मर्दों के नाम खत- औरतें चिड़ियाघर में कैद जानवर नहीं

 शनिवार, 26 जनवरी, 2013 को 11:52 IST तक के समाचार

पिछले दिनों दिल्ली में हुई सामूहिक बलात्कार की घटना के बाद पूरे देश में विभिन्न वर्ग के लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया.

किसी को पुलिस से शिकायत थी तो किसी को सरकार से लेकिन सबसे ज़्यादा निशाने पर थे भारतीय पुरुष जिनके रवैये को लेकर कई सवाल उठे.

इस घटना के बाद कई राजनेताओं और धर्मगुरुओं ने जिस तरह के बयान दिए उस पर पूरे देश में तीखी प्रतिक्रिया हुई.

ऐसे में सवाल ये भी उठा कि क्या भारतीय पुरुषों को महिलाओं के प्रति अपने रवैए में ज़बरदस्त सुधार लाने की ज़रूरत है.

26 जनवरी के मौके पर बीबीसी ने बात की देश की कुछ जानी मानी हस्तियों से और जाना क्या है उनका संदेश पुरुषों के नाम.

डॉक्टर किरण बेदी, भारत की पहली महिला आईपीएस अफसर,समाज सेवक

डॉक्टर किरण बेदी

मैं ये सोचती हूँ कि ये ज़िम्मेदारी का साल है. हर स्त्री एक बहादुर स्त्री बने और हर पुरुष एक जिम्मेदार पुरुष बने. पुरुष स्त्री की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी ले. चाहे वो सुरक्षा घर की चार दीवारों के बीच हो या फिर सार्वजनिक स्थान पर, या फिर किसी बस या ट्रेन में.

अगर कोई लड़की अकेली है तो फिर लड़के की ज़िम्मेदारी और भी बढ़ जाती है. कोई भी वक़्त गैर-ज़िम्मेदारी का नहीं है. जीवन तो नाम ही है अपनी ज़िम्मेदारी निभाने का.

रीना ढाका, फैशन डिज़ाइनर

रीना ढाका, फैशन डिज़ाइनर

26 जनवरी के इस मौके पर मैं अपने देश के पुरुषों से कहना चाहती हूँ कि जैसे हम औरतें कभी किसी राह चलते पुरुष की तरफ घूर-घूर कर नहीं देखती तो पुरुष औरतों को क्यों घूरते हैं.

औरतें चाहे जो भी पहने, जहां भी जाना चाहें और जब भी जाना चाहें उन्हें भी वही आज़ादी मिलनी चाहिए जो इस देश में पुरुषों को मिलती है.

औरतें चिड़ियाघर में कैद कोई जानवर तो नहीं हैं कि जिनके पिंजरे के सामने खड़े हो कर पुरुष उन्हें ताकते रहें.

कृपया हमें ताकना बंद करें. इससे हमें बड़ी परेशानी होती है.

मनोज वाजपेयी, फिल्म अभिनेता

मनोज वाजपेयी, फिल्म अभिनेता

मैं सारे पुरुष वर्ग को ये कहना चाहूंगा कि अगर आप नारी का सम्मान करते हैं तो सार्वजनिक स्थलों पर ऐसी कोई भी हरकत न करें जिससे आपकी मां, बहन, बीवी या बेटी की बदनामी हो.

मैंने देखा है कि सार्वजनिक वाहनों में अक्सर पुरुष, चाहे वो किसी भी उम्र के हों, महिलाओं के साथ चिपक कर खड़े हो जाते हैं. इससे पुरुषों की मानसिकता का पता चलता है. इससे आपकी परवरिश दिखती है.

तो ज़रा आप लोग सोचिए और संभलिए क्योंकि अगर समाज बदलना है तो अपने आप से ही उसकी शुरुआत करनी पड़ेगी.

जूही चावला, फिल्म अभिनेत्री

जूही चावला, फिल्म अभिनेत्री

गण्तंत्र दिवस के मौके पर मैं लड़कों से ये कहना चाहती हूं कि थोड़ी सी तमीज़ रखिए लेकिन मैं लड़कियों से भी ये कहना चाहूंगी कि पढ़िए लिखिए ताकि आप अपने पैरों पर खड़े हो सकें.

