'पड़ोस का कुत्ता बहुत भौंकता है, कुछ करें...'

 शुक्रवार, 25 जनवरी, 2013 को 18:22 IST तक के समाचार

कभी-कभी ऐसी कॉल्स आती हैं जिनका यौन उत्पीड़न से कुछ लेना-देना नहीं होता

शाम के छह बजे हैं और दिल्ली की महिला हेल्पलाइन कॉल सेंटर में अचानक सभी फोन लाइनें लगातार बजने लगती हैं.

शाम होते ही ऐसी महिलाओं के फोन आने शुरु हो जाते हैं जो ऑफिस से निकल रही होती हैं और शिकायत करती हैं कि कुछ आदमी उनका पीछा कर रहे हैं या उनके साथ छेड़-छाड़ कर रहे हैं.

सहमी हुई इन महिलाओं को कॉल सेंटर में बैठी महिला टेलीकॉलर शांत करने की कोशिश करती हैं और फिर उन पुरुषों की जानकारी लेती हैं जो उनका पीछा करते हैं.

इसके बाद दिल्ली पुलिस के एंटी-स्टॉकिंग नंबर पर फोन किया जाता है और इन पुरुषों के बारे में शिकायत दर्ज की जाती है.

हर दिन हज़ारों परेशान महिलाओं की मदद करने वाली कॉल सेंटर की टेलीकॉलरों का काम तनाव भरा होता है.

लेकिन कुछ फोन ऐसे भी आते हैं, जिसे सुनने के बाद ऑफिस में इन महिलाओं की हंसी गूंज पड़ती है.

कुत्तों से परेशान

कॉल सेंटर में काम करने वाली एक महिला ने बताया, “एक बार हमारे यहां एक महिला का फोन आया जिसे शिकायत थी कि उसके पड़ोसी का कुत्ता बहुत भौंकता है. मैंने फोन होल्ड पर रखा और ज़ोर-ज़ोर से हंसने लगी. थोड़ी देर बाद मैंने उन्हें समझाने की कोशिश की कि ये कॉल सेंटर ऐसी परेशानियां सुलझाने के लिए नहीं खोला गया है. लेकिन वो महिला मानने को तैयार ही नहीं थी.”

यही नहीं, कई बार इस कॉल सेंटर में अपनी पत्नियों से परेशान पुरुषों के भी फोन आते हैं.

कॉल्स ऐसे भी...

महिला हेल्पलाइन
  • 'मेरी पत्नी मेरे साथ मार-पीट करती है, मैं कहां जाऊं?'
  • 'पड़ोस का कुत्ता बहुत भौंकता है, कुछ करें...'
  • 'मैं तो सिर्फ चेक कर रहा था कि आप रात को कॉल उठाते हैं या नहीं'
  • 'मेरा पति मुझसे रूठ कर चला गया है, उन्हें वापस ले आओ'
  • 'मेरी बहु मुझसे बहुत लड़ती है, क्या करूं?'

फ्लोर सुपरवाइज़र सविता एक वाक़या याद करते हुए कहती हैं, “एक बार एक पुरुष का फोन आया जिनकी शिकायत थी कि उनकी पत्नी उनके साथ बहुत मार-पीट करती हैं. इस फोन कॉल ने हमें दुविधा में डाल दिया और हमें समझ नहीं आया कि उन्हें क्या जवाब दें. वो हमसे पूछते रहे कि पुरुषों के लिए कोई हेल्पलाइन क्यों नहीं बनती भला?”

उन्होंने बताया कि कई बार कुछ महिलाएं इस हेल्पलाइन का गलत इस्तेमाल भी करती हैं.

गलत इस्तेमाल

सविता ने बताया कि कुछ मामलों में फॉलो-अप के बाद पता चला कि कुछ महिलाओं ने अपने पति या प्रेमियों के खिलाफ गलत शिकायत दर्ज करवाई थी.

“ऐसे मामलों को संभालना थोड़ा मुश्किल हो जाता है क्योंकि हम पुलिस पर कार्रवाई के लिए दबाव डालते हैं और बाद में जब हेल्पलाइन के गलत इस्तेमाल की बात सामने आती है, तो हमें शर्मिंदा होना पड़ता है.”

कॉल सेंटर में काम करने वाली एक दूसरी कर्मचारी से जब मैंने पूछा कि उन्हें कौन सा फोन कॉल सबसे ज़्यादा याद है, तो उन्होंने बताया, “एक बार एक महिला का फोन आया जो फूट-फूट कर रो रही थी. मुझे उन्हें शांत करने में काफी समय लगा. उसके बाद जब मैंने उनसे उनकी तकलीफ जानने की कोशिश की तो वो फिर से रोने लगी और बताया कि उनके पति उनसे नाराज़ होकर कहीं चले गए हैं. वो चाहती थी कि हम उनके पति को ढूंढ लाएं.”

शीला की जवानी...

उन्होंने बताया कि कुछ लोग तो रात के ढाई बजे सिर्फ ये चेक करने के लिए फोन करते हैं कि हेल्पलाइन वाकई रात के समय काम करती है या नहीं.

जहां दिल्ली की सड़कों पर महिलाओं पर अश्लील टिप्पणियां होना कोई नई बात नहीं है, लेकिन कुछ पुरुष महिलाओं के लिए बनी हेल्पलाइन को भी नहीं छोड़ते.

सविता बताती हैं कि कुछ पुरुष हेल्पलाइन पर मुख्यमंत्री का मज़ाक बनाने के लिए ‘शीला की जवानी’ गाना शुरू कर देते हैं और कई तो गालियां देने पर उतारू हो जाते हैं.

ऐसी फोन कॉल्स से लगता है कि असली बदलाव हेल्पलाइन बनाने से नहीं, बल्कि इस तरह के पुरुषों की मानसिकता बदलने के बाद ही आ सकता है.

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