कौन हैं आरएसएस से जुड़े 10 चरमपंथी?

 गुरुवार, 24 जनवरी, 2013 को 08:30 IST तक के समाचार
मक्का धमाका

हैदराबाद के मक्का मस्जिद धमाकों में पहले कई मुस्लिम युवाओं की गिरफ़्तारी हुई थी.

केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे के राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी पर दिए गए बयान के बाद गृहसचिव आर के सिंह ने कहा है कि सरकार के पास कम से कम ऐसे 10 लोगों के नाम हैं जो समझौता एक्सप्रेस, मक्का मस्जिद और अजमेर शरीफ़ दरगाह धमाकों में शामिल थे और जिनका संबंध किसी ना किसी समय आरएसएस से रहा है.

राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए ने इस मामले में जिन 10 व्यक्तियों के नाम दिए हैं, उनमें से कुछ निम्न हैं:

स्वामी असीमानंद: असीमानंद 1990 से 2007 के बीच राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़ी संस्था वनवासी कल्याण आश्रम के प्रांत प्रचारक प्रमुख रहे.

असीमानंद को 19 नवंबर 2010 को गिरफ़्तार किया गया और साल 2011 में उन्होंने अदालत में उन्होंने इक़बालिया बयान में ये कहा कि अजमेर की दरगाह, हैदराबाद की मक्का मस्जिद और अन्यकई स्थानों पर हुए बम विस्फोटों में उनका और दूसरे हिंदू चरमपंथियों का हाथ था.

असीमानंद को साध्वी प्रज्ञा का क़रीबी माना जाता है, जो मालेगाँव धमाके की एक प्रमुख संदिग्ध हैं.

सुनील जोशी: राजस्थान एटीएस के मुताबिक सुनील जोशी अजमेर धमाकों के प्रमुख सूत्रधार थे और वो इन धमाकों के आरोप में गिरफ़्तार स्वामी असीमानंद के सतत संपर्क में थे.

जोशी की 29 दिसंबर, 2007 को मध्य प्रदेश के देवास में रहस्यमय हालात में हत्या हो गई थी. जोशी की हत्या की जांच तब तक आगे नहीं बढ़ी जब तक राजस्थान एटीएस ने कुछ लोगों को अजमेर धमाकों में गिरफ्तार नहीं कर लिया.

देवेंद्र गुप्ता: अजमेर और समझौता एक्सप्रेस धमाके में उनके ख़िलाफ़ आरोप हैं. कहा गया है कि वो 2003 से 2006 के बीच झारखंड स्थित जामताड़ा में आरएसएस के ज़िला प्रचारक रहे.

लोकेश शर्मा: देवगढ़ में आरएसएस 'नगर कार्यवाहक' रहे लोकेश शर्मा समझौता और मक्का मस्जिद मामले में गिरफ़्तार हैं.

संदीप डांगे: फिलहाल वो फ़रार हैं. उन्हें समझौता एक्सप्रेस और मुसलमानों से जुड़े दो धार्मिक स्थल पर हुए बम धमाकों में शामिल बताया जाता है. वो कथित तौर पर मऊ, इंदोर और शाजापुर में आरएसएस प्रचारक थे.

कमल चौहान: समझौता धमाका मामले में गिरफ़्तार. उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का प्रचारक बताया जा रहा है.

इन नामों के अलावा बताया जा रहा है कि इस सूची में शाजापुर में संघ प्रचारक रहे चंद्रशेखर लेवे, समझौता और मक्का मस्जिद मामले में गिरफ़्तार किए गए राजेंद्र, देवास में विस्तारक रहे रामजी कलसांग्रा और मालेगॉंव धमाके में अभियुक्त बनाई गईं साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के नाम भी इस सूची में शामिल हैं.

हालांकि संघ इन आरोपों से इनकार करता रहा है. भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने सुशील कुमार शिंदे के बयान के बाद कहा भी था कि जो लोग किसी भी तरह की ग़ैर-क़ानूनी गतिविधियों में शामिल पाए जाते हैं उनके ख़िलाफ़ उचित कार्रवाई की जानी चाहिए.

लेकिन इस तरह से संघ या बीजेपी के नाम को बदनाम करने की कोशिश करना सही नहीं है.

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