नए साल में बढ़ेंगे नौकरियों के मौके

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Image caption नौकरी का इंतजार कर रहे लोगों को नई उम्मीद

भारत में नौकरियों के अवसर से जुड़े एक सर्वे में कहा गया है नए साल में देश में रोज़गार के मौके बढ़ेंगे हालांकि वर्ष 2013 की पहली तिमाही में इसकी रफ्तार धीमी रहेगी.

टीमलीज़-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ जॉब ट्रेनिंग ने अपनी एम्पलॉयमेंट आउटलुक रिपोर्ट में यह बात कही है.

वर्ष 2013 के जनवरी-मार्च की तिमाही में कुल रोज़गार और व्यापार में कमी की बात कही गई है. रिपोर्ट में इसकी वजह धीमे घरेलू विकास और आर्थिक अनिश्चितता को बताया गया है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि अर्थव्यवस्था की यह सुस्ती पहली तिमाही तक ही रहेगी क्योंकि सितंबर के मध्य में खुदरा और बैंकिंग जैसे क्षेत्रों में सुधार के लिए हुई सरकारी कोशिशों से बाज़ार में ज़ोश भरने की संभावना है. इससे रोज़गार के अवसर बढ़ने के आसार हैं.

उम्मीद की किरण

क्षेत्रवार देखें तो रिपोर्ट में टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुएं, इंजीनियरिंग, रियल एस्टेट, विनिर्माण एवं खुदरा क्षेत्र में नौकरियों के अवसर में 20 से 25 फीसदी का इज़ाफ़ा होने की संभावना जताई गई है.

Image caption हर हाथ को काम मिलने से तस्वीर बदल सकती है

हालांकि वेतन के नजरिए से देखें तो रिपोर्ट में कहा गया है कि अपवाद स्वरूप बढ़िया प्रदर्शन करने वाले कर्मचारी दो अंकों में तनख्वाह बढ़ने की उम्मीद रख सकते हैं. पर ज़्यादातर उद्योग अपने कर्मचारियों को एकल अंक में ही यह वृद्धि देंगे.

विकास दर में होने वाली कमी का ख़ामियाज़ा आईटी और इंजीनियरिंग सेक्टर को उठाना पड़ सकता है. अगली तिमाही में शारीरिक श्रम करने वाले कर्मचारियों की माँग सर्वाधिक होगी.

बाज़ार पर असर

बंगलौर में अंतिम तिमाही का आंकड़ा 75 से घटकर मौजूदा तिमाही में 72 हो गया है. हालांकि विभिन्न क्षेत्रों में हाल ही में शुरू किए गये सुधारों की वज़ह से बाज़ार में उछाल आ सकता है और इससे भविष्य में नौकरियों के ज़्यादा अवसर हो सकते हैं.

रिपोर्ट में इस बात पर भरोसा जताया गया है कि अगली तिमाही का असर 2013-14 के पूरे वित्त वर्ष पर नहीं होगा.

अध्ययन में 640 कंपनियों को शामिल किया गया था. रिपोर्ट में रोज़गार के अवसरों में वृद्धि की संभावना और व्यापार के माहौल को केन्द्र में रखा गया है. कंपनी की प्रोफाइल और उनके काम की जगह के संदर्भ में भविष्य का पूर्वानुमान लगाया गया है.

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