गोबर से महिला उद्यमी ने बनाया सफल करियर

 रविवार, 27 जनवरी, 2013 को 12:10 IST तक के समाचार

कबाड़ से जुगाड़ का मंत्र देने वालीं महिमा अपने पेश को मज़ेदार और सुकून भरा बताती हैं

मनोविज्ञान में पढ़ाई, फ़ोटोग्राफ़ी का गुण और विज्ञापन की दुनिया का अनुभव लेने के बाद कोई गोबर के ज़रिए काम करना चाहे तो सिरफिरा होने का ख़िताब मिलना तय है.

वैसे अपने बारे में कुछ ऐसी ही राय रखती हैं महिला उद्यमी महिमा मेहरा जो कहती हैं कि हम कुछ 'बावले' से लोग हैं.

महिमा बीते लगभग एक दशक से काग़ज़ बनाने के उद्योग से जुड़ी हैं लेकिन ये काग़ज़ पेड़ों को काटकर नहीं बल्कि हाथी के गोबर से बनाया जाता है.

हाथी का गोबर ही क्यों

काग़ज़ बनाने के लिए हाथी के ही गोबर का इस्तेमाल करने का ख्याल कैसे आया?

यह पूछे जाने पर महिमा बताती हैं, ''मैं जयपुर से हूं जहां हाथी आमतौर पर नज़र आते हैं. एक दिन हुआ यूं कि वहां हाथी के गोबर पर मेरे एक साथी की नज़र पड़ी. उन्होंने कहा इसमें फ़ाइबर है, इसका कुछ इस्तेमाल हो सकता है क्या? इंटरनेट की मदद से पता चला कि दुनिया के कुछ हिस्सों में इससे काग़ज़ बनाया जा रहा है.''

महिमा बताती हैं कि इसके बाद काम चल निकला जो अब सफलतापूर्वक जारी है. वे स्थानीय छोटे उत्पादकों से संपर्क करके उनके बनाए काग़ज़ को बड़े बाज़ारों तक पहुंचाती हैं.

पढ़ाई और पेशे का संबंध

हाथी के गोबर से बने काग़ज़ से ग्रीटिंग कार्ड और दूसरे कई उत्पाद बनाए जा रहे हैं

आमतौर पर पढ़ाई और पेशे में संबंध होता है लेकिन महिमा के मामले में ऐसा नहीं है.

महिमा बताती हैं, ''कई तरह के काम करने के बाद मैं इस जगह पर पहुंची हूं कि एक वक्त मेरे परिवार वालों को लगता था इसका क्या होगा? लेकिन मैं हमेशा से ये जानती थी कि मुझे पर्यावरण-संरक्षण से जुड़ा कोई काम करना है पर प्रशिक्षण जैसी कोई चीज़ नहीं थी.''

वे कहती हैं, ''कबाड़ से जुगाड़ की जो हमारी परंपरा रही है, मेरा आइडिया बस वहीं से निकला और मैं समझती हूं कि अगर कोई भी ऐसा कोई ख्याल रखता है तो उसे बस कूद पड़ना चाहिए, मंज़िल ख़ुद मिल जाती है.''

ख़्याल से हक़ीक़त तक

"अगर वाकई आपकी किसी ख़ास चीज़ में दिलचस्पी है तो उसे पेशा बनाने से मत हिचकिचाइए. सिर्फ़ आपकी रूचि और इरादा ही क़ामयाबी तक ले जाते हैं"

महिमा मेहरा

ऐसे कई लोग होंगे जो कई तरह के काम करना चाहते होंगे. लेकिन आख़िर कितने लोग ऐसा कुछ कर पाते हैं?

महिमा कहती हैं, ''अगर वाकई आपकी किसी ख़ास चीज़ में दिलचस्पी है तो उसे पेशा बनाने से मत हिचकिचाइए. सिर्फ़ आपकी रूचि और इरादा ही क़ामयाबी तक ले जाते हैं.''

वे कहती हैं, ''मेरी नज़र में हमारे वक्त में लीक से हटकर चीज़ें करने की जगह है क्योंकि आज लोग प्रयोग से डरते नहीं हैं. एक बार आप कूद पड़ें तो फिर बस टिके रहने के लिए दृढ़-संकल्प रहिए और फिर देखिए कि धीरे-धीरे चीज़ें आपके हक़ में बदलेंगीं.''

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