खेत में हमले के बाद हुआ बलात्कार: पीड़िता की दास्तान

 बुधवार, 23 जनवरी, 2013 को 14:08 IST तक के समाचार

बलात्कार की ङटना के बाद भंवरी को ही नहीं उसके परिवार को भी ताने सहने पड़े

राजस्थान में बलात्कार का शिकार हुई भंवरी सितम के विरुद्ध संघर्ष की प्रतीक बनी हुई है. घटना बीस साल पुरानी है. जयपुर ज़िले के भटेरी गांव में भंवरी के साथ कथित रूप से तब सामूहिक बलात्कार किया गया जब उसने गांव में एक बाल विवाह का विरोध किया.

भंवरी महिला विकास कार्यकम में साथिन के रूप में काम करती हैं. वो तब से कभी समाज की पंचायत में तो कभी कचहरी की चौखट पर इंसाफ के लिए आवाज उठाती रही हैं.

बलात्कार के मुकदमे में फैसला आया तो सभी आरोप बरी हो गए लेकिन इस फैसले के खिलाफ भंवरी की अपील 16 साल से विचारित है.

बलात्कार की घटना के बाद एक औरत के लिए समाज में रहना करना बहुत मुश्किल हो जाता है लेकिन भंवरी एक योद्धा की तरह लड़ी.

घटना के दिन भंवरी अपने गांव में पति के साथ खेत पर थी. अचानक पांच लोगो ने उनके पति पर हमला किया और भंवरी के साथ बलात्कार किया. घटना के बाद उसने इंसाफ के लिए गुहार लगाई.पर दूसरे क्या अपने ही पराए हो गए.

लेकिन भंवरी कहती है उसके अंतर्मन ने जुल्म के खिलाफ खड़े होने की सीख दी. उसे लगा ऐसे मामले में औरत का क्या कसूर है.

साहस

भंवरी बताती है कैसे उसने प्रवाह के विरुद्ध खड़े होने का साहस जुटाया.

वो बताती है, '' उस समय वो महिला विकास कार्यकम में साथिन थी. घटना के कुछ दिन पहले ही हमें सामाजिक बुराइयों के काम करने का पाठ पढ़ाया गया था. इसमें बाल विवाह की रोकथाम भी शामिल थी. हमने ये ही किया. गांव में एक दूध मुंही बच्ची का बाल विवाह रोकने के प्रयास किया तो मुझे इस तरह दण्डित किया गया. पर क्या ऐसे हादसे पर अपनी जिन्दगी खत्म करले? ये तो ठीक नहीं होगा .सो मुझे लगा इस घटना पर चुप नहीं बैठना चाहिए. मैं खड़ी हो गई और लड़ी.''

वो ज्यादा मुशिकल दौर था. जात बिरादरी में बंटे समाज में भंवरी को कौन समर्थन देता क्योंकि उसकी अपनी बिरादरी संख्या बल में छोटी थी.

"गांव में एक दूध मुंही बच्ची का बाल विवाह रोकने के प्रयास किया तो मुझे इस तरह दण्डित किया गया. पर क्या ऐसे हादसे पर अपनी जिन्दगी खत्म करले? ये तो ठीक नहीं होगा मैं खड़ी हो गई और लड़ी."

भंवरी

अपनी बिरादरी में भी वो अलग थलग पड़ गई.

वो बताती है, '' मर्द औरत सब फबतिया कसते थे. कहते थे क्यों आवाज उठा रही हो. तुम्हे खामोश रहना चाहिए, पर मैं बार बार सोचती कि इसमें औरत की क्या गलती है. ये ही बात मुझे ताकत देती थी, फिर किसी औरत की गलती है तो भी उससे बात करे, ताने क्यों कसे जाए. फिर मैं मजबूती से खड़ी हो गई. मुझे लगा कुछ भी अंजाम हो ,मैं पीछे नहीं हटूंगी.''

भंवरी ही नहीं, उसके बच्चो को भी ताने सुनने पड़ी.

फब्तियां

भंवरी का कहना था, ''जब घर से बाहर निकलो लोग इशारा करते थे, देखो भंवरी जा रही है. दुनिया ने बहुत ताने कसे. मेरी क्या गलती थी. मैं बाल विवाह रोकने का काम कर रही थी और मुझे दो सौ रूपए महीना मिलता था. इस छोटी राशि के बदले मुझे बहुत कीमत चुकानी पड़ी. कई बार हताशा भी हुई. मगर महिला संगठनो ने मेरा साथ दिया. मुझे हौसला मिला.''

बलात्कार की घटना के बाद औरत के साथ समाज और व्यवस्था कैसे पेश आती है इस पर भंवरी कहती है,'' पुलिस, कोर्ट कचहरी, समाज सब जगह उसे मुश्किलें आती है.जाँच एजंसियों का रवैया भी खराब होता है. कब तक जुल्म सहते रहे. एक तो लड़की के साथ बुरा हो गया, फिर दूसरा जुल्म तब होता है जब उसे ही कसूरवार ठहराया जाता है. देख कर कहते है वो देखो वो जा रही है. मुझे कई बार लगता कि पलट कर कहूँ कि क्या आपके बहिन बेटी नहीं है जो ऐसे देख रहे हो.''

ऐसे बहुत से लोग थे जिन्होंने हौसला दिया,लेकिन जब भी वो गांव शहरों के गली चौराहो से गुजरी, किसी ने उसे हिकारत से देखा, किसी के शब्दों में औरत के लिए अपमान का भाव था.

मगर भंवरी है जो अब भी इंसाफ के लिए अपनी आवाज बुलंद कर रही है.''

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