दिल्ली गैंगरेप: महिला हेल्पलाइन में सबसे बड़ी अड़चन पुलिस

 शनिवार, 26 जनवरी, 2013 को 07:59 IST तक के समाचार

महिला हेल्पलाइन चौबीस घंटे काम करती है

दिल्ली में महिलाओं की शिकायतों को सुनने के लिए दिल्ली सरकार की ओर से शुरू की गई 181 फोन नंबर की हेल्पलाइन के काम में सबसे बड़ी रुकावट दिल्ली पुलिस की 100 नंबर की हेल्पलाइन है.

यह कहना है कि 181 हेल्पलाइन की वरिष्ठ सलाहकार ख़दीजा का जो कहती हैं कि 100 नंबर की कार्यप्रणाली हमारे काम में सबसे बड़ी अड़चन है.

बीबीसी के साथ बातचीत में ख़दीजा ने कहा, “100 नंबर पर फोन करने पर कभी भी अच्छी प्रतिक्रिया नहीं होती. इमर्जेंसी की स्थिति में फिर हमें किसी सीनियर अधिकारी से बात करनी पड़ती है. ये थोड़ा मुश्किल काम है क्योंकि दो बजे रात आप इतनी आसानी से किसी को फोन नहीं कर सकते. हमें ये नहीं पता होता कि कौन डीसीपी या एसीपी ड्यूटी पर है या नहीं. ये बड़ी मुश्किल सामने आ रही है.”

पिछले महीने 16 दिसंबर को दिल्ली में एक लड़की के साथ हुए सामूहिक बलात्कार की घटना के बाद दिल्ली सरकार ने 31 दिसंबर को इस हेल्पलाइन की शुरुआत की थी.

"100 नंबर पर फोन करने पर कभी भी अच्छी प्रतिक्रिया नहीं होती. इमर्जेंसी की स्थिति में फिर हमें किसी सीनियर अधिकारी से बात करनी पड़ती है."

ख़दीजा, हेल्पलाइन की सलाहकार

इस हेल्पलाइन का नंबर है 181 और इसे 16 महिला कर्मचारी संचालित करती हैं, जिनका कॉल सेंटर दिल्ली सचिवालय में स्थित है.

24 घंटे कार्यरत रहने वाले इस कॉल सेंटर में हर दिन करीब 2,500 से 3,000 तक फोन आते हैं.

हेल्पलाइन की सलाहकार ख़दीजा के मुताबिक इसके संचालन में जो दूसरी बड़ी समस्या आ रही है वो ये कि दूसरे जो सपोर्ट सिस्टम हैं उनके साथ अभी नेटवर्किंग ठीक से स्थापित नहीं हो पाई है. वो कहती हैं कि फिलहाल इसका हल निकालने की कोशिश हो रही है.

पुलिस से बात करने में घबराती हैं महिलाएँ

खदीजा का कहना है कि अभी इस हेल्पलाइन के बारे में बहुत सी महिलाओं को ठीक से पता नहीं है कि इसका काम क्या है. वो कहती हैं कि कई बार जो महिलाएं फोन करती हैं वो अक्सर ऐसे सवाल करती हैं या फिर ऐसी समस्याएं रखती हैं जिनका हल हमारे पास नहीं होता है.

ख़दीजा कहती हैं कि इन महिलाओं को जब हम पुलिस से बात करने की सलाह देते हैं तो वे घबरा जाती हैं.

खदीजा के मुताबिक, “वो हमसे ही बात करना चाहती हैं पुलिस से बात करने से या पुलिस के पास जाने से बचती हैं. लेकिन समस्या है कि पुलिस का काम तो पुलिस ही कर सकती है, हम तो सिर्फ उन्हें सलाह दे सकते हैं.”

ख़दीजा कहती हैं कि हेल्पलाइन को सही तरीके से चलाने के लिए तात्कालिक जरूरत पुलिस का समुचित सहयोग है, खासकर निचले स्तर के पुलिस अधिकारियों का क्योंकि बड़े अधिकारियों को हर समय परेशान नहीं किया जा सकता.

वो कहती हैं कि महिला हेल्पलाइन के पास वाहनों की सुविधा नहीं है और यदि कुछ गाड़ियां उपलब्ध दी जाएं तो जरूरत पड़ने पर हम तुरंत उन्हें मदद के लिए भेज.

दिल्ली महिला आयोग के पास इस मकसद से सिर्फ एक गाड़ी है जो कि हर जगह तो पहुंच नहीं सकती. इसलिए गाड़ियों की समुचित व्यवस्था बहुत ही जरूरी है.

खदीजा बताती हैं कि महिला हेल्पलाइन में फोनकॉल रिसीव करने वाली सभी महिलाएं ही हैं और वो बहुत ही अच्छी तरह से लोगों से बात करती हैं. यही वजह है कि पीड़ित महिला यहां फोन करके खुद को बहुत ही संतुष्ट पाती है.

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