क्या कश्मीर में परमाणु हमले का ख़तरा है?

 मंगलवार, 22 जनवरी, 2013 को 19:12 IST तक के समाचार
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कश्मीर को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच तीन बार युद्ध हो चुका है

जम्मू कश्मीर पुलिस के नागरिक सुरक्षा और आपदा प्रतिक्रिया बल की ओर से लोगों को जारी दिशा निर्देशों में कहा गया है कि परमाणु युद्ध होने पर वह क्या क्या कदम उठाएं.

सलाह दी गई है कि अगर ऐसा होता है तो लोग अपने घरों में खराब न होने वाले खाद्य पदार्थो के रखने के लिए तहखाने बनवाएं और अपना आपा न खोएं.

इसमें विस्तार से बताया गया है कि अगर परमाणु युद्ध छिड़ता है तो लोगतहखाने बनाएं जिसमें लोग अपने परिवार समेत 15 दिनों तक रह सकें.

यह सलाह उस समय आई है जब नियंत्रण रेखा पर हुई झड़पों के कारण भारत पाकिस्तान संबंध खराब हो चले हैं.

तहखाने में जाने की सलाह

सरकार की ओर से बताया गया है कि अगर तहखाने न बन पाएं तो लोग खुले स्थान पर घर के सामने बंकर बनवाएं जैसा कि युद्ध में होता है. इस नोटिस में लोगों को सलाह दी गई है कि वह पर्याप्त खाना और पानी भी अपने पास रखें जिसे समय समय पर बदला जा सके ता कि वह अस्वास्थयकर न हो जाए.

कश्मीर

कश्मीर स्थित नियंत्रण रेखा पर पिछले हफ़्ते तक तनाव का माहौल था

लोगों को यह सलाह भी दी गई है कि कि वह तहखाने में शौचालय की सुविधा रखें और उनके पास पर्याप्त मात्रा में मोमबत्तियाँ और बैटरी से चलने वाली प्रकाश व्यवस्था हो. उनसे कहा गया है कि उनके पास बैटरी से चलने वाले छोटे ट्रांजिस्टर और टेलिविज़न होने चाहिए ताकि वह नागरिक सुरक्षा विबाग द्वारा दिए गए निर्देशों को सुन सकें.

इस विज्ञापन में कहा गया है कि अगर वह परमाणु युद्ध के दौरान खुली जगह पर हों तो तुरंत ज़मीन पर लेट जाएं और इसी स्थिति में बने रहें. वह अपनी आंखों और अपने चेहरे को अपने हाथों से ढँक लें और कानों में उँगलियाँ डाल लें ताकि उनके कान के पर्दे न फटें.

इस नोटिस में यह भी कहा गया है कि अगर फ़्लैश के पाँच सेकंड्स के अंदर विस्फोट तरंगें न आएं तो यह समझिए कि आप विस्फोट स्थल से काफी दूर हैं और 150 रैड्स से अधिक का विकिरण नहीं होगा.

जब श्रीनगर में मौजूद वरिष्ठ पत्रकार अलताफ़ हुसैन ने होम गार्ड और नागरिक सुरक्षा के आई जी योगिंदर कौल से पूछा कि यह निर्देश जारी करने के पीछे क्या वजह है तो उनका कहना था कि यह नियमित निर्देश थे जिन्हें विभाग के स्थापना दिवस पर जारी किया गया था.

उन्होंने कहा, "यह एक सामान्य प्रक्रिया थी जिसका उद्देश्य लोगों को जानकारी देना था. इसको किसी और चीज़ से जोड़ कर नहीं देखा जाना चाहिए."

संवाददाताओं का कहना है कि उन्हें यह याद नहीं आता कि सरकार के किसी विभाग की ओर से पिछले कुछ समय में ऐसे कोई दिशा निर्देश जारी किए गए हों.

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