बिहार पर शीत लहर का क़हर

  • 11 जनवरी 2013
ठंड
फसलों और मवेशियों पर भी ठंड का बुरा असर पड़ा है

बिहार में एक हफ़्ते से ऐसा लग रहा है, जैसे पूरा राज्य 'शीत गृह' यानी कोल्ड स्टोरज बन गया है. हाड़ कंपाने वाली ठण्ड ने यहाँ इस दौरान लगभग 150 लोगों की जान ले ली है.

राज्य में कई जगहों पर न्यूनतम (रात का) तापमान एक डिग्री सेल्सियस से भी नींचे उतर आया है. वहीं दिन का अधिकतम तापमान कहीं-कहीं नौ और 10 डिग्री तक आ गया है.

मौसम विभाग के अनुसार पिछले 146 वर्षों में पहली बार बिहार में पारा इतना नींचे गिरा है. वर्ष 1984 में 21 जनवरी को पटना का न्यूनतम तापमान 1.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ था.

यह रिकॉर्ड पटना में बुधवार को तब टूट गया जब पारा यहाँ और नींचे यानी 1.1 डिग्री पर आ गया. गोपालगंज में तो बुधवार रात का तापमान शून्य डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया.

स्थानीय मौसम कार्यालय के निदेशक आशीष सेन ने बीबीसी को बताया कि धूप नहीं निकलने और नमी बहुत बढ़ जाने के कारण राज्य में शीत लहर का प्रकोप इतना भीषण हो गया है.

उनके अनुसार डेढ़ से दो किलोमीटर की ऊंचाई में ज़्यादा नमी और धुंध की वजह से सूरज की गर्मी दिन में नहीं मिलती, इसलिए ठण्ड और बढ़ गई है.

अस्पतालों में भीड़

शीत लहर की लपेट में आकर बीमार होने वालों और मरने वालों में सबसे अधिक तादाद ग़रीबों और बूढ़े लोगों की है. इसके कारण रोगों से ग्रस्त मरीज़ों की संख्या अस्पतालों में बढ़ गई है.

फ़सलों और मवेशियों पर भी इसका बुरा असर पड़ा है. ख़ासकर पाला मार देने की वजह से आलू की फ़सल बर्बाद होने का ख़तरा सबसे ज़्यादा है.

ग्यारह जनवरी तक के लिए सूबे के सभी स्कूल बंद कर दिए गए हैं. दफ्तरों में उपस्थिति कम हो गई है और लोग सड़कों पर निकलने के बजाय घरों में दुबके रहकर ठण्ड से बचना चाह रह रहे हैं.

बाज़ार में हीटर, ब्लोअर, गीज़र और गरम कपड़ों की ख़रीद-बिक्री सबसे ज़्यादा हो रही है. जगह-जगह झोपड़पट्टियों, नुक्कडों और सार्वजनिक स्थानों पर अलाव जलाकर ठण्ड से बचने की कोशिश हो रही है.

विपक्षी दलों का आरोप हैं कि राज्य सरकार की तरफ़ से जगह-जगह अलाव जलाने और ग़रीबों के बीच कम्बल बांटने में घोर कोताही और गड़बड़ी की जा रही है.

विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता अब्दुल बारी सिद्दीक़ी ने कहा है कि आपदा प्रबंधन विभाग की ऐसी उदासीनता निंदनीय है. उन्होंने राज्य में बड़े पैमाने पर अलाव की व्यवस्था करवाने का आग्रह किया.

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