चिंतन शिविर में महिलाओं की स्थिति पर चिंता

  • 18 जनवरी 2013
कांग्रेस चिंतन शिविर
Image caption इस बैठक में कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी

जयपुर में कांग्रेस के चिंतन शिविर में पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा है कि देश के सामने इस वक्त कई राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक चुनौतियां हैं.

उन्होंने कहा कि कांग्रेस के चिंतन शिविर में जिन बड़े मुद्दों पर बात होगी, उनमें महिलाओं की सुरक्षा भी शामिल हैं.

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि महिलाओं पर हो रही हिंसा शर्म का विषय है. सोनिया गांधी ने कहा कि देश का अब भी बड़ा हिस्सा पिछड़ा हुआ है, जिसके लिए काम किए जाने की ज़रूरत है. उन्होंने कहा कि देश की उम्मीदें बढ़ रही हैं.

उन्होंने कहा कि सामाजिक दायित्व के साथ-साथ विकास पर भी ध्यान देना होगा. इसके लिए उन्होंने राज्यों के साथ बेहतर तालमले पर भी जोर दिया.

सोनिया गांधी ने कहा कि यूपीए सरकार ने अब तक अपने नौ साल के कार्यकाल में काफी विकास के काम किए हैं.

कांग्रेस अध्यक्ष ने माना कि जनता अब भ्रष्टाचार से ऊब चुकी है. उन्होंने युवा नेताओ को शादियों में फिजूल खर्ची न करने की भी नसीहत दी.

कांग्रेस के इस बहुप्रचारित चिंतन शिविर को आम चुनावों की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है.

इसमें प्रधानमंत्री मनमोहन सिह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी और उनके पुत्र कांग्रेस महासचिव राहुल गाँधी समेत लगभग ढाई हजार कांग्रेस प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं. कांग्रेसी नेता दो दिन के गहन विचार विमर्श के बाद जयपुर घोषणा पत्र तैयार करेंगे.

प्रेक्षक कहते है इस शिविर के बाद राहुल गाँधी की राजनीतिक भूमिका का और विस्तार किया जा सकता है. इस शिविर को कांग्रेस की अगले चुनाव के लिए तैयारी के रूप में भी देखा जा रहा है.

बदला शहर का रंग ढंग

प्रधानमंत्री, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी और पार्टी के ‘राजकुमार’ राहुल तीन दिन जयपुर में रहेंगे. कांग्रेस नेताओं ने जयपुर में कदम रखे तो साफ सुथरी सड़कें, सजी धजी इमारतें, मुस्कराते पेड़ और कांग्रेस के झंडो ने उनका स्वागत किया.

सरकार ने जयपुर शहर का हुलिया ही बदल दिया है. हर तरफ रंग रोगन है, पार्टी की छवि चमकाने वाले, झंडे पोस्टर और पताकाएं मेहमानों के स्वागत और शहर में किसी बड़े आयोजन की गवाही देते मिलते है.

विपक्षी भारतीय जनता पार्टी ने सरकार पर इस आयोजन के लिए भारी धन खर्च करने का आरोप लगाया है.

मगर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कहते हैं कि इसमें नियमानुसार प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों को ही मान्य प्रोटोकॉल की सुविधाएं दी जा रही हैं. चूँकि ये आयोजन पार्टी का है, लिहाजा बाकी खर्च संगठन खुद करेगा.

Image caption क्या राहुल गांधी संभालेंगे बड़ी जिम्मेदारी

वे कहते हैं कि इस में सादगी का पूरा ख्याल रखा जा रहा है. कांग्रेस में वैचारिक पुट वाले नेता अलग अलग समूहों में बंट कर चिंतन करेंगे. इस सोच विचार के बाद जो इबारत लिखी जाएगी उसे जयपुर घोषणा पात्र नाम दिया जाएगा.

क्या रास्ता निकलेगा?

इस घोषणापत्र से पता चलेगा कांग्रेस खुद को और देश को किस दिशा में ले जाना चाहती है. इस शिविर के लिए पूरे शहर में कड़े सुरक्षा उपाय किए गए हैं. यहां तक कि जयपुर के बाहर से भी सुरक्षा कर्मचारियों को तैनात किया गया है.

शिविर जयपुर के बिरला ऑडिटोरियम में होगा. ये शेखावटी हवेली की वास्तु कला की बानगी प्रस्तुत करता है. यहाँ सुरक्षा के लिहाज से कैमरे भी लगाए गए हैं.

इस शिविर में सामजिक आर्थिक, राजनीतिक और विदेश नीति पर वैचारिक मंथन होगा. साथ ही तेलंगना जैसे क्षेत्रीय मुद्दे भी मंथन का हिस्सा बनेंगे.

इस शिविर के मद्देनजर कुछ जाति संगठन और अल्पसंख्यक समुदाय के नेता भी सक्रिय हैं. इनमें कोई आरक्षण के मुद्दे उठा रहा है तो कोई मुसलमानों की समस्याओं को इन नेताओं के सामने रखने की कोशिश कर रहा है.

कांग्रेस में सोनिया गांधी के नेतृत्व में ये तीसरा शिविर होगा. यह शिविर ऐसे समय हो रहा है जब देश के सामने कई समस्याएं हैं. मगर उससे भी ज्यादा मुश्किलें खुद कांग्रेस के सामने है. पर क्या इस शिविर से कोई रास्ता निकलेगा, कहना कठिन है.

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