क्या पाकिस्तान को जवाब देगा भारत?

Image caption भारत और पाकिस्तान के बीच नियंत्रण रेखा पर पहले भी युद्धविराम का उल्लंघन हुआ है.

नियंत्रण रेखा पर युद्धविराम के उल्लंघन के बाद भारत और पाकिस्तानी सरकारें एक-दूसरे पर उकसाए जाने का आरोप तो लगा रही हैं लेकिन सुर नरम हैं और शब्द नपे-तुले.

पर सरकार के बाहर भारत में तेवर गर्म हैं और तीखे शब्दों के इस्तेमाल में कोई कोताही नहीं बरती जा रही.

विपक्ष भारतीय जनता पार्टी ‘एक के बदले दस सिर’ मांग रही है तो सेना प्रमुख ने कहा है, “पाकिस्तान को जवाब देने के लिए भारत सही समय और सही जगह का चुनाव करेगा.”

पाकिस्तान को भारत के उच्च आयुक्त रह चुके जी पार्थसारथी मानते हैं कि माहौल गर्म है और भारत को बातचीत का तरीका बदलना होगा, “भारत को उपयुक्त कार्रवाई करनी चाहिए, जितना नुकसान पाकिस्तानी सेना हमारा कर रही है उतना ही भारतीय सेना को भी करना चाहिए.”

दोनों देशों के बीच भड़के तनाव को कम करने के मक़सद से सोमवार को पूंछ में हुई फ़्लैगमीट भी आरोप-प्रत्यारोप का दोहराव ही रही.

फ़र्क इतना कि बैठक ख़त्म होने से पहले भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट जनरल ओमप्रकाश ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि पाकिस्तान के पूर्वनियोजित हमले में सेना को लश्कर-ए-तयैबा का सहयोग था.

लेकिन पाकिस्तान को भारत के उप-उच्च आयुक्त रह चुके टीसीए रंगाचारी के मुताबिक तनाव ख़त्म हो सकता है, “सेना औऱ विपक्ष दोनों अपनी भूमिकाओं के अनुरूप बयान दे रहे हैं, ये अपेक्षित है, लेकिन सरकार का रवैया तनाव कम करने और सहयोग और बातचीत का है, ये बना रहा तो ये दौर भी निकल जाएगा.”

'पूर्वनियोजित हमला'

भारत और पाकिस्तान, दोनों ही अपनी-अपनी सेनाओं के हमलों को सही ठहराते हुए इस सबकी शुरुआत के लिए एक-दूसरे की ओर उंगली उठा रहे हैं.

भारतीय सेना प्रमुख जनरल बिक्रम सिंह ने सोमवार को पत्रकारों से बातचात में कहा कि किसी सैनिक के शव के साथ बदसलूकी करना किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं है, और “भारत के किसी क़त्य की वजह से नहीं बल्कि पाकिस्तान की ओर से किया गया हमला पूर्वनियोजित था.”

आठ जनवरी को पाकिस्तान की तरफ़ से हुई गोलीबारी में दो भारतीय सैनिक मारे गए थे और एक भारतीय सैनिक हेमराज के शव के साथ कथित तौर पर बदसलूकी भी की गई थी.

हमलों में मारे गए भारतीय सैनिक हेमराज के परिवारवालों से मिलने पहुंची भारतीय जनता पार्टी की नेता सुष्मा स्वराज ने साफ शब्दों में कहा कि भारत को पाकिस्तान से बदला लेना चाहिए.

उन्होंने तो ये तक कहा कि, “देश की मांग है कि सरकार कमज़ोर ना बने, पाकिस्तानी सेना नियंत्रण रेखा पर ऐसे कारनामे को अंजाम दे और कोई जवाब ना दिया जाए, ये तो बर्दाश्त ही नहीं किया जाना चाहिए.”

बदलेगा बातचीत का तरीका?

Image caption भारत के सेना प्रमुख ने कहा कि पाकिस्तान युद्धविराम के उल्लंघन के लिए ज़िम्मेदार है.

आक्रोष से भरे इन बयानों के बीच उप-राष्ट्रपति हामिद अंसारी ने भी एक बयान दिया.

उन्होंने कहा कि, “पड़ोसी बदले तो नहीं जा सकते, उनसे बातचीत जारी रखनी ही होगी, और ये इमानदारी और गरिमा से करनी होगी.”

लेकिन जी पार्थसारथी के मुताबिक भारत का यही रुख उसे पाकिस्तान की नज़रों में कमज़ोर बनाता है.

वो कहते हैं, “भारत को बातचीत का तरीका बदलना होगा, जबतक पाकिस्तान की धरती से आतंकवाद नहीं रुकता, हर बातचीत और फैसले के केन्द्र में यही रहना होगा.”

ग़ौरतलब है कि हाल ही में पाकिस्तान की विदेश मंत्री हिना रब्बानी खर ने एक बयान में कहा था कि “वो सही मंच पर भारत से बात करेंगी, ना कि करोड़ों की जनता से.”

उधर भारत के विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने भी कहा कि कोशिश रहेगी कि पाकिस्तान के साथ शांति प्रक्रिया जारी रहे.

ऐसे में ये देखना दिलचस्प होगा कि आनेवाले दिनों में मीडिया में छाई ऊंची ग़ैर-सरकारी नाराज़ आवाज़ें कुछ बदल पाएंगी या आखिर में सरकार की संयमित आवाज़ का ही असर रहेगा.

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