रूरी?

कर्नल जगदीप दहिया बताते हैं, ''रेंज कई प्रकार की होती हैं. कुछ तो छोटी होती हैं और कुछ बड़ी जहां तोपों आदि का भी अभ्यास किया जाता है.''

उन्होंने बताया, ''इनके कम होने से सेना के अभ्यास पर फर्क पड़ रहा है. फिलहाल हमारा काम चल रहा है लेकिन मुश्किल तो होती है.''

रक्षा विशेषज्ञ और रिटायर्ड मेजर जनरल अफसर करीम का कहना है, ''अगर फॉयरिंग न कर सकें तो लोगों और हथियारों की कुशलता और कार्यक्षमता का कैसे पता चलेगा?''

उन्होंने कहा, ''हथियार खुद से तो फॉयर नहीं करेगा. ये देखने के लिए कि दिन और रात में कोई हथियार कैसे काम कर रहा है, क्या वो पूरी रेंज हासिल करता है, हमे फॉयरिंग रेंज में फॉयर करके देखना होता है.''

जनरल करीम ने कहा, ''फौजी और हथियार का मिलाप होना ज़रूरी है. लेकिन ऐसा करने के लिए रेंजों की कमी होने लगी है क्योंकि खाली ज़मीन कम होती जा रही है. लोग ऐतराज़ करने लगे हैं क्योंकि या तो वे वहां बसे हुए थे या फिर बसना चाहते हैं. राज्य सरकारें भी ऐतराज़ कर रही हैं.''

सेना के एक अधिकारी का कहना है कि अभी तक फॉयरिंग रेंज में अभ्यास या गोली चलने की वजह से किसी के मारे जाने की खबर नहीं है. हालांकि अनाधिकृत तरीके से मलबा उठाने की वजह से 10 लोग मारे गए हैं.

सेना का कहना है कि वो हर तरह के ऐहतियात बरतती है ताकि रेंज में फॉयरिंग या अभ्यास की वजह से किसी तरह के जानमाल का नुकसान न हो.

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