बेटी के बिना ज़िंदगी की नई शुरुआत...

 शनिवार, 19 जनवरी, 2013 को 06:39 IST तक के समाचार
कमरा

वो कमरा था दिल्ली की चलती बस में सामूहिक बलात्कार का शिकार हुई पीड़िता का. उनके पिता दरवाजे के पास आकर कुछ सोचकर रुक गए. फिर चारों ओर देखने लगे.

एक किनारे में समेटे हुए बिस्तर पर शोभा डे की किताब. साथ में रखी सिलाई मशीन. जमीन पर चार-पाँच जोड़ी काले और सफेद रंग की सैंडलें.

दीवार के साथ रखा एक टेडी बियर जिस पर अंग्रेजी में 'आई लव यू' लिखा था.

एक दूसरे कोने पर दीवार में बनी अलमारी के ऊपरी हिस्से में छोटा सा पूजाघर. पास रखे थे ढेर सारे नोट्स, किताबें.

दिल्ली के महावीर इन्क्लेव इलाके की तंग और उबड़-खाबड़ गलियों से पहुँचकर हम उनके मकान तक पहुँचे थे.

मकान की छत पर था वो कमरा. बाद में नीचे हम उसी कमरे में पहुँचे जहाँ पीड़िता का शव रखा गया था.

'ये दाग नहीं है'

टैडी बियर

वो लड़की इसी कमरे में रहती थी

गुरुवार रात को ही परिवार उत्तर प्रदेश के अपने गाँव से लौटा था. घटना के घाव उनके चेहरे पर स्पष्ट थे.

आवाज धीमी. भाव-विहीन चेहरा. ऐसे कि आँखों से कभी भी आँसू झलक सकते हैं.

दिल्ली में बेटी के बिना जिंदगी की ये नई शुरुआत होगी.

वो कहते हैं, ''जब तक हम काम में नहीं लगेंगे तब तक तो ध्यान इसी में रहेगा. जो सपने मैने देखे थे वो तो पूरे नहीं हुए. नींद पहले खुल गई और सपना बिखर गया.''

लेकिन उन्हें अपने दो बेटों की सुरक्षा को लेकर डर है. पिता ने बताया कि सुरक्षा कारणों से उन्होंने परिवार के बाकी सदस्यों को मीडिया से दूर रखा है.

"अगर हमारी लड़की कोई गलत काम करती तो दाग लगता. ये दाग नहीं है, ये हादसा है."

लड़की के पिता

वो कहते हैं, ''डर है कि जिस तरह के लोग हैं, हमारे साथ क्या व्यवहार करेंगे, ये हम भी नहीं जानते हैं.''

ऐसी घटना के बाद कई परिवार शर्मसार होते हैं. कई परिवारों को दाग लगने का डर होता है.

उनके पिता कहते हैं, ''अगर हमारी लड़की कोई गलत काम करती तो दाग लगता. ये दाग नहीं है, ये हादसा है.''

वो मानते हैं कि दिल्ली आना गलती नहीं थी और वो चाहेंगे कि दूसरे लोग जो दिल्ली आएँ वो दिल्ली को बदलें.

वो कहते हैं, ''दिल्ली में जो गलत लोग हैं, उनसे मुकाबला करें.''

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