गुजरात चुनाव और ब्रिटेन के गुजराती

इलिंग रोड
Image caption इलिंग रोड पर अधिकतर दुकानें भारतीय सामानों की हैं और अधिकतर के मालिक गुजराती हैं

लंदन के वेम्ब्ली इलाक़े की इलिंग रोड पर हर देसी चीज़ मिलती है. चूड़ी-साड़ी-लहँगा-चुन्नी से लेकर क्रैकजैक-पारले जी बिस्कुट, वाटिका-पैराशूट तेल आदि से लेकर प्रेस्टीज का प्रेशर कुकर तक मिलेगा. सब्ज़ियाँ-फल तो होते ही हैं, पंडित-ज्योतिषी भी मिल जाएँगे.

यहाँ अधिकतर दूकानें गुजराती प्रवासी भारतीयों की हैं, कोई किसी अफ़्रीकी देश से आकर बसा, तो कोई भारत से, मगर गुजरात की ख़बर सब रखते हैं.

वहाँ एक साड़ी की दुकान के मालिक कल्पेश मेहता कहते हैं, "मैं 1984 से यहाँ हूँ, हर साल भारत जाता हूँ, चुनाव में मैं चाहूँगा कि मोदी जीतें."

उन्हीं की दुकान में काम करनेवाली रोमल कहती हैं, "मैं टीवी और नेट पर न्यूज़ देखती-पढ़ती हूँ, मुझे चुनाव का पता है, मैं चाहती हूँ जो भी जीते, वो सबका भला करे."

ब्रिटेन में बसे 14-15 लाख भारतीयो में सबसे बड़ी आबादी गुजरात के लोगों की है, उनकी निश्चित संख्या की जानकारी नहीं है क्योंकि ब्रिटेन में जनगणना गुजराती-सिंधी-पंजाबी-तमिल के हिसाब से नहीं होती, मगर फिर भी जानकार विभिन्न स्रोतों के आधार पर अनुमान लगाते हैं कि ये संख्या आठ से दस लाख तक हो सकती है.

जु़ड़ाव

एनआरआई गुजरातियों का भारत के गुजरात से गहरा जुड़ाव होता है और ये केवल जज़्बाती जुड़ाव भर नहीं.

ब्रिटेन में गुजराती संस्थाओं के एक साझा मंच नेशनल कांग्रेस ऑफ़ गुजराती ऑर्गेनाइज़ेशन्स के अध्यक्ष शरदभाई पारीख बताते हैं, "गुजराती लोग अपने बच्चों को संस्कारों से जोड़े रखने के ख़याल से भारत में निवेश वगैरह कर उससे जुड़े रहना चाहते हैं और हमें बड़ा गर्व होता है जब वहाँ से हमको बुलाया जाता है, हम वहाँ निवेश करते भी हैं."

लंदन से गुजराती में छपनेवाले एक साप्ताहिक अख़बार गर्वी गुजरात के संपादक रमणीकलाल सोलंकी बताते हैं कि उन्होंने अपने ताज़ा अंक में गुजरात चुनाव में खड़े सभी उम्मीदवारों के नाम छापे हैं क्योंकि लोग जानना चाहते हैं कि उनके इलाक़े से कौन चुनाव लड़ रहा है.

वे कहते हैं,”पॉलिटिक्स में यहाँ के गुजराती लोगों का बहुत इन्ट्रेस्ट होता है क्योंकि वे जानते हैं कि वहाँ जो भी आएगा उसका असर वहाँ की नीति पर पड़ेगा, इससे बाहर के गुजराती तो प्रभावित हो ही सकते हैं, वहाँ रहनेवाले उनके रिश्तेदारों पर भी असर पड़ सकता है."

ब्रिटेन

वैसे ऐसा नहीं है कि ब्रिटेन के चुनाव पर नज़र केवल एनआरआई गुजरातियों की ही है, लंदन की ऐसेम्ब्ली में चुने गए पहले भारतीय नवीन शाह बताते हैं, गुजरात की तरक्की, ब्रिटेन तक पहुँचती है.

वो कहते हैं, "ब्रिटेन और भारत दोनों की अर्थव्यवस्था एक-दूसरे से जुड़ी है, और गुजरात के विकास से यहाँ के गुजरातियों का भी विकास होता है, और उससे ब्रिटेन को भी फ़ायदा होता है."

ग़ौरतलब है कि ब्रिटेन सरकार ने गुजरात दंगों के बाद, कोई 10 साल तक गुजरात से परहेज़ रखा, मगर दो महीने पहले भारत में ब्रिटेन के राजदूत ने नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात कर ब्रिटेन की ओर से उनकी ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाया था.

ऐसे में कहा जा सकता है कि अगले हफ़्ते गुजरात में नरेंद्र मोदी का सूरज चमकता रहता है या अस्त होता है, इसपर केवल गुजराती एनआरआई लोगों की ही नहीं, ब्रिटेन के आकाओं की भी निगाह लगी होगी.

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