पाकिस्तान से आकर जयपुर के चक्कर ही काटे

 सोमवार, 28 जनवरी, 2013 को 05:52 IST तक के समाचार
पाकिस्तानी विद्यार्थी

कागजी कार्रवाई के चक्कर में ये लोग जयपुर महोत्सव में सिर्फ एक दिन ही शामिल हो सके

पाकिस्तान के फॉरमेन क्रिश्चियन कॉलेज, लाहौर के तीन विद्यार्थियों और दो प्रोफेसरों के लिए जयपुर साहित्य महोत्सव काफी महँगा पड़ा.

फॉरमेन कॉलेज के इतिहास विभागाध्यक्ष डॉक्टर याकूब खान और राजनीति विज्ञान के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर एजाज़ हुसैन के साथ उनके तीन विद्यार्थियों अली ज़िया जाफ़री, सरमद हुसैन और तरहब असग़र जयपुर फेस्टिवल में शामिल होने के लिए 24 तारीख की सुबह वाघा बॉर्डर से भारत आए.

इन लोगों के मुताबिक वाघा सीमा पर मौजूद भारतीय अधिकारियों ने इनसे कहा कि आप दिल्ली या जयपुर कहीं भी जा सकते हैं.

हालांकि इन्हें सीधे जयपुर आना था, लेकिन ट्रेन निरस्त होने के कारण ये लोग जयपुर नहीं जा सके और दिल्ली आ गए.

उसके बाद 25 तारीख को ये लोग टैक्सी लेकर जयपुर चले गए. इन लोगों के मुताबिक जयपुर में एक सीआईडी का व्यक्ति इनके होटल में आया और इन लोगों को एफआरआरओ (फॉरेन रजिस्ट्री ऑफिस) के दफ्तर ले गया.

इन छात्रों के अनुसार वहां इन सभी लोगों को छह घंटे तक बिठाए रखा गया. इसके बाद कहा गया कि आप लोग गलत तरीके से यहां आ गए हैं.

थाने में हाजिरी

छात्रों का दावा है कि अधिकारी ने उनसे कहा कि आप लोग पहले दिल्ली जाइए और वहां थाने में हाजिरी लगाइए.

"हमारा समय और पैसा बर्बाद हुआ है. जब दोनों देशों के बीच शांति और सौहार्द्र की बातें की जाती है, तो इन परिस्थितियों में ये कैसे संभव है."

अली ज़िया जाफ़री, विद्यार्थी

उसके बाद ये सभी पांचों लोग 25 तारीख की ही रात को दिल्ली चल पड़े और अगले दिन सुबह दिल्ली पहुंचे. दिल्ली में ये लोग आसफ अली रोड स्थित उस दफ्तर में आए जहां पाकिस्तानी नागरिकों को आना होता है.

इनका कहना है कि यहां मौजूद अधिकारी एएस चीमा ने उनसे कहा कि उन्हें जयपुर से वापस यहां भेजने की जरूरत ही नहीं थी और वो आराम से जयपुर जा सकते हैं.

पाकिस्तानी मेहमानों के अनुसार दिल्ली के अधिकारी ने उनसे बहुत अच्छी तरह से सुलूक किया और कुछ काग़ज़ी कार्रवाई के बाद वापस जयपुर जाने के लिए कहा.

मामला यहीं ख़त्म नहीं हुआ. उसके बाद 26 तारीख को ही ये लोग फिर जयपुर आए. इनके जयपुर आने के बाद फिर सीआईडी वाला व्यक्ति दोबारा आया और फिर विधायकपुरी थाने ले गया.

सारी काग़ज़ी कार्रवाई दोबारा कराई गई. आखिरकार 27 तारीख को ये लोग पहली बार लिटरेचर फेस्टिवल पहुंच पाए. गौरतलब है कि फेस्टिवल 24 तारीख से ही शुरू है और 28 तारीख़ चलेगा.

यहां एक सत्र में अली ज़िया जाफ़री ने इस बारे में अपनी बात कही तब लोगों को इसकी जानकारी हुई.

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उन्हें प्रकरण की जानकारी नहीं है

अली जाफ़री ने कहा कि उन्हें मानसिक रूप से न सिर्फ प्रताड़ित किया गया बल्कि इधर-उधर की भाग-दौड़ में उनके सारे पैसे खर्च हो गए.

उनका कहना था, “हमारा समय और पैसा बर्बाद हुआ है. जब दोनों देशों के बीच शांति और सौहार्द्र की बातें की जाती है, तो इन परिस्थितियों में ये कैसे संभव है.”

वहीं इस दल की महिला सदस्य और फॉरमेन कॉलेज की छात्रा तरहब असगर का कहना था कि वो रात के तीन बजे तक दिल्ली में घूम रहीं थीं और उन्हें काफी डर लग रहा था.

पीटीआई की एक संवाददाता ने इस बारे में पुलिस का पक्ष जानना चाहा तो जयपुर के डीसीपी साउथ डॉन ए जोश ने इस पूरे मामले से ये कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है.

वहीं जयपुर के एफआरओ प्रद्युम्न शर्मा का कहना है, “नियम के अनुसार जब पहले स्थान पर आप पहुंचें तो आपको रिपोर्ट करना होता है.” हालांकि उनका कहना था कि उन्हें इस खास मामले की जानकारी नहीं है.

जयपुर पुलिस उपायुक्त (दक्षिण) डॉन के जोज़ ने पीटीआई को बताया कि उनका दफ्तर ऐसे मामलों से नहीं निपटता.

वहीं इन लोगों ने सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर से भी बात की और उनके हस्तक्षेप के बावजूद पुलिस के व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया.

इस बीच, प्रोफेसर याक़ूब ख़ान दिल्ली में भी एक कार्यक्रम में आए हुए हैं. उनका कहना है कि वो इस मामले में भारत के विदेश सचिव से भी मिलेंगे और इस घटना की चर्चा करेंगे.

प्रोफेसर याक़ूब ने कहा कि वे पाकिस्तान वापस लौटकर भी वहां के अधिकारियों से कहेंगे कि भारत से कोई मेहमान आएं तो इस तरह उन्हें परेशान न होना पड़े.

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