बलात्कार पीड़ित लड़की की हालत बेहद नाज़ुक

 गुरुवार, 27 दिसंबर, 2012 को 11:38 IST तक के समाचार
बलात्कार पीड़ित के लिए न्याय की मांग

बलात्कार पीड़ित के लिए न्याय की मांग

सिंगापुर के माउंट एलिज़ाबेथ अस्पताल के प्रवक्ता का कहना है कि दिल्ली में सामूहिक बलात्कार की शिकार हुई लड़की को गुरुवार सुबह बेहद नाज़ुक हालत में गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में भर्ती कराया गया है.

समाचार एजेंसियों के मुताबिक, हॉस्पिटल के प्रवक्ता का कहना है, ''लड़की जांच की जा रही है, हॉस्पिटल भारतीय उच्चायोग के साथ सम्पर्क में है. हम लड़की और उसके परिवार वालों की निजता का सम्मान करने का आग्रह करते हैं.''

वहीं भारत के स्वास्थ्य मंत्री का कहना है कि पीड़ित लड़की की हालत स्थिर बनी हुई है.

इधर भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन ने ट्विटर के जरिए सूचित किया है कि सिंगापुर स्थित भारतीय उच्चायोग ने पीड़ित लड़की और उसके परिवार की हर संभव मदद का आश्वासन दिया है.

प्रधानमंत्री का बयान

वहीं दिल्ली में राष्ट्रीय विकास परिषद की बैठक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि महिलाओं की सुरक्षा का मसला बेहद अहम है और इसके लिए एक आयोग का गठन किया गया है.

"जब तक महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती तब तक समाज में महिलाओं की सार्थक भागीदारी नहीं हो सकती है"

डॉक्टर मनमोहन सिंह, प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री ने कहा, ''जब तक महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती तब तक समाज में महिलाओं की सार्थक भागीदारी नहीं हो सकती है.'' उन्होंने राज्य के सभी मुख्यमंत्रियों को अपने राज्यों में इस पहलू पर विशेष तौर पर ध्यान देने के लिए भी कहा है.

इससे पहले, सिंगापुर में भारतीय उच्चायोग ने बताया था कि पीड़ित लड़की के साथ विमान सुबह 7.30 बजे चांगी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरा था.

दिल्ली में 16 दिसंबर को चलती बस में बलात्कार के बाद से पीड़ित लड़की सफदरजंग अस्पताल में भर्ती थी. उसे बुधवार रात को मेदांता मेडिसिटी अस्पताल की एंबुलेंस से सफरदरजंग अस्पताल से ले जाया गया.

सफदरजंग अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक बीडी अथानी ने बताया है कि लड़की को बेहतर इलाज के लिए सिंगापुर भेजा गया है. डॉक्टरों के मुताबिक अब पीड़ित का माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में इलाज होगा.

गौरतलब है कि तमिल सुपर स्टार रजनीकांत और समाजवादी पार्टी के पूर्व नेता अमर सिंह का इलाज भी इस अस्पताल में हुआ था.

पिछले दस दिनों से जिंदगी और मौत के बीच झूल रही लड़की को एक विशेष विमान से सिंगापुर भेजा गया जिसमें आईसीयू की सुविधा भी उपलब्ध थी.

हालत गंभीर

डॉक्टर अथानी ने बताया कि लड़की का तीन बार ऑपरेशन किया गया लेकिन अब भी उसकी हालत गंभीर बनी हुई है. हालांकि उन्होंने फिर कहा कि पीड़ित हिम्मत के साथ हालात का सामना कर रही है लेकिन उसे बेहतर इलाज की जरूरत है.

डॉक्टर अथानी ने कहा, “डॉक्टरों की टीम की सलाह पर भारत सरकार ने पीड़ित लड़की को एक विशेष विमान एंबुलेंस से डॉक्टरों द्वारा निर्धारित किए गए अस्पताल भेजा है. अस्पताल का चुनाव करते वक्त इस बात का ध्यान रखा गया है कि मरीज़ को कम से कम यात्रा करनी पड़े.”

"डॉक्टरों की टीम की सलाह पर भारत सरकार ने पीड़ित लड़की को एक विशेष विमान एंबुलेंस से डॉक्टरों द्वारा निर्धारित किए गए अस्पताल भेजा है."

बीडी अथानी, चिकित्सा अधीक्षक

डॉक्टर अथानी ने कहा कि पीड़ित का इलाज कई हफ्ते तक चलता है, “मरीज़ को विदेश इसलिए भेजा गया है ताकि उन्हें बेहतरीन इलाज मिल सके जो कि कई हफ्तों तक चल सकता है. इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए मरीज़ को माउंट एलिज़ाबेथ अस्पताल सिंगापुर भेजने का फैसला किया है.”

सफदरजंग अस्पताल की क्रिटिकल केयर यूनिट (सीसीयू) के प्रमुख डॉक्टर यतीन गुप्ता और चार अन्य डॉक्टरों की एक टीम और पीड़ित के माता-पिता भी उसके साथ सिंगापुर गए हैं.

अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद से लड़की की हालत गंभीर बनी हुई थी. सफदरजंग अस्पताल में लड़की को लगभग पूरे समय वेंटिलेटर पर रखा गया था.

डॉक्टर उसकी आंतों को पहले ही निकाल चुके हैं. लेकिन उसमें संक्रमण का खतरा बराबर बना हुआ है.

दिल्ली समेत देश भर में इस लड़की को न्याय दिलाने की मांग के साथ व्यापक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.

'पता नहीं कहां जा रहे हैं'

बलात्कार पर विरोध

इस मुद्दे पर पूरे देश में उबाल है

इस बीच मीडिया रिपोर्ट में लड़की के पिता के हवाले से कहा गया है उन्हें नहीं बताया गया था कि लड़की को कहां ले जाया जा रहा है.

उन्होंने कहा, “हम कुछ नहीं जानते हैं. हमें नहीं पता कि हम कहां जा रहे हैं. हमें बस ये बताया गया है कि हम विदेश जा रहे हैं. मैं, मेरी पत्नी और पूरा परिवार उसके साथ विदेश जा रहे हैं.”

उससे पहले जीने की इच्छा और बलात्कारियों के लिए सज़ा चाहने वाली इस लड़की को दोबारा अपना बयान रिकॉर्ड कराना पड़ा था.

पहली बार 21 दिसंबर को एसडीएम के सामने उसका बयान रिकॉर्ड किया गया था. लेकिन मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के सामने 24 दिसंबर को दोबारा उसका बयान रिकॉर्ड कराया गया.

दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के इस आरोप के बाद दोबारा बयान रिकॉर्ड कराया गया कि पुलिस ने पीड़ित का बयान रिकॉर्ड होने की प्रक्रिया में बाधा पहुंचाई थी.

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