विपक्ष ने एफ़डीआई मुद्दे पर सरकार को घेरा

मुलायम सिंह
Image caption मुलायम सिंह का कहना है कि विपक्ष की भूमिका सुझाव देने की है.

खुदरा कारोबार में सीधे विदेशी निवेश को मंजूरी के मुद्दे पर मंगलवार को लोकसभा में बहु-प्रतीक्षित बहस के दौरान समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने सरकार की आलोचना में विपक्ष के साथ स्वर में स्वर मिलाया.

लेकिन बुधवार को होने वाली वोटिंग के दौरान सरकार का पक्ष लेने या विपक्ष के साथ जाने के मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट नहीं की. वहीं संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन यानी यूपीए की सहयोगी पार्टी डीएमके ने विरोध के बावजूद सरकार के रास्ते में बाधा नहीं बनने का वादा किया.

सुषमा स्वराज ने आक्रामक अंदाज़ में सरकार को घेरा

समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने कांग्रेस को चेतावनी दी कि एफडीआई को मंजूरी के फैसले से कांग्रेस के चुनावी परिदृश्य पर असर पड़ेगा और इसका फायदा भारतीय जनता पार्टी को होगा.

बहुजन समाज पार्टी के नेता दारा सिंह चौहान ने सरकार को परामर्श दिया कि वो इस फैसले पर अमल में जल्दबाजी न करे. यूपीए के लिए इन दोनों ही पार्टियों का समर्थन अहम होगा.

'धोखा और साजिश'

दोनों ही पार्टियों ने सरकार के इस दावे को 'धोखा' बताया कि एफडीआई को मंजूरी से रोजगार के अवसर पैदा होंगे. दोनों ही पार्टियों ने इसे देश के 25 करोड़ छोटे दुकानदारों को खत्म करने की 'साजिश' बताया.

मुलायम सिंह यादव और दारा सिंह चौहान ने विपक्ष के साथ सुर से सुर मिलाते हुए महात्मा गांधी का जिक्र किया और सपा प्रमुख ने यहां तक कह दिया कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को कम से कम अपने उपनाम को तो तवज्जो देते हुए इस कदम को आगे नहीं बढ़ने देना चाहिए.

दारा सिंह चौहान ने कहा कि उनकी पार्टी इस मुद्दे पर वोटिंग के बारे में पार्टी का रुख का बुधवार को ही जाहिर करेंगे. उन्होंने कहा, ''हम इस बारे में गंभीरता से सोच रहे हैं कि हमें साम्प्रदायिक ताकतों के साथ खड़ा होना है या नहीं.''

समाजवादी पार्टी ने भी ने वोटिंग के मुद्दे पर चुप्पी साधी है. मुलायम सिंह यादव ने कहा, ''विपक्ष की भूमिका सुझाव देने की है और हम यही कर रहे हैं. हम सुझाव दे रहे हैं कि एफडीआई के मुद्दे पर आगे नहीं बढ़ना चाहिए.''

तर्क-वितर्क

Image caption सुषमा स्वराज ने कहा कि एफडीआई के मुद्दे पर सरकार को देश हित का ध्यान रखना चाहिए.

डीएमके नेता टीकेएस इलानगोवान ने कहा कि उनकी पार्टी एफडीआई के सख्त खिलाफ है लेकिन पार्टी फिर भी सरकार के खिलाफ वोटिंग नहीं करेगी.

उन्होंने कहा, ''हम सरकार नहीं गिराएंगे, हम विपक्ष के साथ हाथ नहीं मिलाएंगे, हम भारतीय जनता पार्टी के साथ नहीं जाएंगे.''

इससे पहले, सरकार की आलोचना करते हुए लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने राष्ट्र हित के मद्देनजर एफडीआई को मंजूरी नहीं देने की मांग करते हुए दावा किया कि इससे बेरोजगारी बढ़ेगी, किसानों का उत्पीड़न होगा और उपभोक्ताओं को भी आघात पहुंचेगा.

वहीं सरकार की ओर से दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल ने विपक्ष को आड़े हाथों लिया और जोर दिया कि एफडीआई पर आगे बढ़ने से किसानों, छोटे उद्योगों, युवाओं और उपभोक्ताओं को भी लाभ होगा.

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