दिल्ली बलात्कार का मुद्दा सोशल मीडिया पर भी

Image caption ट्विटर और सोशल मीडिया पर लोगों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है.

भारत की राजधानी दिल्ली में चलती बस में बलात्कार का मामला सोशल मीडिया पर भी छाया हुआ है.

जहां संसद से लेकर सड़कों तक लोग उतर आए हैं वहीं सोशल मीडिया में भी लोगों का गुस्सा चरम पर है.

चाहे बड़ी शख्सियत हों या आम लोग उन्होंने कड़े शब्दों में अपनी बात रखी है.

कबीर बेदी ट्विटर पर लिखती हैं, '' बलात्कार करोगे तो जेल में जाओगे ये भारत का नारा होना चाहिए.''

वाल स्ट्रीट जर्नल की रुपा सुब्रहमण्यम लिखती हैं कि जया बच्चन संसद में रो रही हैं लेकिन उनके जैसे सांसदों को सार्वजनिक परिवहन में सफर करना चाहिए तब उन्हें सच्चाई पता चलेगी.

आकांक्षा टांगरी लिखती हैं कि जया जी आपकी बहन हैं हम सब लेकिन मैं सुरक्षित महसूस नहीं करती दिल्ली में.

यही हाल फेसबुक पर भी लोगों का है. वो बेहद नाराज़ हैं.

मुंबई के संजय झा मस्तान लिखते हैं, '' मर्द पेशाब के रास्ते आखिर जाना कहां चाहता है.''

पेशे से पत्रकार पृथ्वी परिहार कविता की शक्ल में कहते हैं कि लड़की हो तो ज्यादा ध्यान रखो.

वो कहते हैं,''अगर आपके बेटी है तो सावधान रहें अगर आप किसी की बेटी हैं तो और भी सावधान रहें ये आपका गांव नहीं शहर दिल्‍ली है. यहां रोटी-बेटी के संबंध नहीं होते बोटी बोटी से मतलब है.

यह हमारी हड्डारोड़ी से गायब हुए गिद्धों का नया अड्डा है.''

बिहार के शेखर हर्षवर्धन लिखते हैं, ''भारत का फिर एक नया नाम ....पहले केला गणराज्य और अब राज्य सभा सदस्य संजय राउत जी ने कहा कि यही हाल रहा तो हिन्दुस्तान का नाम "रेपिस्तान" हो जायेगा''

बीबीसी के पन्ने पर प्रतिक्रिया बीबीसी के फेसबुक पन्ने पर भी लोगों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है.

अमित शर्मा पतंजलि लिखते हैं कि फांसी की सज़ा से बलात्कार नहीं रुकेगा. खुद को संभालना होगा. ग्रेतल शर्मा लिखते हैं, ''यदि उन सभी माननीयों को, जिनके खिलाफ बलात्कार के मामले लंबित हैं, आज ही सजा दे दी जाए या आज से ही प्रतिदिन मुक़दमे की कार्यवाही करके बहुत सख्त सजा दे दी जाए तो सभी बलात्कार की घटनाएं सदा के लिए रुक जाएँ.'' कुमार संदीप कहते हैं कि ये भले लोगों के चुप रहने का नतीज़ा है. वो लिखते हैं, ''इस रिपोर्ट को पढ़कर तो ऐसा लगता है जैसे ऐसी घटनाएं हर रोज होती होंगी और बाकी साधारण या अकेली महिलाओं की हालत कैसी होगी इसका भी अंदाजा लगाया जा सकता है........ पर प्रशासन मौन क्यों है या प्रशासन है ही नहीं......... कहीं हमारी भी तो गलती नहीं की कभी ऐसी घटनाओं का विरोध भी नहीं करते, किसी ने सही कहा था ये घटनाएं इसलिए नहीं होती कि बुरे लोग हिंसा करते हैं बल्कि इसलिए होती हैं कि भले लोग चुप रहते हैं.''

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