देवबंद का फरमान, रिसेप्शनिस्ट महिलाएं रहें सावधान!

  • 6 दिसंबर 2012
देवबंद

उत्तर प्रदेश के शहर देवबंद की फ़तवा देने वाली इस्लामी संस्था दारुल उलूम ने कहा है कि मुसलमान महिलाओं के लिए दफ़्तरों में रिसेप्शनिस्ट की तरह से काम करना ग़ैर इस्लामी है.

दारुल उलूम देवबंद ने मुसलमान महिलाओं को सलाह दी है कि वो दफ़्तरों में सुरक्षित न होने के कारण रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम न करें.

दारुल उलूम का ये फरमान भारत और मुसलमान देशों में लाखों मुसलमान रिसेप्शनिस्टों को झटका दे सकता है.

जबकि मुसलमान लड़कियों का कहना है कि दारुल उलूम समय के साथ नहीं बदला है और मुसलमान समाज को पीछे ले जाना चाहता है.

पाकिस्तान की एक कंपनी ने हाल में देवबंद से ये भी पूछा था कि क्या कंपनी महिला रिसेप्शनिस्टों को मुलाजमत दे सकती है?

इस देवबंद का जवाब आया कि जब तक महिलाओं की सुरक्षा का पूरा इंतज़ाम न हो उन्हें रिसेप्शनिस्ट की हैसियत से तैनात नहीं करना चाहिए.

सुरक्षा का हवाला

इस खबर पर टिप्पणी करते हुए देवबंद के एक प्रवक्ता आदिल सिद्दीकी ने बीबीसी को बताया, "फ़तवे पर हम टिपण्णी नहीं कर सकते लेकिन ये सही है कि हमारा पक्ष ये है की महिलाओं को रिसेप्शनिस्ट का काम नहीं करना चाहिए".

आदिल सिद्दीकी के अनुसार महिला रिसेप्शनिस्टों को नौकरी न करने की सलाह देने के पीछे कारण ये है की उनकी सुरक्षा की जा सके.

उन्होने कहा, "रिसेप्शनिस्ट को हर तरह के मर्दों से मिलना पड़ता है. बातें करनी पड़ती हैं. इनमें अच्छे और बुरे मर्द भी होते हैं. उनकी हिफ़ाज़त के लिए सही ये होगा की वो रिसेप्शनिस्ट का काम ही न करें".

लेकिन जब उनका ध्यान उन मुसलमान देशों की तरफ दिलाया गया जहाँ रिसेप्शन पर महिलाएँ बैठती हैं तो उन्होंने कहा, "अगर किसी दफ्तर में महिला की सुरक्षा का पूरा इंतज़ाम है तो उस हाल में वो रिसेप्शन पर काम कर सकती हैं".

भारत में रिसेप्शन पर काम करने वाली मुसलमान रिसेप्शनिस्टों को सलाह देते हुए आदिल सिद्दीकी ने कहा कि अगर उन्हें मजबूरी के तहत काम करना पड़े तो वो खुशबू न लगाएं और श्रृंगार न करें.

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