माया और मुलायम ने राज्यसभा में भी बचाया

 शुक्रवार, 7 दिसंबर, 2012 को 15:41 IST तक के समाचार
सरकार

मत विभाजन में सरकार को 123 वोट मिले जबकि उसके खिलाफ 109 वोट थे.

देश में खुदरा व्यापार के क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी एफडीआई का रास्ता उस समय साफ हो गया जब विपक्षी पार्टियों का इसके खिलाफ प्रस्ताव राज्य सभा में भी गिर गया.

शुक्रवार को हुए मत विभाजन में सरकार के पक्ष में 123 वोट थे जबकि उसके खिलाफ 109 वोट रहे. यानी केवल 109 सदस्यों ने एफडीआई के खिलाफ विपक्ष के प्रस्ताव के हक में मतदान किया.

सरकार का काम आसान किया उसकी सहयोगी पार्टियों बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी ने हालांकि यह दोनों पार्टियां एफडीआई का विरोध करती आई हैं.

लोक सभा की तरह राज्य सभा में भी समाजवादी पार्टी ने वॉक आउट किया.

पहले ही तय

वैसे यह गुरुवार को ही लगभग तय हो गया था कि सरकार को इस मत विभाजन में कोई मुश्किल पेश नहीं आएगी.

सरकार को उस समय राहत मिली थी जब बसपा प्रमुख मायावती ने एफ़डीआई के मुद्दे पर बहस के दौरान कहा था कि वो सरकार के समर्थन में मतदान करेगी.

मायावती ने यह तर्क दिया था कि राज्य सरकारों के पास अधिकार है कि वे इसे लागू करें या ना करें.

इससे पहले बुधवार को लोक सभा में भी सरकार ने मतदान जीता था.

सुषमा स्वराज का प्रस्ताव

बीजेपी की सुषमा स्वराज ने मंगलवार को निचले सदन में प्रस्ताव पेश किया था कि सरकार को खुदरा व्यापार में एफ़डीआई को वापस ले लेना चाहिए.

इस पर मतदान में 218 सदस्यों ने प्रस्ताव का समर्थन किया मगर 253 सदस्यों ने सुषमा स्वराज के प्रस्ताव का विरोध किया.

उस समय भी सरकार की नैया पार उसकी सहयोगी पार्टियों यानी समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने ही की थी.

उन्होंने लोकसभा मतदान से पहले सदन से वॉकआउट कर दिया था.

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