क्यों आकर्षित कर रहा है विदेशियों को बिहार?

 शनिवार, 22 दिसंबर, 2012 को 13:20 IST तक के समाचार
बोधगया

17वें करमापा उग्येन त्रिनले दोरजे नवंबर के महीने में बोधगया में थे

भारत के पर्यटन विभाग के ताज़ा आंकड़ों में एक आंकड़ा जितना दिलचस्प है उतना ही रहस्यपूर्ण भी. वो यह कि बिहार में विदेशियों की तेज़ी से बढ़ती दिलचस्पी. कुछ ऐसी ही दिलचस्पी झारखंड में भी नज़र आई है.

हैरानी की बात है कि जहां विदेशियों की बिहार में एक तरह से बाढ़ सी आ गई है, वहीं स्थानीय पर्यटकों की संख्या में कमी देखी जा रही है.

साल 2009 में बिहार में लगभग 4.23 लाख विदेशी पहुंचे थे जो साल 2010 में लगभग 6.36 लाख हो गए. यानी 50.3 प्रतिशत वृद्धि.

10 लाख के क़रीब

बीबीसी के ज़रिए हासिल किए गए पर्यटन विभाग के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार साल 2011 में यह आंकड़ा और तेज़ी से बढ़ते हुए दस लाख (9.72 लाख) से बस थोड़ा ही कम रहा. वृद्धि दर रहा लगभग 53 प्रतिशत.

प्रतिशत के मामले में बडे़ राज्यों में बिहार जितनी वृद्धि किसी राज्य की नहीं थी.

कुछ ऐसे राज्य हैं जिनका वृद्धि दर ऊंचा रहा है लेकिन उनके यहां आने वाले पर्यटकों की गिनती उस स्तर की नहीं है.

मिसाल के तौर पर झारखंड ने सबसे अधिक वृद्धि दर दर्ज किया यानी 361.72 फीसदी, जिससे वहां विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ कर 72 हज़ार पार कर गई.

इसके बाद नागालैंड का नंबर था जिसने 83.75 फ़ीसदी की बढ़ोत्तरी दर्ज करते हुए 2,000 से अधिक विदेशी पर्यटकों की मेहमान नवाज़ी की.

इसके बाद वृद्धि दर में भारत के सभी राज्यों में बिहार का ही नंबर था.

क्यों आ रहे हैं बिहार

बिहार के पर्यटन विभाग के संयुक्त सचिव देवेंद्र रजक का कहना है कि यहां लोग बोधगया, नालंदा, राजगीर और वैशाली जैसी जगहों पर ख़ूब घूमने आते हैं.

दस टॉप राज्य

1. महाराष्ट्र 48.15 लाख

2. तमिल नाडू 33.73 लाख

3. दिल्ली 21.59 लाख

4. उत्तर प्रदेश 18.87 लाख

5. राजस्थान 13.51 लाख

6. पश्चिम बंगाल 12.13 लाख

7. बिहार 9.72 लाख

8. केरल 7.32 लाख

9. कर्नाटक 5.74 लाख

10. हिमाचल प्रदेश 4.85 लाख

उन्होंने कहा, ''बिहार में बहुत सारे पर्यटक स्थल हैं जहां दिन भर घूमने में लग जाएगा. बोध गया में जांएगे तो आप सारे दिन में भी घूम नहीं पाएंगे. बौद्ध गया में साल भर विदेशी आते हैं.''

यह पूछने पर कि क्या किसी ख़ास देश के लोग यहां आ रहे हैं तो देवेंद्र रजक ने कहा, ''सभी देशों के लोग आ रहे हैं. बिहार बुद्ध की भी धरती है, जैन की भी है, रामायण की भी है. लोग गुरुद्वारा में भी आते हैं और फुलवारी में भी. हर सर्किट में हम लोग विकास का काम कर रहे हैं.''

उन्होंने कहा, ''लोगों में बिहार के बारे में जागरूकता बढ़ी है.''

देशवासियों की कम रुची

इन आंकड़ों में चौंकाने वाली बात यह है कि बिहार ने पिछले साल भारत आने वाले लगभग पांच प्रतिशत विदेशी पर्यटकों को आकर्षित किया हालांकि भारत के केवल 2.16 प्रतिशत पर्यटकों ने ही बिहार का रुख़ किया.

कुल मिलाकर बिहार विदेशों के पर्यटकों के मामले में सातवें नंबर पर रहा, वहीं देसी पर्यटकों के मामले में उसका 11वां स्थान रहा.

पर्यटन विभाग के संयुक्त सचिव देवेंद्र रजक कहते हैं, ''ऐसा नहीं है कि भारतीय यहां पर कम आते हैं. लेकिन भारतीय यहां दोबारा नहीं आते लेकिन विदेशी यहां बार बार आते हैं.''

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