नरेंद्र मोदी दिल्ली पहुँचे

  • 27 दिसंबर 2012
नरेंद्र मोदी
Image caption मोदी के नेतृत्व में भाजपा को गुजरात में 182 में से 115 सीटें मिलीं

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को राजधानी दिल्ली में राष्ट्रीय विकास परिषद की बैठक में हिस्सा ले रहे हैं. गुजरात विधानसभा चुनाव में जीत का परचम लहराने के बाद यह उनका पहला दिल्ली दौरा है.

20 दिसम्बर को विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद ही नरेंद्र मोदी ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा था कि गुजरात के लोग इजाजत दें तो वे 27 दिसंबर को एक दिन के लिए दिल्ली जाना चाहते हैं.

तब मोदी ने ये भी कहा था कि गुजरात की सेवा के बहाने हम पूरे देश की सेवा कर सकेंगे.

राजनीति की गहरी समझ रखने वाले जानकार मानते हैं कि गुजरात में कामयाबी की 'हैट ट्रिक' लगाने के बाद नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय राजनीति की तरफ कदम बढ़ाना चाहते हैं.

फिर जाहिर हुई कड़वाहट

नरेंद्र मोदी ने 26 दिसम्बर को गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर चौथी बार शपथ ग्रहण की जिसमें भारतीय जनता पार्टी के बड़े नेताओं के साथ ही पार्टी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी मौजूद थे.

लेकिन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल जनता दल यूनाइटेड की ओर से इस आयोजन में कोई नेता मौजूद नहीं था. एनडीए में शामिल अन्य दलों के नेता जरूर पहुंचे थे.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच तल्खी भरे विवादों का लंबा सिलसिला रहा है.

नज़र प्रधानमंत्री की कुर्सी पर

नरेंद्र मोदी ने केंद्र की राजनीति में सीधे तौर पर कभी कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई, लेकिन गुजरात में चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री पद के लिए उनकी दावेदारी को पोस्टरों के जरिए आगे बढ़ाया गया.

मीडिया-प्रबंधन और चुनाव प्रचार से जुड़े छोटे-मोटे तमाम फैसले खुद लेने वाले मोदी की सहमति के बिना उन्हें पोस्टरों में प्रधानमंत्री पद की दावेदारी के लिए ताल ठोकते दिखाना संभव नहीं था.

इससे यही पता चलता है कि मोदी की नजर प्रधानमंत्री की कुर्सी पर है लेकिन वरिष्ठ आरएसएस विचारक एमजी वैद्य कह चुके हैं कि भाजपा में नरेंद्र मोदी समेत प्रधानमंत्री पद के कई बड़े उम्मीदवार हैं.

वहीं भाजपा नेता शेषाद्रि चारी ने सीधे-सीधे कह दिया था कि ये चुनाव प्रधानमंत्री को तय करने के लिए नहीं था.

जनता दल यूनाइटेड के सांसद अली अनवर ने गुजरात चुनाव के नतीजे आने के बाद कहा था, ''हमारा देश धर्मनिरपेक्ष है, एक नेता को अपनी धर्मनिरपेक्ष विश्वसनीयता दिखानी होगी.''

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