बलात्कार को लेकर कुछ नेताओं पर भी हैं कीचड़

भारत की संसद
Image caption एनईडब्लयू की रिपोर्ट के मुताबिक कई सांसद और विधायकों ने शपथपत्रों में दिए गए ब्यौरे के मुताबिक उन पर महिलाओं के खिलाफ़ अपराधों के मामले हैं.

भारत में चुनावों और उम्मीदवारों पर नज़र रखने वाली ग़ैर-सरकारी संस्था, नेशनल इलेक्शन वॉच, एनईडब्ल्यू, का कहना है कि कई सांसद और विधायकों के शपथ पत्रों में दिए गए ब्यौरे के मुताबिक उन पर महिलाओं के खिलाफ़ अपराधों के मामले हैं.

संस्था ने ये भी पाया कि पिछले पांच सालों में राजनीतिक दलों द्वारा इससे भी ज़्यादा संख्या में ऐसे लोगों को टिकट दिए गए.

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में रविवार को चलती बस में एक 23-वर्षीय युवती के साथ सामूहिक बलात्कार के मामले की पूरे देश और मीडिया के साथ ही संसद के भीतर सांसदों ने भी निंदा की और कड़े क़ानूनों की मांग की.

इस आक्रोश और विरोध की लहर की पृष्ठभूमि में नेशनल इलेक्शन वॉच ने सांसदों और विधायकों के चुनाव आयोग में दाखिल उनके पिछले शपथ पत्रों की पड़ताल की जिससे ये बातें सामने आईं.

रिपोर्ट की मुख्य बातें

एनईडब्ल्यू की रिपोर्ट के अनुसार छह विधायकों ने चुनाव के वक्त भारतीय चुनाव आयोग में दिए गए अपने शपथ पत्र में स्वीकार किया है कि उनके खिलाफ़ बलात्कार का आरोप है.

इन छह में से तीन विधायक -श्रीभगवान शर्मा, अनूप संदा और मनोज कुमार पारस- समाजवादी पार्टी (उत्तर प्रदेश) से हैं, एक-मोहम्मद अलीम ख़ान बहुजन समाज पार्टी (उत्तर प्रदेश) से हैं, एक-जेठाभाई जी अहीर (गुजरात) भारतीय जनता पार्टी विधायक हैं, और एक आंध्र प्रदेश से तेलुगू देसम विधायक कंडीकुंता वेंकटा प्रसाद हैं.

इसके अलावा 36 अन्य विधायकों के शपथ पत्रों के मुताबिक उन पर महिलाओं के खिलाफ़ अन्य अपराधों के आरोप हैं. इनमें से छह इंडियन नेशनल कांग्रेस, पांच बसपा और तीन सपा से हैं.

रिपोर्ट में ये भी सामने आया है कि इन 36 में से सबसे ज़्यादा आठ विधायक उत्तर प्रदेश से हैं. इसके बाद ओडिशा और पश्चिम बंगाल के सात-सात विधायक हैं.

तमिलनाडु में सालेम से सांसद अनाद्रमुक के सेम्मलाई एस और पश्चिम बंगाल में तामलुक से सांसद तृणमूल कांग्रेस के अधिकारी सुवेंदू ने स्वीकार किया है कि उन पर महिलाओं के खिलाफ़ अपराधों के आरोप हैं.

एनईडब्लयू की जांच में ये भी पाया गया कि पिछले पांच साल में राजनीतिक दलों ने विधानसभा चुनावों के लिए 27 ऐसे लोगों को टिकट दिया जिनके शपथ पत्रों के मुताबिक उनके खिलाफ़ बलात्कार के आरोप हैं.

वर्ष 2009 के लोकसभा चुनावों में राजनीतिक दलों ने छह ऐसे लोगों को अपना उम्मीदवार बनाया जिन पर बलात्कार का आरोप है. इन चुनावों के 34 अन्य उम्मीदवारों पर महिलाओं के खिलाफ़ अपराधों के मामले हैं.

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