क्या पता मोक्ष ही मिल जाए !

Image caption बेंजामिन एक यहूदी ग्राफिक डिजाइनर हैं और मोक्ष का यकीन करते हैं.

नाम बेंजामिन पोलेक. नागरिकता-अमरीकी. धर्म-पैदाइश से यहूदी. लेकिन दीक्षा हिंदू धर्म के एक संप्रदाय में. मौजूदगी इस समय इलाहाबाद के संगम में.

बेंजामिन को मैंने सबसे पहले बनारस आ रहे विमान में देखा था. सफेद कुर्ता पाजामा और गले में सफेद दुपट्टा. गर्दन में रुद्राक्ष की माला.

गोरा, विदेशी चेहरा और गले में रुद्राक्ष की माला. ये सब थोड़ा अटपटा तो लग लग था. लेकिन बेंजामिन अकेले नहीं थे. करीब बीस लोगों की टीम थी. सारे विदेशी. सारे उन्हीं कपड़ों में.

बेंजामिन से बातचीत

विमान में बेंजामिन मेरी बगल में बैठे तो मैंने पूछ ही लिया कि वो करते क्या हैं और हिंदू धर्म में उनकी रुचि कैसे हुई.

वो बोले, ‘‘मेरी मां श्रीमाता लक्ष्मी देवी की भक्त थीं और घर में शुरू से ही आध्यात्मिक माहौल था. तो वहीं से मेरा रुझान इस तरफ हुआ.’’

आप हिप्पी जैसे नहीं लगते. एकदम साफ सुथरे, करते क्या हैं आप.

बेंजामिन मुस्कुराए और बोले, ‘‘मैं ग्राफिक डिजाइनर हूं. कंपनी के 'लोगो' बनाना या फिर कारपोरेट एडवर्टाइजिंग का काम करता हूं. टेक्नीकल काम है मेरा. वेबसाइट के लिए या इस तरह का. शौकिया पेंटिंग करता हूं. कला में रुचि है.’’

आपको अजीब नहीं लगता हिंदू धर्म में दीक्षा लेने के बाद क्योंकि आपके मां बाप तो यहूदी हैं.

इस सवाल के जवाब में बेंजामिन मुस्कुराए. बोले कि वो बहुत सहज महसूस करते हैं दोनों धर्मों में और हिंदू धर्म की आध्यात्मिकता उन्हें रास आती है.

मोक्ष

बेंजामिन पहली बार कुंभ आए हैं और कहते हैं कि वो बहुत खुश हैं. मैंने पूछा क्या मोक्ष मिल जाएगा तो बोले, ‘‘क्या पता...हो भी सकता है...मैं तो मानता हूं. मोक्ष कहीं भी कभी भी मिल सकता है.’’

लेकिन ये कपड़े, ये वेशभूषा अजीबोगरीब नहीं लगती. बेंजामिन कहते हैं, ‘‘हा हा हा हा...कुछ लोगों को अटपटा लग सकता है. लेकिन ये बस मेले के लिए है. मुझे तो बहुत कूल लगता है. वैसे कई लोग अमरीका में आध्यात्मिकता की तरफ मुड़ रहे हैं.’’

पूंजीवादी देश में आध्यात्मिकता की तरफ झुकाव क्यों?

बेंजामिन के अनुसार बहुत अधिक पूंजीवाद ही इसका कारण है कि लोग कुछ और भी खोजते हैं. बेंजामिन को लगता है कि दुनिया में उनका आना किसी बड़े मकसद के लिए है जो पैसे से इतर है बड़ा है.

पूंजीवाद से आध्यात्मिकता के इस सफर में बेंजामिन से हमारी मुलाक़ात बनारस के हवाई अड्डे पर खत्म हुई. कुंभ में अगली मुलाकात हुई तो उनसे ज़रुर पूछूंगा मोक्ष मिला या नहीं.

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