देसी दिल में गूंजता विदेशी संगीत

 शुक्रवार, 21 दिसंबर, 2012 को 08:59 IST तक के समाचार
एआर रहमान और अल्तमश

इलाहाबाद के एक मध्यम-वर्गीय परिवार में पले-बढ़े अल्तमश अंसारी आजकल लंदन में हैं और अपना ख़ाली वक्त ओपेरा सुनने में बिताते हैं.

अल्तमश पियानो बजाते हैं यानी वो पियानिस्ट हैं और भारत से आए दस और छात्रों के साथ लंदन की मिडलसेक्स यूनिवर्सिटी में संगीत की पढ़ाई कर रहे हैं.

लंदन में रहने और पश्चिमी संगीत पढ़ने का ये मौका अल्तमश को मिला, उनके बचपन के हीरो और मश्हूर संगीतकार, ए आर रहमान की बदौलत.

दरअसल चेन्नई में ए आर रहमान की ‘केएम म्यूज़िक कनज़रवेट्री’ ने मिडलसेक्स यूनिवर्सिटी के साथ एक ऐसा कोर्स शुरू किया है जिसके पहले तीन साल की पढ़ाई चेन्नई में और आखिरी साल लंदन में होगी.

पापा का सपना

इस कोर्स के ज़रिए केएम म्यूज़िक कंज़र्वेट्री से मिडलसेक्स युनिवर्सिटी के 11 छात्रों का पहला बैच अब मिडिलसेक्स युनिवर्सिटी पहुंच चुका है और अल्तमश उसी का हिस्सा हैं.

"हमारी क्लास में किसी को फुल स्कॉलरशिप नहीं मिली और बिना मदद के मेरे लिए यहां आना बहुत मुश्किल था. पापा पूरी कोशिश में लगे थे कि कोई इंतज़ाम हो जाए, पर आखिर में सिर्फ मुझे फुल स्कॉलरशिप मिली और अब यहां हूं."

अल्तमश, लंदन की मिडलसेक्स युनिवर्सिटी में संगीत के छात्र

अल्तमश ने बीबीसी को बताया, “हमारी क्लास में किसी को फुल स्कॉलरशिप नहीं मिली और बिना मदद के मेरे लिए यहां आना बहुत मुश्किल था. पापा पूरी कोशिश में लगे थे कि कोई इंतज़ाम हो जाए, पर आखिर में सिर्फ मुझे फुल स्कॉलरशिप मिली और अब यहां हूं.”

11 लोगों के इस ग्रुप में आठ गायक हैं, दो कम्पोज़र और एक पियानिस्ट. लंदन में ये अलग-अलग देशों से आए छात्रों के साथ पढ़ाई कर रहे हैं.

चुनौतियां

अल्तमश कहते हैं कि ये बहुत चुनौतीपूर्ण है, “भारत में कोई पश्चिमी क्लासिकल संगीत को नहीं समझता. लेकिन यहां जो लोग हमारे साथ पढ़ रहे हैं उन्होंने पैदा होने के बाद से ये संगीत सुना और समझा है. तो हमें बहुत मेहनत करनी पड़ती है, नहीं तो हम पीछे रह जाएंगे.”

मिडिलसेक्स युनिवर्सिटी में भारत से आए एआर रहमान के संगीत स्कूल के कुल 11 छात्र संगीत की पढ़ाई कर रहे हैं.

मिडलसेक्स युनिवर्सिटी के प्रोफेसर फ्रांसुआ एवन्स ने ही ए आर रेहमान के साथ मिलकर इस कोर्स की शुरुआत की.

इस पहले बैच के बारे में वो कहते हैं, “ये बहुत अद्भुत है. संगीत की दो शैलियों की समझ रखने वाले छात्रों का मेलजोल देखते बनता है. भारतीय छात्र यहां आसानी से घुलमिल गए हैं, उन्हें परेशान करती है तो बस लंदन की ठंड.”

अल्तमश और उनके साथी पिछले दिनों में कई बार बीमार पड़े. अल्तमश कहते हैं कि ऐसे समय में घर की और मां की देखभाल की कमी बहुत खलती है.

लेकिन अल्तमश को एहसास है कि ऐसा मौका बार-बार नहीं मिलता.

वे बताते हैं, “पियानो सीखना तो पापा का सपना था. हम मुस्लिम परिवार से हैं जहां पहले मौसिकी को सही नहीं माना जाता था. लेकिन जब मेरा रुझान इस तरफ़ बढ़ा तो पापा ने पूरा साथ दिया और उन्ही की बदौलत में इतना आगे बढ़ पाया.”

फिलहाल पूरा ग्रुप तैयारी में है, लंदन की एक चर्च में क्रिसमस कैरल गाने के लिए, मानो संगीत के ज़रिए दोनों देशों की दूरी कम करने निकले हों.

(ये कहानी इस सप्ताह ग्लोबल इंडिया में देखी जा सकती है.)

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