अदालत, जहां जज, वकील, फरियादी सब महिलाएं

 बुधवार, 23 जनवरी, 2013 को 23:32 IST तक के समाचार
बलात्कार के खिलाफ गुस्सा

दिल्ली सामूहिक बलात्कार के बाद देश भर में गुस्सा है

पश्चिम बंगाल में एक ऐसी अदालत का गठन किया गया है जिसमें जज, वकील और सभी कर्मचारी महिलाएं होंगी. ये विशेष अदालत खास तौर से महिलाओं के खिलाफ अपराधों के मुकदमों को देखेगी.

इस अदालत का गठन कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अरुण मिश्रा के आदेश पर किया गया है. उन्होंने ही बुधवार को मालदा में इसका उद्घाटन किया.

इस अदालत में दो महिला जज होंगी जिनकी नियुक्ति पहले ही की जा चुकी है. उनके अलावा इस अदालत में सभी कर्मचारी और सरकारी वकील महिलाएं होंगी.

जस्टिस मिश्रा ने एक लिखित आदेश जारी कर बंगाल में इस तरह की अदालतें बनाने को कहा है.

अपने आदेश में उन्होंने कहा कि महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों से जुड़े मामलों के जल्द निपटारे और कानून कार्यवाही के दौरान महिलाओं की निजता को बनाए रखने के लिए इन अदालतों का गठन किया जा रहा है.

पहल का स्वागत

कोलकाता में कानूनी बिरादरी का कहना है कि महिला जजों और कर्मचारियों की नियुक्तियों से बलात्कार या छेड़छाड़ का शिकार हुईं महिलाओं को मदद मिलेगी.

"जब आसपास सब पुरूष होते हैं तो शिकायत करने वाली महिला ये कहने हिचकिचाती है कि उसके साथ क्या क्या हुआ. "

जॉयदीप मुखर्जी, महासचिव, ऑल इंडिया लीग ऐड फोरम

ऑल इंडिया लीग ऐड फोरम के महासचिव जॉयदीप मुखर्जी का कहना है, “जब आसपास सब पुरूष होते हैं तो शिकायत करने वाली महिला ये कहने हिचकिचाती है कि उसके साथ क्या क्या हुआ. उन्हें शर्मिंदगी महसूस होती है. अगर आसपास महिलाएं होंगी, तो वो अपनी बात कह पाएंगी.”

कलकत्ता हाई कोर्ट की अन्य वरिष्ठ वकील भारती मुतसुद्दी महिला जजों की नियुक्ति को तवज्जो देती हैं.

उन्होंने बीसीसी से कहा, “हमने बहुत बार देखा है जब पुरूष जज महिलाओं पर हुए अपराधों से जुड़े मामलों में संवेदनशील नहीं होते हैं. वो महिला की याचिका सुनते वक्त पुरूषों के पक्ष में झुक जाते हैं.”

वकीलों का कहना है कि भारतीय न्याय प्रणाली महिलाओं से जुड़े मामलों में जल्द इंसाफ दिलाने के मामले में पहले से ही पिछड़ रही है.

लेकिन नई दिल्ली में एक 23 वर्षीय युवती के सामूहिक बलात्कार और बाद हुई उसकी मौत के कारण देश भर ऐसे मामलों में जल्द न्याय किए जाने की जोरदार मांग उठ रही है.

पश्चिम बंगाल में बनी महिला अदालत को इसी सिलसिले की कड़ी के तौर पर देखा जा सकता है.

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