सुषमा स्वराज ने आक्रामक अंदाज़ में सरकार को घेरा

सुषमा स्वराज
Image caption सुषमा ने कहा एफडीआई न तो आम नागरिकों और न ही किसानों के हित में है. (फाईल फोटो)

खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) पर लोकसभा में महत्त्वपूर्ण बहस मे बीजेपी की नेता सुषमा स्वराज ने आक्रामक तेवर अपनाते हुए कहा कि एफडीआई किसी के हित में नहीं है और इससे रोज़गार नहीं बल्कि बेरोज़गारी बढेगी.

उन्होंने सरकार से एफडीआई का फैसला वापस लेने की मांग की. उनके भाषण के दौरान हंगामा भी देखने को मिला.

हालांकि काग्रेस ने अपने फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि एफडीआई से न केवल देश में निवेश आएगा बल्कि कई और फायदे भी होंगे.

सुषमा स्वराज ने कहा कि इस बहस की ज़रूरत इसलिए पड़ी है क्योंकि सरकार इस बारे में अपने बयान से मुकरी है.

एफडीआई पर होने वाली बहस नियम 184 के तहत हो रही है. इस नियम के अनुसार बहस के बाद वोटिंग का प्रावधान हैं.

बहस की शुरुआत करते हुए सुषमा स्वराज ने कहा, ''हमने नियम 184 का आग्रह इसलिए किया कि साल 2011 में इसी तरह के शीतकालीन सत्र के दौरान सरकार ने यही निर्णय लिया था जिसका चारों ओर से विरोध किया गया था.''

उन्होंने कहा, ''उस समय तत्कालीन सदन के नेता प्रणब मुखर्जी ने प्रधानमंत्री से बात करने के बाद कहा था कि जब तक आम सहमित नहीं हो जाती इस पर फैसला नहीं किया जाएगा.''

'अखबार से पता चला'

सुषमा स्वराज ने कहा कि उन्हें बहुत हैरानी हुई जब अचानक कुछ समय पहले सरकार ने एफडीआई का ऐलान कर दिया.

उन्होंने कहा, ''हमसे केंद्रीय मंत्रियों ने कहा कि सरकार ने नीति बदल दी है. उन्होंने कहा क्योंकि राज्य सरकारों पर निर्णय छोड़ा गया है इसलिए उनसे बात करने की जरूरत नहीं है.''

सुषमा के मुताबिक़, ''मीटिंग तो दूर की बात है, इस पर कोई पत्राचार नहीं हुआ. हमने इसके बारे में अखबार में पढ़ा.''

उन्होंने कहा कि वो एफडीआई का विरोध कर रहे हैं 'क्योंकि यह न तो आम नागरिकों और न ही किसानों के हित में है.'

उन्होंने कहा कि एफडीआई से सबसे अधिक नुक्सान छोट दुकानदारों को होगा. ''सब देश तबाही से अपने आप को बचाने में लगे हैं और छोटे दुकानदारों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं.''

उन्होने कहा, ''बुद्धिमान दूसरों की गलती से सीखते हैं.''

काग्रेस का बचाव

उधर केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने एफडीआई के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि इससे देश में निवेश आएगा. ''कोई भी अगर एफडीआई में आना चाहता है तो उसको 100 मिलियन ड़ालर (10 करोड़ डॉलर) का निवेश करना पड़ेगा.''

उन्होंने कहा कि यह कहना गलत है कि बड़ी कंपनियों को इससे बहुत फायदा पहुंचेगा. उन्होंने कहा कि चीन में जब 1992 को एफडीआई को इजाज़त दी गई तो व़ॉलमार्ट भी आया. ''लेकिन 2008 में वो पहली बार मुनाफे में आया तब तक वो घाटे में था.''

इससे पहले बीजेपी के नेता यशवंत सिन्हा ने मांग की थी कि फेमा के लिए संसद में अलग से चर्चा और वोटिंग की जाए.

लेफ्ट ने भी बीजेपी की इस मांग का समर्थन किया था.

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