हिम्मत रखिए क्योंकि आप किसी लड़के से कम नहीं हैं क्योंकि जब आप हिम्मत दिखाएंगी तो सब सुनने लगेंगे, सब रास्ते पर आ जाएंगे.

जिमी शेरगिल, फिल्म अभिनेता

जिमी शेरगिल, फिल्म अभिनेता

एक पुरुष के जीवन में स्त्री कई रूपों में मौजूद होती है. मां, बहन, प्रेमिका, बीवी या फिर बेटी.

औरत चाहे जिस भी रूप में हो ये हमारा हक बनता है कि हम उन्हें प्यार करें, उनकी रक्षा करें, उनको इज़्जत दें.

अगर पुरुष होने के नाते हम ये नहीं कर सकते हैं तो हमारा कोई हक नहीं बनता कि हम खुद को पुरुष कहें.

फारूख शेख, फिल्म अभिनेता

फारूख शेख, फिल्म अभिनेता

अगर मैं हिंदुस्तानी मर्द को बहुत ही कम शब्दों में कुछ कहूं तो मैं कहूंगा कि थोड़ी शर्म करो और थोड़ी हिम्मत दिखाओ.

ये बात मैं खुद अपने लिए भी कह रहा हूं. शर्म इसलिए करो कि अगर सारे उसूल सिर्फ औरतें ही पालेंगी तो तुम क्या पालोगे.

और दूसरा ये कि आपकी नज़र के सामने कोई किसी औरत के सामने बदतमीज़ी कर रहा है, यहां तक कि उसके साथ जिस्मानी ज़्यादती कर रहा है और आप ये सोच कर उसे नहीं बचा रहे हैं कि आप इस सब में पड़ना नहीं चाहते. अगर ऐसा है तो आप किस तरह के मर्द हो.

वैसे तो आप मर्दानगी की तूती बजाते रहते हो. और जब मर्दानगी दिखाने का मौका आता है तो आप दुबक के कहीं और चले जाते हो.

तो थोड़ी शर्म करो और थोड़ी हिम्मत करो और मैं समझता हूं कि मर्दों को ये सबक अगर जल्दी समझ आ जाए तो हालात सुधरने में देर नहीं लगेगी.

दीप्ति नवल, फिल्म अभिनेत्री

दीप्ति नवल, फिल्म अभिनेत्री

26 जनवरी के अवसर पर मैं इस देश के पुरुषों से ये कहना चाहती हूं कि औरत कोई भोग-विलास की वस्तु नहीं है, वो एक इंसान है.

आप एक औरत को सिर्फ और सिर्फ अपनी जिस्मानी भूख को मिटाने का जरिया न समझे.

किसी महिला को सराहने में कोई बुराई नहीं है लेकिन उस पर जानवरों की तरह न झपटें. आप किसी महिला के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग न करें.

मैं आपसे यही कहना चाहती हूं कि आप औरतों के साथ तमीज़ से पेश आएं.

सबसे पहले तो आप अपने घर की औरतों की इज्ज़त करना सीखें ताकि जब आप बाहर जाएं तो दूसरी महिलाओं की भी इज्ज़त करें.

हार्ड कौर, गायिका

हार्ड कौर, गायिका

इस 26 जनवरी, भारतीय पुरुषों से मैं कहना चाहती हूं कि सार्वजनिक स्थानों पर पेशाब न करें क्योंकि ये दृश्य महिलाओं और बच्चों के लिए बहुत ही ख़राब होता है.

हमारे देश में जगह जगह पर मूत्रालय हैं कृपया उनका प्रयोग करें.

साथ ही पुरुषों से मैं ये भी कहना चाहती हूं कि जियो और जीने दो. हम सबको एक दूसरे के साथ प्यार से रहना चाहिए.

आयुष्मान खुराना, फिल्म अभिनेता

आयुष्मान खुराना

अगर आपके घर में औरत को ऊंचा दर्जा नहीं दिया जाता तो आप बाहर भी औरतों के साथ दुर्व्यवहार ही करेंगे.

सबसे पहले तो अपने खुद के परिवार की मानसिकता को बदलने की ज़रूरत है तभी तो आप बाहर की औरतों की इज्ज़त करना शुरू करेंगे. लेकिन ये बदलाव तुरंत नहीं आ सकता.

लेकिन आज हम इस बारे में बात कर रहे हैं ये भी इस बदलाव की ओर एक कदम है.

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