'रेप तो रेप है चाहे दिल्ली हो या कश्मीर'

Image caption अरुंधति राय अपने अलग तरह के विचारों के लिए जानी जाती हैं. (फाइल फोटो)

जानी मानी लेखिका और सामाजिक मुद्दों पर अपनी अलग राय रखने वाली अरुंधति राय ने बीबीसी स्टूडियो में बलात्कार के मुद्दे पर अपने विचार रखे. पढ़िए वो क्या कहती है.

मैं नहीं मानती कि दिल्ली रेप कैपिटल है. ये रेप तो वर्षों से चला आ रहा है. ये मानसिकता में समाया हुआ है. गुजरात में मुसलमानों के साथ हुआ, कश्मीर में सुरक्षा बल करते हैं बलात्कार, मणिपुर में भी ऐसा होता है लेकिन तब तो कोई आवाज़ नहीं उठाता है.

खैरलांजी में दलित महिला और उसकी बेटी का रेप कर के उन्हें जला दिया गया था. तब तो ऐसी आवाज़ नहीं उठी थी.

एक सामंती मानसिकता है लोगों की जो तभी आवाज़ उठाती है जब बड़ी जाति के, प्रभुत्व वाले लोगों के साथ दिल्ली में कुछ होता है.

आवाज़ उठनी चाहिए. जो हुआ है दिल्ली में उसके लिए हल्ला तो मचना चाहिए लेकिन ये हल्ला सिर्फ मिडिल क्लास लोगों को बचाने के लिए नहीं होना चाहिए.

छत्तीसगढ़ में आदिवासी महिला सोनी सोरी के साथ भी कुछ हुआ था आपको याद होगा तो. उनके जननांगो में पत्थर डाले गए थे.पुलिस ने ऐसा किया लेकिन तब तो किसी ने आवाज़ नहीं उठाई थी. उस पुलिस अधिकारी को तो साहस का अवार्ड मिला.

कश्मीर में जब सुरक्षा बल गरीब कश्मीरियों का रेप करते हैं तब सुरक्षा बलों के खिलाफ़ कोई फांसी की मांग नहीं करता.

जब कोई ऊंची जाति का आदमी दलित का रेप करता है तब तो कोई ऐसी मांग नहीं करता.

इस बार जब सौ सौ लोग इकट्ठा हुए थे दिल्ली में जब लड़की को नंगा फेका गया था बस से बाहर तो लोग खड़े थे. किसी ने अपना कपड़ा दिया उसको. सब लोग खड़े रहे.

दिल्ली में अमीर-गरीब के बीच भेद तो पहले भी था. अब भी है लेकिन अब वो भी निशाना बन रहे हैं. रेप मुद्दा नहीं है. जब देश का विभाजन हुआ था तब कितने रेप हुए थे अंदाज़ा भी नहीं लगा सकते हम.

एक सामंती मानसिकता है हम लोगों के अंदर.

बलात्कार एक भयंकर अपराध है लेकिन लोग क्या करते हैं. जिस लड़की का रेप होता है उसे कोई स्वीकार क्यों नहीं करता. कैसे समाज में रहते हैं हम. कई मामलों में जिसका बलात्कार होता है उसी को परिवार के लोग घर से निकाल देते हैं.

मेरे पास कोई जवाब नहीं है कि ये सब कैसे ठीक होगा लेकिन मानसिकता की एक बड़ी समस्या है. समाज में बहुत अधिक हिंसा है.

विरोध होना चाहिए लेकिन चुन चुन के विरोध नहीं होना चाहिए. हर औरत के रेप का विरोध होना चाहिए. ये दोहरी मानसिकता है कि आप दिल्ली के रेप के लिए आवाज़ उठाएंगे लेकिन मणिपुर की औरतों के लिए, कश्मीर की औरतों के लिए और खैरलांजी की दलितों के लिए आप आवाज़ क्यों नहीं उठाते हैं.

रेप का विरोध कीजिए इस आधार पर नहीं कि वो दिल्ली में हुआ है या मणिपुर में या किसी और जगह. मैं बस यही कह सकती हूं.

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