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वतन की तलाश

पाकिस्तानी शहर कराची के रहने वाले मोहम्मद इदरीस 1999 में अपनी पत्नी और चार बच्चों को छोड़कर भारत में अपने बीमार पिता से मिलने कानपुर आए थे.

मोहम्मद इदरीस के कानपुर पहुंचने के कुछ ही दिनों बाद उनके पिता का देहांत हो गया था और उसी परेशानी के आलम में वो अपना वीज़ा ख़त्म होने के बाद तीन दिनों तक कानपुर में रह गए थे.

जब वो अपना वीज़ा बढ़ाने के लिए कानपुरमें अधिकारियों से मिले तो उन्हें पाकिस्तानी जासूस समझकर गिरफ़्तार कर लिया गया.

दस साल की लंबी लड़ाई के बाद भारतीय अदालत ने उन्हें बरी कर दिया और पांच सौ रूपए के जुर्माने के साथ पाकिस्तान भेजने का आदेश दिया. लेकिन उनकी मुसीबत यहीं ख़त्म नहीं हुई. क्या हुआ फिर, जानिए बीबीसी संवाददाता रूपा झा के साथ-