तस्करी और घुसपैठ रोकेगा मिर्ची बम

  • 23 दिसंबर 2012
Image caption मिर्ची बम में असम और नगालैंड में पैदा होने वाली बेहद तीखी मिर्च का इस्तेमाल किया जा रहा है

भारत-बांग्लादेश सीमा पर घुसपैठ और तस्करी रोकने के लिए सीमा सुरक्षा बल इन दिनों एक नए तरह के हथियार का परीक्षण कर रहा है जिसे मिर्ची बम या मिर्ची ग्रेनेड कहा जाता है.

सीमा सुरक्षा बल के अधिकारियों का कहना है कि भारत-बांग्लादेश सीमा पर इस हथियार का पहली बार इस्तेमाल किया जा रहा है जो कुछ हद तक आंसू गैस जैसा है.

इसे फॉयर करने से घुसपैठियों और तस्करों की आंखों में आंसू आएंगे और वे कुछ देर के लिए देख भी नहीं पाएंगे. ये वैसा ही होगा जैसे किसी में आंख में मिर्ची डालने से होता है.

इस स्थिति में सीमा सुरक्षा बल के जवान इन घुसपैठियों को आसानी से पकड़ सकेंगे. रक्षा अनुसंधान एवं विकास परिषद यानी डीआरडीओ ने कुछ साल पहले ऐसा ही मिर्ची बम बनाया था जिसे और बेहतर बनाया गया है.

ग्वालियर के नजदीक सीमा सुरक्षा बल के ठिकाने पर इस खास बम को फिलहाल प्रायोगिक आधार पर तैयार किया जा रहा है.

बीएसएफ का विरोध

बल के अधकारियों ने बताया कि इस बम में बाजार में मिलने वाली आम मिर्ची का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है. इसमें असम और नगालैंड के इलाकों में पैदा होने वाल बेहद तीखी मिर्च का इस्तेमाल किया जा रहा है.

भारत-बांग्लादेश सीमा पर सीमा सुरक्षा बल के जवानों के खिलाफ ये आरोप लगता रहा है कि वो गोली चलाने में परहेज नहीं करते. आरोप ये भी है कि इन गोलियों से बड़ी संख्या में आम लोग मारे जाते हैं.

दोनों ही देशों में इस प्रवृत्ति का विरोध होता रह है. ह्यूमन राइट्स वॉच जैसे संगठनों ने भी इसके खिलाफ आवाज़ उठाई है. इसके बाद बल और गृह मंत्रालय ने गोलियों का इस्तेमाल कम करने का फैसला किया है.

दूसरी तरफ भारत-बांग्लादेश सीमा पर घुसपैठ और तस्करी बंद नहीं हुई है. ऐसे में बल जानलेवा हथियारों की जगह मिर्ची बम जैसे कम घातक हथियारों का इस्तेमाल करने का फैसला किया है.

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