अजमेर: देग में कूदने वाली माँ-बेटी की मौत

 रविवार, 20 जनवरी, 2013 को 15:34 IST तक के समाचार
देग

इसी देग में गिरकर माँ-बेटियों की मौत हो गई

भारत में सूफ़ी संत ख़्वाजा, मोईनुद्दीन चिश्ती की अजमेर स्थित दरगाह में मुग़ल बादशाह जहांगीर की ओर से भेंट की गई 'छोटी देग' (कड़ाह) में कूदने वाली माँ और उसकी बेटी की मौत हो गई है.

अब इस बात से शायद ही पर्दा उठ सके कि वो माँ बेटी मन्नत के लिए कूदी थीं या फिर दुर्घटनावश गिर गई थीं.

दोनों माँ बेटी ने रविवार को अजमेर के सरकारी अस्पताल में दम तोड़ दिया. पुलिस ने केरल में उनके परिजनों को सूचना दे दी है.

केरल के कुन्नूर निवासी सुल्फजा (58) और बेटी सरीना (23) गत गुरुवार की शाम गर्म खौलते देग में कूद गई थीं.

पहले बेटी सरीना इस देग में कूदी और फिर माँ उसे बचाने उतरी. दोनों ही अस्सी फीसद से ज्यादा झुलस गई थीं.

इन दोनों को बहुत गम्भीर हालत में अस्पताल में दाखिल कराया गया था. पुलिस के लिए दिक्कत ये भी थी कि वो मलयाली जबान में बात करती थीं. लिहाजा ये पता नहीं चल सका कि ये दुर्घटना थी या दोनों अपनी आस्था के सबब इस विशाल मर्तबान में कूद गईं.

दरगाह पुलिस थाने के अधिकारी अनिल सिंह ने बताया कि ये अभी साफ़ नहीं हो सका है कि ये हादसा था या इन दोनों ने खुद छलांग लगाई. पुलिस ने इन दोनों से बात करने के लिए एक दुभाषिये की भी मदद ली, लेकिन इससे भी कुछ हासिल नहीं हुआ.

पुलिस के मुताबिक, ये दोनों गत एक माह से अजमेर में थीं और इबादत के लिए उनका दरगाह में आना जाना था.

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पुलिस ने दिवगंत सुल्फजा के बेटे को सूचना दी है. वो अपने काम के सिलसिले मे दुबई में रहते हैं. पुलिस के अनुसार बेटा अजमेर पहुंचने वाला है. सुल्फजा का पति भी दरगाहों ,खानकाह और इबादत स्थलों पर वक्त गुजरता है.

पुलिस के मुताबिक सुल्फजा की आर्थिक हालत भी ठीक नहीं थी और वो अवसाद में भी रहती थी. ये छोटी देग मुग़ल बादशाह जहाँगीर ने ख़्वाजा के दरबार में भेंट की थी.

ये दरगाह में बुलंद दरवाजे के बाईं और शहना-ए-चिराग के पास स्थापित है. इसमें 2,400 किलोग्राम तक खाद्य सामग्री पकाई जा सकती है.

इसमें प्रसाद पकता है जिसे नियाज या तबरुख भी कहते हैं. चूँकि खवाजा के अकीदतमंद सभी धर्मों और आस्था वाले होते है, लिहाजा इसमें पकने वाला आहार शाकाहारी होता है. इसे सूखे मेवे,चावल, घी जैसी सामग्री से बनाया जाता है और फिर लोगों में वितरित किया जाता है.

श्रद्धालु अपनी मन्नत पूरी होने पर इस देग में प्रसाद पकवाते हैं. दरगाह में एक बड़ी देग भी है जिसे बादशाह अकबर ने भेंट किया था. इस घटना के बाद दरगाह प्रबंधन और खादिम देग को लेकर सुरक्षा उपायों पर विचार कर रहे हैं, ताकि आइन्दा ऐसी घटना न हो.

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