मायावती और मुलायम ने पार की सरकार की नैया

संसद
Image caption लोकसभा में एफडीआई पर दो दिनों तक बहस चली

यूपीए सरकार ने खुदरा व्यापार के क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के मुद्दे पर लोकसभा में दो दिनों तक चली बहस के बाद मतदान में जीत हासिल कर ली है.

सुषमा स्वराज की ओर से मंगलवार को प्रस्ताव पेश किया गया था कि सरकार को खुदरा व्यापार में एफ़डीआई को वापस ले लेना चाहिए. इस पर मतदान में 218 सदस्यों ने प्रस्ताव का समर्थन किया मगर 253 सदस्यों ने सुषमा स्वराज के प्रस्ताव का विरोध किया.

इससे पहले सरकार की सहयोगी पार्टियों समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने लोकसभा मतदान से पहले सदन से वॉकआउट कर दिया.

वॉकआउट के बाद सपा नेता मुलायम सिंह यादव ने कहा कि सरकार की एफडीआई पर नीति से किसान परेशान है और पांच करोड़ खुदरा व्यापारी बर्बाद हो गए हैं इसलिए पार्टी ने सदन का बहिष्कार करने का फैसला किया.

इस तरह सदन का प्रभावी बहुमत का आँकड़ा अब कम हो गया है और यूपीए सरकार के आराम से ये वोट जीत लेने की संभावना है.

इससे पहले बुधवार को दूसरे दिन लोकसभा में खुदरा में एफ़डीआई पर बहस जारी रही जहां विपक्ष और सरकार, दोनों ने ही अपना-अपना पक्ष रखा.

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, जनता दल यूनाइटेड, शिरोमणि अकाली दल, शिवसेना, बीजू जनता दल, राष्ट्रीय जनता दल के नेताओं ने बहस में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया. दूसरी तरफ़ सरकार के बचाव में एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल और कांग्रेस के दीपेन्दर हुडा सामने आए.

समर्थन

दोपहर बाद लालू यादव ने जैसे ही विपक्ष को जमूरा कह दिया तो सदन में शोर मच गया. इस बयान पर विपक्ष ने आपत्ति की और कुछ देर तक लोकसभा स्थगित की गई. हालांकि बाद में उनके माफ़ी मांगने के बाद संसद की कार्यवाही फिर से चालू हो गई.

दोबारा बहस में हिस्सा लेते हुए लालू यादव ने सरकार का ज़ोरदार समर्थन करते हुए कहा, "हम सरकार का समर्थन करते हैं और देश के किसानों और मजदूरों से अपील करते हैं कि वो बीजेपी के झांसे में न आएं, वो देश को आगे नहीं बढ़ने देना चाहती."

लालू यादव ने कहा कि भाजपा ने 2002 के अपने मेनिफेस्टो में खुदरा में एफ़डीआई का समर्थन किया था.

इसके पहले विपक्ष पर पलटवार करते हुए एनसीपी के प्रफुल्ल पटेल ने विपक्ष से सवाल पूछा कि उन्होंने देश में मॉल्स का विरोध क्यों नहीं किया. अपने संसदीय क्षेत्र का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां चीनी फर्नीचर की दुकानें होने के बावजूद काम करने के लिए बढ़ई मिलना मुश्किल है.

वैश्वीकरण और आर्थिक उदारीकरण की बात करते हुए प्रफुल्ल पटेल ने कहा, "आउटसोर्सिंग को लेकर, जिस सेक्टर में हमारे हज़ारों नौजवान काम कर रहे हैं, आज उसका अमरीका में विरोध हो रहा है. तो क्या आप चाहेंगे कि हमारे यहां से सॉफ्टवेयर का निर्यात बंद हो जाए? जितने उमंग से हम चाहते हैं कि हमारी वस्तुएं बाहर निर्यात हों, वही दूसरे देश के लोग भी चाहते होंगे. आज हमें बदलती हुई परिस्थिति का भी ध्यान रखना चाहिए."

विरोध के स्वर

भारतीय जनता पार्टी के मुरली मनोहर जोशी ने कहा, "विदेशी बैंकों की ही तरह वॉलमार्ट गांवों में नहीं जाएगा, वो शहरों में ही रहेगा. सरकार किसानों की आमदनी बढ़ाने की बात करती है लेकिन इससे किसानों की दुर्दशा होगी, उनकी आमदनी नहीं बढ़ेगी. दुनिया के धनी देशों के किसानों को सब्सिडाइज़ किया जा रहा है, आप उसकी सब्सिडी ख़त्म करने पर उतारू हैं. आप किसान को बढ़ाइए, वॉलमार्ट को नहीं बढ़ाइए."

सुबह बहस की शुरुआत करते हुए सीपीएम के बासुदेब आचार्य ने कहा "सरकार को खुदरा में एफ़डीआई नीति के बारे में फिर से विचार करना चाहिए. इससे न तो किसान और न ही उपभोक्ताओं को फ़ायदा होगा. हम अपने देश में आसानी से वॉलमॉर्ट को नहीं आने देंगे."

जनता दल युनाइटिड के शरद यादव ने भी एफ़डीआई का विरोध करते हुए सरकार पर देश से ज़्यादा बाज़ार के बारे में चिंतित होने का आरोप लगाया.

उन्होंने कहा, "हम सरकार को गिराना नहीं चाहते. अगर ऐसा होता तो हम अविश्वास प्रस्ताव पर तृणमूल का साथ देते. हमारा मकसद किसान को बचाना है. अगर आप(सरकार) एफ़डीआई रोलबैक नहीं करेंगे तो हम सरकार को रोलबैक करेंगे."

सीपीआई के गुरुदास दासगुप्ता ने कहा कि वॉलमार्ट की मदद करने के लिए 120 करोड़ आबादी वाले देश के प्रधानमंत्री सरकार की बलि चढ़ाने के लिए तैयार हैं. उन्होंने सवाल किया क्या वॉलमार्ट की मदद करना वाकई इतना ज़रूरी है?

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