यूपी: पदोन्नति में आरक्षण मुद्दे पर राजनीति 'तेज़'

उत्तप्रदेश
Image caption उत्तरप्रदेश में हड़ताली कर्मचारियों की सभा

उत्तर प्रदेश में गैर दलित वर्गों के लाखों के सरकारी कर्मचारी पदोन्नति में आरक्षण के लिए संविधान संशोधन विधेयक के विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं. इस विधेयक पर राज्य सभा में सोमवार को मतदान संभावित है.

हड़ताली कर्मचारियों के नेता शैलेन्द्र दुबे ने केंद्र में सत्तारुढ कांग्रेस पार्टी और मुख्य विपक्षी दल भाजपा को चुनौती दी है कि वे इस विषय पर लोकसभा को भंग कर नया जनादेश प्राप्त करें.

हड़ताल से सरकारी दफ्तरों का कामकाज प्रभावित हुआ है, लेकिन आवश्यक सेवाओं को हड़ताल से अलग रखने से आम जनजीवन पर ख़ास असर नही पड़ा है.

सत्तारुढ़ समाजवादी पार्टी संविधान संशोधन का विरोध कर रहे कर्मचारियों का परोक्ष रूप से साथ दे रही है, इसलिए अखिलेश सरकार का रवैया हड़ताली कर्मचारियों के प्रति नरम है.

धरना प्रदर्शन

हडताली कर्मचारियों ने सुबह से ही कई दफ्तरों में ताले लगाकर सभाएं और धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया. इसके बाद ये लोग जुलूस लेकर विधानसभा के सामने प्रदर्शन करने लगे.

कुछ कर्मचारियों ने रास्ते में विपक्षी भारतीय जनता पार्टी कार्यालय के झंडे भी फाड़ दिए.

हड़ताल का आह्वान करने वाली संस्था सर्वजन हिताय संरक्षण समिति के नेता शैलेन्द्र दुबे ने सभा को संबोधित करते हुए कहा, "संविधान संशोधन 17 साल पहले के पूर्ववर्ती प्रभाव से लागू किया जा रहा है और उससे जूनियर कर्मचारी अपने सीनियर के ऊपर हो जायेंगे इसलिए यह संविधान संशोधन स्वीकार्य नही है.''

शैलेंद्र दुबे ने ये भी कहा कि प्रस्तावित संविधान संशोधन सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को उलटने वाला है इसलिए यह ग़ैर-कानूनी है. उधर अनुसूचित जाति और जनजाति वर्गों के कर्मचारी संविधान संशोधन के पक्ष में हैं, इसलिए वे हड़ताल में शामिल नही हैं.

माना जाता है कि इस हड़ताल से अधिकांश राज्य-कर्मचारी समाजवादी और बहुजन समाजवादी पार्टी के खेमों में बंट गए हैं जिस कारण इससे कांग्रेस और भाजपा को राजनीतिक नुकसान हो सकता है.

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने ही अपने एक फैसले से उत्तर प्रदेश की सरकारी नौकरियों में दलित वर्ग के लिए पदोन्नति में आरक्षण और वरिष्ठता के नियम को ग़ैरकानूनी करार दिया था.

समाजवादी पार्टी की सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करके पांच साल से रुकी पदोन्नति की प्रक्रिया को पुनः शुरू कर दिया है, लेकिन दलित वर्ग के लोग सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को पलटने के लिए संविधान संशोधन की मांग कर रहें हैं.

अपील

इस समय उत्तर प्रदेश में पदोन्नति के एक लाख तीस हजार पद खाली हैं. मायावती सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी.

Image caption समाजवादी पार्टी परोक्ष रुप से हड़ताल का समर्थन कर रहा है

पिछले विधान सभा चुनाव में यह एक अहम मुद्दा था. समाजवादी पार्टी ने पदोन्नति में आरक्षण समाप्त करने का वादा किया था.

पदोन्नति में आरक्षण के बिल पर राज्य सभा में सोमवार को वोटिंग होनी है. इसके बाद लोकसभा में इस पर बहस होनी है.

राज्यसभा में समाजवादी सांसद नरेश अग्रवाल ने बीबीसी से एक ख़ास बातचीत इस बिल को पूरी तरह से असंवैधानिक बताया है. उनके मुताबिक जाति और वर्ग के आधार पर बंटवारा नहीं किया जा सकता.

उनके मुताबिक बिल पास होने पर 82 प्रतिशत आबादी पर अन्याय होगा.

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