ट्रेन ने कुचला छह हाथियों को, नियमों पर उठे सवाल

 रविवार, 30 दिसंबर, 2012 को 23:00 IST तक के समाचार

मनुष्यों के तौर तरीकों की वजह से जानवरों के मारे जाने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. ऐसा ही एक मामला उड़ीसा में सामने आया है.

हाथियों का एक झुंड रेलवे लाइन से गुज़र रहा था जब एक यात्री ट्रेन उनसे जा टकराई जिसमें छह हाथियों की मौत हो गई. अधिकारियों का कहना है कि ट्रेन को भी नुकसान पहुँचा है और रेलवे लाइन को चालू करने में कई घंटों का वक़्त लगा. बताया जा रहा है कि एक सुरक्षागार्ड की भी मौत हुई है.

रेल दुर्घटनाओं में हाथियों के मारे जाने की कई घटनाएँ पहले भी हो चुकी हैं .ट्रेनों की रफ़्तार को लेकर कड़े नियम हैं.

वन्य जीव विशेषज्ञों का कहना है कि हाथियों में ये समझबूझ होती है कि उन्हें ट्रेनों के टाइमटेबल याद रहते हैं और वे ऐसे समय में रेल लाइन से गुज़रने से बचते हैं.

लेकिन कई मालभाडे वाली ट्रेनों के आने जाने का समय तय नहीं होता और ऐसे में हाथी, खासकर शिशु हाथी हादसों का शिकार हो जाते हैं.

कभी कभी उनके पैर स्लीपरों के बीच फँस जाते हैं और उन्हें छुड़ाने में लंबा समय लग जाता है.

2010 में पश्चिम बंगाल में हुई दर्घटना में सात हाथी मारे गए थे. तत्कालीन पर्यावरण मंत्री ने सुरक्षित रेल क्रॉसिंग बनाने के लिए 15 लाख डॉलर की राशी आवंटित की थी.

इसके अलावा वन्य इलाकों से निकलने वाले इलाकों में रेलगाड़ियों की रफ़्तार पर भी बंदिश लगाई थी लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इन नियमों का पालन नहीं होता.

भारत में वैसे भी हाथियों की संख्या घट रही है और सरकार इस पर चिंता भी जता चुकी है.

पश्चिम बंगाल के वन मंत्री हितेन बर्मन के मुताबिक राज्य में पिछले दो वर्षों के भीतर 63 हाथियों की मौत हुई है जबकि 139 व्यक्ति हाथियों के हमलों का शिकार हुए हैं.

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