बलात्कार मामला: दस बदलाव, पांच अड़चनें

  • 16 जनवरी 2013
Image caption दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा के लिए हुए कई बदलाव.

दिल्ली की एक चलती बस में पैरा मेडिकल की एक छात्रा के साथ सामूहिक बलात्कार की घटना को एक महीना हो गया है.

इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया. आम लोगों के आक्रोश को देखते हुए दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा के लिए कई बदलावों की घोषणा की गई.

दस बदलाव

पहला: हर थाने में महिलाओं से संबंधित कोई भी शिकायत आने पर प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश.

दूसरा: दिल्ली के सभी 180 पुलिस थानों में चौबीस घंटे की महिला हेल्पडेस्क. हर थाने में दो महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती.

तीसरा: पुलिस उपायुक्त स्तर के अधिकारियों को देर रात तक गश्त पर रहने का निर्देश.

चौथा: राजधानी के हर हिस्से में बैरीकेड लगाकर वाहनों की जांच का आदेश.

पाँचवाँ: 22 रूटों पर रात के समय सफ़र के लिए महिलाओं के लिए डीटीसी ने 89 नई बसें उतारीं. बसों में होमगार्ड के जवानों की तैनाती.

छठा: राजधानी में पांच फास्ट ट्रैक अदालतों की स्थापना.

सातवाँ: हेल्पलाइन नंबर 181 शुरू किया गया. 11 महिला पुलिस पीसीआर वैन शुरू किए गए.

आठवाँ: पीड़िता सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय में शिकायत दर्ज करा सकती हैं.

नौवाँ: ऑटो चालकों पर नकेल कसने के लिए ट्रैफिक पुलिस का अभियान. हेल्प लाइन नंबर 1095, 011-25844444 जारी.

दसवाँ: स्पेशल पुलिस कमिश्नर सुधीर यादव को महिलाओं की शिकायत संबंधित पीसीआर कॉल (100/ 1091) के लिए नोडल ऑफिसर नियुक्त किया गया. महिलाएं उनके मोबाइल फोन 9818099012 पर सीधे शिकायत कर सकती हैं. एक महीने के अंदर सुधीर यादव 1300 महिलाओं की शिकायत सुन चुके हैं.

बाक़ी हैं बदलाव

Image caption लेकिन अभी भी दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा गंभीर चिंता का विषय.

इन उपायों के अलावा कुछ ऐसे भी वादे हैं जिन्हें पूरा नहीं किया जा सका है.

पहला: दिल्ली पुलिस ने पीसीआर वैन की संख्या 630 से बढ़ाकर 1000 करने की घोषणा की थी. इसे होने में अभी वक्त लगेगा.

दूसरा: दिल्ली में सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाए जाने का वादा भी किया गया था. इस दिशा में अभी काम शुरू नहीं हुआ है.

तीसरा: अब तक डीटीसी की सभी बसों में जीपीएस सिस्टम नहीं लगाया जा सका है.

चौथा: बलात्कारियों का एक राष्ट्रीय डेटा सेंटर बनाए जाने की घोषणा की गई थी. इस दिशा में लंबा वक्त लगने की आशंका जताई जा रही है.

पाँचवाँ: अब तक बलात्कारियों को सजा दिलाने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए जा सके हैं. बलात्कार मामलों के अभियुक्तों को समय सीमा के अंदर सज़ा सुनाए जाने के लिए कानून में बदलाव की जरूरत है. इस दिशा में काम सरकार जस्टिस जेएस वर्मा की रिपोर्ट का इंतज़ार कर रही है.

बदलावों का असर कहां?

इन तमाम कोशिशों के बावजूद भी दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर स्थिति बनी हुई है.

बीते एक महीने के दौरान राजधानी दिल्ली में महिलाओं के साथ बलात्कार और यौन उत्पीड़न के करीब 60 मामले सामने आए हैं.

यानी हर दिन दो महिलाओं को यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है.

सुप्रीम कोर्ट ने भी बयान दिया है कि दिल्ली महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित शहर है.

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