दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट
Image caption राजधानी दिल्ली में बीते साल दिसम्बर में चलती बस में एक लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने राजधानी दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कड़ी टिप्पणी करते हुए मौजूदा हालात पर चिंता जताई है.

शुक्रवार को एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान अदालत ने राजधानी में बेहतर कानून व्यवस्था प्रदान किए जाने पर जोर दिया है.

सुप्रीम कोर्ट की ये टिप्पणी एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान आई. इसके तहत एक वकील ने उन वाहनों के लाइसेंस रद्द किए जाने की मांग की है जो मोटर वाहन अधिनियम का उल्लंघन करते पाए जाते हैं.

अदालत का ये तल्ख़ बयान एक ऐसे समय में आया है जब दिल्ली समेत पूरे भारत में दिसंबर महीने में हुई सामूहिक बलात्कार की घटना की निंदा हो रही है.

23 वर्षीय महिला के साथ एक चलती बस में हुए बलात्कार की घटना के बाद से सरकार पर बलात्कार संबंधी कानून को सख्त करने का भी दबाव है. घटना के 12 दिन बाद इस युवती ने सिंगापुर के एक निजी अस्पताल में दम तोड़ दिया था.

शुक्रवार को जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की कानून व्यवस्था पर भी सवाल उठाए.

अदालत ने पूछा, "दिल्ली में क़ानून व्यवस्था के नाम पर क्या चीज़ें हैं जिससे आम लोगों की सुरक्षा की जा सके ?"

गौरतलब है की बुधवार को दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को आड़े हाथों लिया था और इस बात पर सवाल उठाया था कि दिसंबर में हुए बलात्कार मामले में बड़े अफसरों का निलंबन क्यों नहीं हुआ.

इसके बाद दिल्ली पुलिस ने अदालत से माफ़ी भी मांगी थी और उन सभी अफसरों के नाम की सूची भी अदालत को सौंपी है.

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