मोदी के खिलाफ कांग्रेस का चाणक्य मैदान में

सोनिया के साथ अहमद पटेल
Image caption अहमद पटेल सोनिया गाँधी के काफ़ी नज़दीक़ी माने जाते हैं

गुजरात में लंबे समय से सत्ता से बाहर कांग्रेस इस बार भाजपा के इस सबसे मज़बूत किले को फतह करने के लिए जिस ढंग से लड़ रही है, उस ढंग से वो यहां कई सालों से नहीं लड़ी.

सामाजिक विज्ञान के विशेषज्ञ अच्युत याग्निक से लेकर राजनीति विज्ञान के धुरंधर घनश्याम शाह तक हर कोई मानता है की यह चुनाव पिछले चुनाव से अलग है.

पर कांग्रेस के नेता, विशेषज्ञों की बात पर नहीं जाते. उनके पास ऐसा मानने के पीछे एक खास कारण है. वो कारण है अहमद पटेल.

यह कहना है गुजरात कांग्रेस के बड़े पार्टी नेता का जो कि खुद भी चुनाव लड़ रहे हैं और पिछली कई बार से विधायक हैं.

परिवार के वफ़ादार रणनीतिकार

अहमद पटेल की हैसियत कांग्रेस पार्टी में सोनिया और राहुल गांधी के बाद सबसे ज़्यादा मानी जाती है. गुजरात के भरूच से सांसद रहे पटेल कई सालों से कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार हैं.

अहमद पटेल वो नेता हैं जिनका नाम गुजरात के बाहर आम लोगों की नज़र में आया साल 2008 में जब उन पर अमर सिंह के साथ कैश-फॉर-वोट घोटाले में आरोप लगे.

देश के एक प्रमुख अखबार के लिए कांग्रेस से जुड़ी ख़बरों पर नज़र रखे वाले एक वरिष्ठ पत्रकार अहमद पटेल की भूमिका की व्याख्या करते हुए कहते हैं, ''उन्हें अगर परेशान करना हो तो उनके बारे में बुरी खबर छोड़ दो, अच्छी खबरें लिख दो जो तस्वीर के साथ छप जाए. तीसरे दिन अहमद भाई का फ़ोन आ जाएगा.''

ऐसा नहीं है कि नरेन्द्र मोदी के साल 2002 या 2007 के चुनाव के दौरान अहमद पटेल के हाथों में गुजरात कांग्रेस की पूरी बागडोर ना रही हो, लेकिन तब कभी नरेन्द्र मोदी ने अहमद पटेल के नाम का ज़िक्र भी नहीं छेड़ा. वो केवल 'दिल्ली की सल्तनत' या 'मैडम सोनिया' के ऊपर ही हमले करते रहे.

इस चुनाव में भी अब तक नरेन्द्र मोदी ने केशुभाई पटेल या राज्य के किसी भी और नेता का नाम तक नहीं लिया. मगर अप्रत्याशित रूप से उन्होंने इस बार पटेल को 'अहमद मियां' कहकर सीधे हमला बोला.

शायद मोदी को भी अहमद पटेल की इस दफा चुनाव में ज्यादा सक्रियता का अंदाज हो गया था. खास बात यह कि आमतौर पर किसी भी बयानबाजी से परहेज करने वाले अहमद ने उस मोदी पर पलटवार किया जो कि इस तरह की राजनीति में धुरंधर हैं.

जब अहमद पटेल ने मोदी को 'गुजरात का सुल्तान' कहकर ताना मारा तो मोदी को कई सभाओं में उसका उत्तर देना पड़ा. वरना मोदी से अपने खिलाफ सार्वजनिक रूप से कोई कुछ कहला पाए, यह गौरव किसी भी वर्तमान कांग्रेस या विपक्षी नेता को कम से कम इन चुनावों में तो हासिल नहीं हुआ.

'भविष्य सुरक्षित करने की लड़ाई'

Image caption नरेंद्र मोदी ने अहमद पटेल को अहमद मियां कहकर संबोधित किया है.

गुजरात के एक दूसरे पूर्व प्रदेश अध्यक्ष का कहना है कि पटेल भी नरेन्द्र मोदी की तरह ही अपने भविष्य को सुरक्षित करने की लड़ाई लड़ रहे हैं.

पार्टी के भीतर दिग्विजय सिंह, गुलाम नबी आज़ाद और अंबिका सोनी जैसे अपने धुर-विरोधियों का मुंह बंद करने के लिए पटेल को साबित करना है कि वो अब भी ज़मीन की राजनीति कर सकते हैं.

अहमद पटेल साल 1977 से 1989 तक तीन बार भरूच से लोकसभा सांसद रह चुके हैं. लेकिन उसके बाद से वो लगातार चार बार से राज्यसभा सदस्य हैं.

पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष का कहना है, ''मोदी को हरवाने या राजनीतिक रूप से कमज़ोर कर देने के बाद इंदिरा, राजीव और सोनिया के बड़े ख़ास रहे पटेल की जगह राहुल की टीम में भी पक्की हो जाएगी. यही कारण है कि पटेल खुद घूम-घूमकर दक्षिण गुजरात में अकेले चुनावी सभाएं कर रहे हैं और खासी भीड़ भी खींच रहे हैं.''

पूरी बिसात खुद

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि चुनाव प्रचार में विज्ञापन अभियान और टिकट बांटने से लेकर एक-एक असंतुष्ट निर्दलीय प्रत्याशी को खुद फ़ोन करने तक अहमद पटेल ने अपना सब कुछ झोंक रखा है.

पटेल का असर समझाते हुए एक कांग्रेस नेता कहते हैं, ''इसके पहले चुनाव में मोदी ही एजेंडा सेट करते थे और हम उसका जबाव देते घूमते थे. इस बार मोदी हमारे नारे 'दिशा बदलो-दशा बदलो' के नारे पर हर सभा में बोलते घूम रहे हैं.''

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