कब रफ्तार पकड़ेगी घिसटती अर्थव्यवस्था?

  • 15 दिसंबर 2012
मनमोहन सिंह
Image caption प्रधानमंत्री ने कहा कि अर्थवस्था में तेजी और राजकीय घाटे को कम करने के लिए सरकार कटिबद्ध है

भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर जताई जा रही चिंताओं पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि सरकार देश की आर्थिक स्थिति में बदलाव लाने की हर संभव कोशिश करेगी.

शनिवार को प्रधानमंत्री उद्योगों के समूह फिक्की के 85वीं आम बैठक में बोल रहे थे.

मनमोहन सिंह ने कहा, “भारतीय अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन वर्ष 2008 में बहुत अच्छा था लेकिन वैश्विक आर्थिक प्रगति में गिरावट का असर हम पर पड़ा. भारत में अत्य़ाधिक निराशा का असर हमारी प्रगति पर पड़ा है.”

प्रधानमंत्री ने कहा कि अमरीका और चीन भी बुरे समय का सामना करना पड़ा है और अभी ये साफ नहीं है कि वैश्विक आर्थिक स्थिति कब सुधरेगी.

उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए कदम उठा रही है.

मनमोहन सिंह ने कहा, “सरकार अर्थव्यवस्था की रफ्तार बढ़ाने को कटिबद्ध है लेकिन बढ़ता राजस्व घाटा एक बड़ी चिंता है.”

पिछले वर्ष वार्षिक राजस्व घाटा बढ़कर 5.9 प्रतिशत हो गया था और प्रधानमंत्री ने कहा कि इसे बरकरार नहीं रखा जा सकता.

उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री के पास वार्षिक राजस्व घाटे को 5.3 तक नीचे लाने का खाका तैयार है.

'कम होगा राजकीय घाटा'

Image caption उद्यगोपति आरोप लगा रहे है कि सरकार हाथ पर हाथ धरकर बैठी है

राजकीय घाटे को कम करने के तरीके पर प्रधानमंत्री ने सभी वर्गों में सब्सिडी कम करने की बात कही. उन्होंने महंगाई दर को 5-6 प्रतिशत तक लाने का भरोसा दिलाया.

प्रधानमंत्री का ये बयान पी चिदंबरम के उस वक्तव्य के बाद आया है जिसमें वित्त मंत्री ने आने वाले दिनों में आर्थिक सुधार के लिए कड़े कदम उठाने की बात कही थी.

कुछ सालों तक नौ प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ने के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था में गिरावट दर्ज की गई है. वर्ष 2011-12 में ये आंकड़ा 6.5 प्रतिशत को छू गया और उसके और नीचे जाने की बात कही जा रही है.

लेकिन सरकार भरोसा दिला रही है कि वो आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए कदम उठाएगी.

गुरुवार को केंद्रीय कैबिनेट ने 1,000 करोड़ से ज्यादा के निवेशों को जल्दी हरी झंडी देने के मकसद से उन्हें प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन इन्वेंस्टमेंटे के अंतर्गत लाने की बात कही.

इसके अलावा कैबिनेट ने जमीन अधिग्रहण विधेयक के मसौदे और यूरिया निवेश नीति को भी हरी झंडी दे दी.

संबंधित समाचार