बिहार: डीआईजी पर रंगदारी का आरोप

  • 22 जनवरी 2013
बिहार पुलिस
Image caption राज्य का पुलिस महकमा शर्मिंदगी महसूस कर रहा है

बिहार में 'रंगदारी' यानी अवैध वसूली के गंभीर अभियोग में फंसे सारण क्षेत्र के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी डीआइजी आलोक कुमार का सोमवार देर शाम तबादला कर दिया गया.

आलोक कुमार पर एक शराब व्यवसायी से दस करोड़ रूपए ऐंठने के लिए अपने कथित गुर्गों के ज़रिये उन पर दबाव बनाने का आरोप है.

बिहार के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अभयानंद के अनुसार, पुलिस की एक जांच टीम ने आरंभिक छानबीन में इस आरोप को सरसरी तौर पर सही पाया है.

उन्होंने बताया कि आर्थिक अपराध अनुसंधान इकाई ने इस बाबत एक मामला दर्ज करके जांच शुरू कर दी है.

सिवान ज़िले के रहने वाले शराब व्यवसायी टुन्नूजी पाण्डेय ने डीजीपी से मिलकर शिकायत की थी कि सारण के डीआइजी ने पहले एजेंट के ज़रिये और बाद में खुद उनसे दस करोड़ रूपए की मांग की.

आरोप के मुताबिक, डीआइजी ने ये धमकी दी थी कि रूपए नहीं पहुँचाने पर मिलावटी दारू का अवैध धंधा चलाने जैसे मामले में उसे फंसाकर तबाह कर दिया जायेगा.

बड़ा अधिकारी, बड़ी रकम

इस सिलसिले में जिन तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उन्हें डीआइजी आलोक कुमार का एजेंट बताया जाता है. इन कथित एजेंटों के पास से दस लाख रूपये भी बरामद हुए हैं.

राज्य के पुलिस प्रवक्ता एडीजी रवीन्द्र कुमार ने बीबीसी को बताया, ''पुलिस अधिकारी आलोक कुमार को सारण के डीआइजी पद से हटाकर पुलिस मुख्यालय में वेटिंग फॉर पोस्टिंग रखा गया है. उनके ख़िलाफ़ शुरू हुई जांच से जो तथ्य सामने आएंगे, उन्हीं के मद्देनज़र उचित कार्रवाई की जाएगी. वैसे शुरुआती तफ्तीश में जो कुछ साक्ष्य मिले थे, वे संबंधित शिकायत से मेल खाते थे, इसलिए मामला दर्ज हुआ.''

आलोक कुमार कुछ समय पहले पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पद पर तैनात थे. वो जम्मू-कश्मीर कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं.

आरोप की गंभीरता देखते हुए सोमवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने डीजीपी को बुलाकर इस मसले पर बातचीत की. उसके बाद आलोक कुमार का तबादला किया गया.

राज्य के पुलिस महकमे में इस मामले को लेकर ख़ासी शर्मिंदगी महसूस जा रही है क्योंकि संभवतः पहली बार किसी बड़े पुलिस अधिकारी पर इतनी बड़ी रकम की रंगदारी वसूली का आरोप लगा है.

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