छावनी बनी दिल्ली, हर तरफ नाकाबंदी

 सोमवार, 24 दिसंबर, 2012 को 16:50 IST तक के समाचार
सामूहिक बलात्कार विरोधी प्रदर्शन

सामूहिक बलात्कार पर उठे जन सैलाब के चलते छावनी बनी मध्य दिल्ली की सड़कों पर कर्फ्यू सा माहौल है लेकिन जंतर मंतर पर मुठ्ठी भर बच्चे और बड़े अब भी नारे लगा रहे हैं.

दिल्ली में सुरक्षा कारणों से शहर के मध्य में मौजूद राजीव चौक, बारहखंबा रोड, मंडी हाउस, प्रगति मैदान, रेसकोर्स रोड, खान मार्केट और पटेल चौक जैसे मेट्रो के तमाम स्टेशन बंद कर दिए गए. यह वो जगहें हैं जहाँ से इंडिया गेट, राष्ट्रपति भवन या देश के प्रमुख नेताओं के घर आसानी से पहुंचा जा सकता है.

इंडिया गेट जहाँ शनिवार और रविवार को हिंसक प्रदर्शन हुए थे उसे छावनी में तब्दील कर दिया गया है. जिन जगहों पर प्रदर्शन की अनुमति हैं वहां भी पुलिस वालों की तादाद प्रदर्शनियों से कई गुना ज़्यादा है.

बच्चे भी पीछे नहीं

"लोग शनिवार और रविवार को इसलिए ज़्यादा थे क्योंकि छुट्टी थी. कल फिर ज़्यादा होंगे क्योंकि क्रिसमस की छुट्टी है"

श्रृवण, स्कूली छात्र

संसद से महज़ कुछ दूरी पर मौजूद प्रदर्शनकारी जिनमें अलग-अलग स्कूलों के किशोर छात्र-छात्राएं और कुछ कॉलेज जाने वाले और चंद आम लोग मौजूद थे सरकार के खिलाफ उसी शिद्दत से नारे लगा रहे थे.

यूं तो प्रदर्शनकारियों से ज़्यादा टीवी और अखबार कर्मी जंतर मंतर पर मौजूद थे लेकिन प्रदर्शनकारीयों का हौसला डिगता हुआ नहीं दिखा.

प्रदर्शनकारियों में दिल्ली के एक प्रतिष्ठित स्कूल की कुछ किशोर लडकियां जो स्कूल न जाकर प्रदर्शन में शामिल हुईं उन्होंने एक पोस्टर ले रखा था जिसमें “बलात्कारियों के जननांग पर तेज़ाब डालने” की मांग थी.

इन लड़कियों का कहना था कि प्रदर्शनकारियों की तादाद इसलिए कम है क्योंकि सरकार के बल प्रयोग के बाद "लोग अपने परिवार के सदस्यों की सुरक्षा के बारे में चिंतित हैं."

इन लड़कियों की मांग थी “बलात्कारियों को इतनी दर्दनाक सज़ा दी जाये कि कोई ऐसा करने का ख्याल भी ज़हन में ना लाए.” जब उनसे पूछा गया कि बलात्कार का यह अपनी किस्म का पहला मामला है तो उनका कहना था “उन्होंने इसके पहले भारत में कहीं भी इस तरह की घटना के बारे में नहीं सुना.”

‘केवल छुट्टी पर भी़ड़ क्यों’

उन्ही की तरह स्कूली कपड़े पहने प्रदर्शन करने वालों में श्रृवण भी शामिल थे जो की नवयुग स्कूल के छात्र हैं. श्रृवण का प्रदर्शनकारियों की बहुत ही कम संख्या के ऊपर कहना था “लोग शनिवार और रविवार को इसलिए ज़्यादा थे क्योंकि छुट्टी थी. कल फिर ज़्यादा होंगे क्योंकि क्रिसमस की छुट्टी है.”

श्रृवण को उन लोगों के प्रति नाराज़गी है जो अपने दफ्तरों और स्कूलों को वापस पहुँच गए और प्रदर्शन करने के लिए नहीं मौजूद हुए.

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