पदोन्नति में आरक्षण: सही या नहीं?

संसद
Image caption राज्य सभा में समाजवादी पार्टी के सदस्य नरेश अग्रवाल इस बिल के खिलाफ बोलने वालों में सब से आगे हैं.

पदोन्नति में आरक्षण के बिल पर राज्यसभा में वोटिंग सोमवार को होनी है. इसके बाद लोक सभा में इस पर बहस होगी.

आम राय यह है कि बिल दोनों सदनों में पारित हो जाएगा लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इसका विरोध नहीं हो रहा है.

राज्य सभा में समाजवादी पार्टी इसका कड़ा विरोध कर रही है जबकि संसद के बाहर समाज के कई वर्गों में इस पर चिंता जताई जा रही है.

उधर उत्तरप्रदेश में इसका विरोध करते हुए 18 लाख सरकारी कर्मचारी हड़ताल पर चले गए हैं.

राज्य सभा में समाजवादी पार्टी के सदस्य नरेश अग्रवाल इस बिल के खिलाफ बोलने वालों में सबसे आगे हैं.

उन्होंने बीबीसी से कहा, "देखिए यह बिल पूरी तरह से असंवैधानिक है. जाति और वर्ग के आधार पर बंटवारा नहीं किया जा सकता."

अन्याय?

आगे इस पर विस्तार से बोलते हुए वो कहते हैं कि अगर यह बिल पास हो गया तो 82 प्रतिशत आबादी के साथ अन्याय होगा.

उन्होंने कहा, "पदोन्नति में आरक्षण से एक दिन ऐसी स्थिति पैदा होगी कि प्रोमोशन के सभी पदों पर आरक्षित वर्गों के लोग ही आ जाएंगे. सिर्फ 18 फीसद लोगों के लिए 82 फीसद लोगों के साथ भेदभाव किया जाए, यह सही नहीं है."

अग्रवाल और उनकी समाजवादी पार्टी के अनुसार ऐसा होने से देश के युवा वर्ग में यह सोच पैदा हो जाएगी कि भारत में उनकी योग्यता के हिसाब से नौकरी और प्रोमोशन नहीं मिलेगा.

लेकिन पदोन्नति में आरक्षण के पक्ष में आवाजें लगाने वाले यह तर्क देते हैं कि सरकारी और निजी क्षेत्र में पदोन्नति बड़ी जातियों के लोगों को ही दी जाती है.

'दलितों को न्याय'

दलितों को न्याय दिलाने वाली एक राष्ट्रीय संस्था 'नैशनल दलित मूवमेंट फॉर जस्टिस' के महासचिव डॉक्टर सिरिवेला प्रसाद कहते हैं, ''दलितों के खिलाफ भेदभाव सरकारी महकमों में तो है ही, निजी कंपनियों और उद्योग में भी है. दलितों को प्रोमोशन से तो रोका जाता है ही, उनके लिए आरक्षण के समय भी बाधाएं पैदा की जाती हैं.''

उनका कहना है, "हमने इसको आजमाने के लिए दलितों के नाम से आम सीटों की नौकरियों के लिए अर्जी भेजीं और कुछ ऊंची जाति के लोगों के नाम से. दलितों की अर्ज़ी रद्द कर दी गई जबकि ऊंची जाति के लोगों को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया."

डॉक्टर प्रसाद कहते हैं कि पदोन्नति में आरक्षण से सभी वर्गों के लोगों को फलने-फूलने का मौक़ा मिलेगा.

वे कहते हैं, "यह तर्क देना कि इससे कार्यक्षमता घटेगी, सही नहीं होगा. इस बिल से सभी को बराबर के अवसर मिलेंगे जो हमारे संविधान का वादा है."

इस बिल को चार महीने पहले राज्य सभा में पेश किया गया था लेकिन इस पर बहस हाल में शुरू हुई.

समाजवादी पार्टी के अलावा सभी बड़ी पार्टियाँ इसके समर्थन में हैं और आशा यह है कि सोमवार के दिन इस पर मतदान होगा.

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