घूस लेने वाले जेल गए, देने वाले पढ़ा रहे हैं

Image caption अदालत के फैसले के बाद ओम प्रकाश चौटाला को गिरफ्तार कर लिया गया है.

तीन हज़ार से ज़्यादा शिक्षकों को गैरकानूनी रूप से भर्ती करने के आरोप में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला और उनके बेटे तो गिरफ्तार हो गए हैं लेकिन शिक्षकों की नौकरी बरक़रार है.

हरियाणा सरकार के एक अधिकारी ने पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर बीबीसी को बताया कि इस मुकदमे में शिक्षकों को पार्टी नहीं बनाया गया और इसीलिए उन पर इस फैसले का कोई असर नहीं पड़ा है.

अधिकारी के मुताबिक़ ये सभी अध्यापक अब भी अपनी नौकरी कर रहे हैं.

दिसंबर 1999 और जनवरी 2000 में साक्षात्कार के बाद हरियाणा के 18 ज़िलों में 3,206 शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी.

जांच के बाद पता चला कि चुने गए शिक्षकों की सूची को सितंबर 2000 में फर्ज़ी सूची से बदल दिया गया.

लाखों की रिश्वत

दिल्ली की एक अदालत 22 जनवरी को ओम प्रकाश चौटाला और उनके बेटे समेत 53 लोगों को सज़ा सुनाएगी.

इन पर आरोप था कि सभी 3,206 शिक्षकों में हर एक से तीन से चार लाख रुपये की रिश्वत ली गई.

सीबीआई के अधिकारियों का कहना है कि खुद चौटाला ने तत्कालीन निदेशक (प्राथमिक शिक्षा) संजीव कुमार को इस बारे में लिखित आदेश दिया. संजीव कुमार भी इस मामले में अभियुक्त बनाए गए हैं.

इस घोटाले के वक्त हरियाणा के शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी भी चौटाला के पास थी. उन्होंने कुमार से कहा कि वो इंटरव्यू की फर्जी सूची तैयार करें.

ये घोटाला उस समय सामने आया जब कुमार एक याचिका के साथ अदालत पहुंचे और उन्होंने इंटरव्यू की मूल सूची दिखाई.

संजीव कुमार के अलावा उन लोगों ने भी अदालत का दरवाजा खटखटाया जिन्हें भर्ती में चुना नहीं गया.

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