भारत-पाकिस्तान में एक बार फिर पिसा मंटो

  • 17 जनवरी 2013
मंटो
Image caption मंटो ने बँटवारे पर जो लिखा शायद किसी ने नहीं लिखा है.

मौक़ा था मंटो की जन्म शताब्दी को दिल्ली में भारत और पाकिस्तान के कलाकारों के साथ मिलकर मनाने का लेकिन अब ऐसा नहीं हो सकेगा- ये कहना है पाकिस्तानी कला की जानी-मानी हस्ती मदीहा गौहर का.

मदीहा गौहर इन दिनों भारत में हैं अपने 'नाटक कौन है ये गुस्ताख़' के मंचन के लिए जिसे नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा यानी एनएसडी की तरफ़ से चल रहे भारत रंग महोत्सव मे शनिवार 19 जनवरी को दिखाया जाना था.

लेकिन अब ऐसा नहीं हो सकेगा क्योंकि इसे अंतिम समय में रद्द कर दिया गया है. किसने किया इस बारे में भी कोई जानकारी नहीं है. एनएसडी के प्रवक्ता एके बरूआ ने केवल इतना कहा कि हमें नाटक रद्द करने का आदेश हुआ है.

मदीहा गौहर के अजोका थियेटर के अलावा पाकिस्तान के कराची शहर से भी एक दल आया हुआ है जिसे गुरूवार को मंटो पर ही लिखे गए एक नाटक 'मंटोरामा' को पेश करना था लेकिन उसे भी ऐन वक्त पर रद्द कर दिया गया.

शांति का पैग़ाम

इस फ़ैसले पर अपनी नाराज़गी और आश्चर्य जताते हुए मदीहा गौहर कहती हैं कि आज जिसकी सबसे ज्यादा ज़रूरत है उसे ही दबाने की कोशिश की जा रही है.

मदीहा गौहर के अनुसार आज के नेताओं को मंटो से सबक़ लेना चाहिए.

मदीहा कहती है, ''थियेटर के ज़रिए हमने श्रीनगर से लेकर कन्याकुमारी तक शांति का पैग़ाम दिया है और लोगों का दिला जीता है. कलाकारों का यही काम होता है. मंटो की राजनीतिक सोच बहुत प्रगतिशील थी और काश हमारे राजनेताओं की सोच वैसी होती तो हालात में बहुत फ़र्क़ होता.''

भारत के जाने माने रंगकर्मी एमके रैना ने भी इस फैसले पर अपनी हैरानी जताते हुए कहा, ''विडंबना ये है कि मंटो का जन्मदिन आज कल में है और मंटो का ही टोबा टेक सिंह रह गया. ये महोत्सव मंटो को समर्पित किया गया था. अच्छा होता कि भारत और पाकिस्तान के लोग मिलकर मंटो को याद करते.''

भारतीय कला जगत की एक और जानी मानी हस्ती त्रिपुरारीशरण शर्मा ने भी पाकिस्तानी थियेटर के नाटकों को रद्द करने के फ़ैसले की निंदा की है. बीबीसी से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं किया जाना चाहिए था.

क्या हासिल होगा?

Image caption मदीहा गौहर पिछले 10 बरसों से भारत में नाटक पेश कर रही हैं.

इससे पहले बुधवार को जयपुर में भी मंटो पर लिखा नाटक 'कौन है ये गुस्ताख़ पेश किया जाना था' और मदीहा गौहर अपनी टीम के सदस्यों के साथ जयपुर पहुंचकर सारी तैयारी कर चुकी थीं और केवल दो घंटे पहले उन्हें कहा गया कि नाटक रद्द कर दिया गया है.

ग़ौरतलब है कि नियंत्रण रेखापर हुई गोलीबारी और एक भारतीय सैनिक के शव के साथ कथित बदसलूकी किए जाने के बाद भारत ने पाकिस्तान से विरोध जताते हुए ऐसे कई फैसले किए हैं जिनमें पाकिस्तानी हॉकी खिलाड़ियों को इंडिया लीग से खेलने की इजाजत न देना और बुजुर्गों को 'वीज़ा ऑन अराइवल' को टाल देना शामिल है.

सवाल ये है कि ऐसे मौक़ो पर सरकारें ऐसा क्यों करती है, इसके जवाब में एमके रैना कहते हैं, ''हो सकता है भारत सरकार ने ही ये फ़ैसला किया हो लेकिन ड्रामा को निकाल कर, हॉकी प्लेयर को निकालकर, कुछ गाने वाले को निकाल कर आप बहुत कुछ हासिल कर लेंगे इस पर मुझे शक है.''

मदीहा गौहर कहती है कि पाकिस्तान में जो हालात हैं उसमें कला के लिए वैसे भी दिन ब दिन जगह सिकुड़ती जा रही है लेकिन भारत को उसकी नक़ल करने के बजाए उसके ग़लत प्रभाव से सबक़ लेनी चाहिए.

मदीहा गौहर ने कहा कि भारत में जिस तरह इसके खिलाफ़ आवाज़े उठनी चाहिए, शायद उस तरह नागरिक समाज के लोग सामने नहीं आए हैं.

एमके रैना भी कहते हैं कि भारत में लोगों ने बोलना बंद कर दिया है लेकिन लोग इस पर बातें करेंगे और मदीहा फिर भारत आकर अपना नाटक पेश करेंगी.

पाकिस्तान और भारत दोनों तरफ़ के कलाकारों का मानना है कि इससे निराश होने के बजाए हमें अपना काम करते रहना चाहिए और दोनों देशों के रिश्तों को और मज़बूत करने की कोशिश जारी रहनी चाहिए.

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