जयललिता का प्रधानमंत्री की बैठक से वॉक आउट

जयललिता
Image caption सबको लग रहा था की कई मुख्यमंत्री सरकार विरोधी तेवर अपना सकते हैं लेकिन जिस तरह का हमला जयललिता ने बोला उस तरह के हमले की किसी को उम्मीद नहीं थी.

देश भर के मुख्यमंत्रियों और प्रधानमंत्री के सामने 'अपमानित किए जाने के विरोध में' तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता ने राष्ट्रीय विकास परिषद की बैठक से बहिष्कार कर दिया है.

गुस्से से भरी तमिलनाडु की मुख्यमंत्री ने बाहर निकलकर कहा, "जिस तरह से मेरे बोलने के लिए निर्धारित 10 मिनट की समय सीमा के बाद मेरे भाषण के बीच में ही घंटी बजा दी गई वो बेहद अपमानजनक है. मैंने कभी ऐसा होते नहीं देखा पिछली बैठकों में लोगों ने इससे कहीं ज़्यादा बोला है."

जयललिता ने आरोप लगाया, "भारत सरकार का योजना पत्र इतना बड़ा है कि उस पर केवल दस मिनट के अंदर बात ही नहीं की जा सकती.सरकार चुनी हुई राज्य सरकारों का अपमान कर रही है और उनकी बात ही नहीं सुनी जा रही . इसके विरोध में मैंने राष्ट्रीय विकास परिषद का बहिष्कार कर दिया है."

विरोध प्रदर्शन

जयललिता ने कहा "अगर मुख्यमंत्रियों को बुलाकर इस तरह से अपमानित करना था तो हमें बुलाना ही नहीं था. जिस तरह से विपक्ष शासित राज्यों की आवाज़ को दबाने का प्रयास किया जा रहा है मैं उसका सख्त विरोध करती हूँ."

वैसे बाद में केंद्रीय मंत्री राजीव शुक्ला ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि हर मुख्यमंत्री के लिए एक निर्धारित समय है और अगर सभी के लिए समय निर्धारित नहीं किया जाता तो तय समय में बैठक समाप्त नहीं हो सकती थी.

उनका कहना था कि हर प्रदेश के मुख्यमंत्री को समान समय दिया गया है.

इस बैठक में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जैसे नेताओं की मौजूदगी के कारण यह तो सबको लग रहा था कि कई मुख्यमंत्री सरकार विरोधी तेवर अपना सकते हैं लेकिन जिस तरह का हमला जयललिता ने बोला उस तरह के हमले की किसी को उम्मीद नहीं थी.

तमिलनाडु की मुख्यमंत्री का कहना है कि दिए गए समय में उनके भाषण का केवल एक हिस्सा ही समाप्त हुआ था इसलिए वो बचे हुए भाषण की लिखित प्रति सौंप कर बाहर निकल आई हैं.

तीखे तेवर

तमिलनाडु की मुख्यमंत्री का पूरा भाषण जो बाद में पत्रकारों को उपलब्ध कराया गया उससे साफ़ ज़ाहिर होता है की जयललिता को अगर बोलने भी दिया जाता तो वो केंद्र को छोड़ने के मूड में कतई नहीं थीं.

उनके भाषण में लिखा है, "पिछले साल इसी मंच पर भिन्न मुख्यमंत्रियों द्वारा दिए गए सुझावों का बिलकुल ध्यान नहीं रखा गया है और साफ़ है की केंद्र सरकार दादागिरी चला रही है और केंद्र में बैठे चंद लोग पूरे देश के ऊपर अपनी संदेहास्पद योजनाएं थोप रहे हैं."

जयललिता के बाद चौथी बार की जीत से लैस गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने केंद्र सरकार को "दिशाहीनता" और "विचारों की गरीबी" के लिए कोसा. जयललिता से अलग, मोदी ने दिए गए समय में ही अपना भाषण सीमित रखा लेकिन वह यह कहने से नहीं चूके कि "वो राज्यों को सुनना ही कहाँ चाहते हैं."

प्रधानमंत्री का भाषण

इसके पहले सुबह प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस बैठक का आरंभ करते हुए सरकारों से भिन्न आर्थिक और सामाजिक मुद्दों पर भिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों से सहयोग मांगा.

उन्होंने कहा कि " देश की 50 फ़ीसदी आबादी आज भी कृषि क्षेत्र से जुडी है और कृषि में ना केवल विकास की दर बढ़ाना है बल्कि ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को गैर कृषि क्षेत्र में रोज़गार भी दिलाना है ताकि कृषि के क्षेत्र में प्रतिव्यक्ति आय बढ़ सके."

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में " सब्सिडी के भार को कम करने ख़ास तौर पर ऊर्जा की कीमतों पर चरणबद्ध तरीके से कीमतों को बढ़ाने के लिए भी राज्यों का सहयोग ताकी निवेश को बढाया जा सके."

सिंह ने इस बात का खास तौर पर ज़िक्र किया कि किस तरह से साल 2004 के बाद देश में हर साल लगभग दो फ़ीसदी लोग गरीबी रेखा के ऊपर आ रहे हैं.

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