ओवैसी न्यायिक हिरासत में, हैदराबाद में तनाव

 बुधवार, 9 जनवरी, 2013 को 12:49 IST तक के समाचार
 मजलिस के विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी

अकबरुद्दीन ओवैसी के भाषण ने आंध्र प्रदेश में एक बवाल खड़ा कर दिया है

भड़काऊ भाषण के आरोप में गिरफ्तार मजलिस-ए-मुसलमीन के विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी को आदिलाबाद की अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है.

42 वर्षीय ओवैसी को मंगलवार शाम हैदराबाद में गिरफ्तार किया गया. वहां से उन्हें आदिलाबाद जिले के निर्मल टाउन ले जाया गया और रात भर पूछताछ के बाद बुधवार सुबह साढ़े तीन बजे मजिस्ट्रेट के सामने पेश हुए.

बाद में उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच आदिलाबाद की जिला जेल भेज दिया गया. ओवैसी के वकील ने अदालत से अनुरोध किया है की उनकी ख़राब सेहत के मद्देनज़र उन्हें हैदराबाद की चंचलगुडा जेल भिजवा दिया जाए.

ओवैसी के वकील शफ़ीउद्दीन ने आरोप लगाया है की उनके मुवक्किल की जान खतरे में है क्योंकि उनका स्वास्थ्य अच्छा नहीं है लेकिन पुलिस उन्हें ज़रूरी दवाएं और खाना देने में लापरवाही बरत रही है.

कई मामले दर्ज

आदिलाबाद जिला पुलिस अधीक्षक सर्वश्रेष्ट त्रिपाठी ने कहा कि पुलिस ने अकबरुद्दीन के विरुद्ध कुछ और मामले भी दर्ज किए हैं.

उनके खिलाफ दो संप्रदायों के बीच नफरत को बढ़ावा देने और देश के खिलाफ युद्ध जैसे गंभीर आरोपों में मामले दर्ज हो चुके हैं.

ऐसे ही कुछ और केस निज़ामाबाद और हैदराबाद की पुलिस भी दर्ज कर रही है.

इस बीच बुधवार को आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट में अकबरुद्दीन की उस याचिका की सुनवाई होगी जिसमें उन्होंने कहा था की वो एक विधायक हैं और किसी भी समय पूछताछ के लिए पुलिस के लिए उपलब्ध हैं.

तनाव बढ़ा

अकबरुद्दीन ओवैसी की गिरफ्तारी के बाद मंगलवार शाम से हैदराबाद और खासकर पुराने हैदराबाद में काफी तनाव बढ़ गया है और सुरक्षा प्रबंध कड़े कर दिए गए हैं.

आदिलाबाद जिले में भी मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन ने बुधवार को बंद का आह्वान किया है जबकि निर्मल टाउन में अकबरुद्दीन के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले भाजपा नेताओं की गिरफ्तारी पर भी हिन्दू वाहिनी और कुछ दूसरे हिन्दू संगठनों ने बंद का आह्वान किया है.

पुलिस ने एहतियाती कदम के तौर पर निर्मल टाउन में निषेध आज्ञा लागू कर दी है.

अकबरुद्दीन ने 12 दिसंबर को निर्मल टाउन ही में एक जनसभा में वो विवादस्पद भाषण दिया था जिस पर हिन्दू समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप लगे हैं.

यह जनसभा राज्य सरकार और कांग्रेस पार्टी के खिलाफ मुहिम का हिस्सा है जो मजलिस ने कांग्रेस से दोस्ती तोड़ने के बाद शुरू की है.

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