कुंभ की डुबकी क्या पाप धोएगी?

 शनिवार, 12 जनवरी, 2013 को 11:17 IST तक के समाचार

संगम के करीब रहना सम्मान जैसा

  • कुंभ

    सीता गिरी मूल रूप से दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन की रहने वाली हैं. लेकिन वो भारत को अपना घर समझती हैं. "मैं एक कैथोलिक के तौर पर बड़ी हुई लेकिन हिंदू ईश्वर शिव को लेकर हमेशा से मेरा एक जुड़ाव रहा और जब मुझे भारत आने का मौका मिला तो मैंने इसे दोनों हाथों से लपक लिया." पांच साल पहले सीता भारत आईं. सीता कहती हैं, “भारत मेरे लिए अब सबकुछ है. यही मेरा घर है. ये मेरा परिवार है.” सीता ऋषिकेश में रहती है जो गंगा नदी के किनारे बसा शहर है और हिंदुओं की पवित्र भूमि भी है. सीता कहती हैं, "मैं तो सोच भी नहीं सकती कि कभी गंगा से अलग होकर रह पाऊँगी. गंगा मेरी मां है. ये देने और जीने का नाम है जो मां के रूप प्रतिबिंबित करता है. मुझे लगता है कि गंगा मेरी रगों में बहती है." (तस्वीरें और विवरण: गीता पांडेय)

  • कुंभ

    उर्वशी सिंह घरेलू महिला है और इलाहाबाद में रहती हैं. वो कहती हैं, “मुझे संगम के करीब रहना सम्मान की तरह लगता है. हम अपने परिवार के साथ यहां सप्ताह में दो तीन बार आ जाते हैं. मुझे अच्छा लगता है जब मेरे शहर में बड़ी संख्या में लोग आते हैं. हम संगम में भी डुबकी लगाने आते हैं."

  • कुंभ

    हर सिमरन दास हरियाणा के रहने वाले हैं. दो साल पहले एक अखाड़े में शामिल हुए थे.वो कहते हैं, "बचपन से मेरा सपना था कि मैं लोगों की मदद करूं. अब मेरे बच्चे बड़े चुके हैं और अपने हिसाब से जीवन जी रहे हैं. मेरे लिए ऐसा करना आसान हो गया है." वो कहते हैं कि उन्हें कुंभ में उनके अखाड़े की तरफ से भेजा गया है लेकिन उन्हें नहीं लगता कि संगम में डुबकी लगाने से पाप धुल जाते हैं. वो ये भी मानते हैं कि सुबह शाम पूजा करने और फिर दिन भर गलत काम करने से कोई ईश्वर का सच्चा अनुयायी नहीं हो सकता.

  • कुंभ

    पूजा तिवारी युवा है और इलाबाद की ही रहने वाली है. पूजा कहती हैं, संगम के करीब रहने का विशेष महत्व है. पूजा के माता-पिता अक्सर संगम में डुबकी लगाते हैं लेकिन वो कहती है कि वो उनके साथ नहीं जाती क्योंकि संगम घाट पर स्नान करने वालों की संख्या काफी होती है. पूजा के विचार थोड़े अलग हैं. वो कहती है. नदियों की पवित्रता को लेकर मेरी आस्था है लेकिन मेरे लिए इसे देखना ही काफी है. मेरी मां कहती है कि पवित्र नदी के जल को देखने से भी पाप कम हो जाते हैं जरूरी नहीं है कि आप इसमें डुबकी लगाएं ही.

  • कुंभ

    निर्मला देवी और भरत सिंह संगम घाट पर उस जगह की तलाश कर रहे है जहां से डुबकी लगाई जा सके. भरत सिंह कहते हैं, हमारा धर्म कहता है कि संगम में डुबकी लगाना बहुत महत्वपूर्ण है.

  • कुंभ

    बिहारी लाल सेवानिवृत सेना अधिकारी हैं और महाकुंभ में मोक्ष की प्राप्ति के लिए आए हैं क्योंकि हिंदुओं की ये धार्मिक मान्यता है कि संगम में डुबकी लगाने से सारे पाप धुल जाते हैं और मुक्ति का रास्ता प्रशस्त हो जाता है. वो कहते हैं, मैं यहां अपने जीवन में किए पापों को धुलने आया हूं ताकि जब अगला जन्म लूं तो मुझे अच्छा जीवन मिल सके. पाकिस्तान के ख़िलाफ 1965 और 1971 की लड़ाई में अपना अहम योगदान दे चुके लाल कहते हैं, हर किसी के जीवन में पाप होते हैं. मैंने भी किसी को थप्पड़ मारा होगा, बचपन में गुड़ की डली चुराई होगी. ये सब पाप ही तो है और इसे धुलना जरूरी है.

  • तीन नदियों के अनोखे संगम को देखने का मौका इससे पहले महाराष्ट्र की यमुना कोंकणे को कभी नहीं मिला लेकिन इस बार इलाहाबाद में लगे कुंभ मेले का दर्शन करने वो अपने पति के साथ आई है. वो कहती हैं कि संगम में डुबकी लगाने का अपना विशेष महत्व है. रावण का वध करने के बाद हमारे भगवान राम यहां डुबकी लगाने आए थे. हम भी इस तरह की गलतियां अपने जीवन में करते हैं उसी पाप को धोने यहां आए हैं ताकि हम आगे इस तरह की गलतियां ना करें.

  • मध्य प्रदेश के किसान छोटे लाल कुंभ शुरू होने के कुछ दिन पहले से ही यहां अपना डेरा जमा चुके है. कुंभ के शुरुआत के साथ ही वो हर रोज डुबकी लगाते हैं. वो कहते हैं मैं इस पवित्र नगरी में आस्था की डुबकी लगाने आया हूं. मेरी ज़िंदगी तो लगभग खत्म ही हो चुकी है लेकिन मैं अपने परिवार की सलामती की दुआ मांगने यहां आया हूं. लाखों लोग कुंभ में डुबकी लगाने आते हैं और हर किसी की कोई ना कोई मुराद होती है.

  • कहते हैं कुंभ में साधु-संत और बुजुर्गों का मजमा लगता है लेकिन यहां अकांक्षा शुक्ला जैसी कम उम्र लड़कियां भी आती हैं. अकांक्षा उत्तरप्रदेश के लखनऊ शहर की है और कुछ दिनों पहले यहां अपने मित्र से मिलने आई थी. उसने उसी वक्त तय किया था कि वो कुंभ में जरूर आएगी. अकांक्षा कहती है, गंगा में नहाने से हमारे पाप धुल जाते हैं. लेकिन मैं यहां डुबकी लगाने नहीं आई हूं यहां बहुत भीड़ है.

  • 55 दिनों तक चलने वाले महाकुंभ में विदेशी साधुओं की भी धूम है. इन्ही में से एक हैं महंत राम नरेश गिरी. वो कहते हैं, कुंभ मेला हमेशा से विशेष रहा है. लेकिन इस बार महाकुंभ विशेष नक्षत्र में हो रहा है जो दुर्लभ है और काफी शुभ है. इस समय संगम में स्नान करके आपको सभी पापों से मुक्ति दिला देता है.

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